Sheep Farming: भेड़ पालन में बड़े नुकसान की ये हैं दो बड़ी वजह, एक्सपर्ट टिप्स का करें पालन 

Sheep Farming: भेड़ पालन में बड़े नुकसान की ये हैं दो बड़ी वजह, एक्सपर्ट टिप्स का करें पालन 

Sheep Farming भेड़ पालन खासतौर पर ऊन और मीट के लिए किया जाता है. जबकि भेड़ का दूध उत्पादन और डिमांड दोनों ही कम हैं. हालांकि ऊन की डिमांड भी अब कुछ कम हो गई है, लेकिन मीट की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि अगर भेड़ों से मोटा मुनाफा कमाना है तो उन्हें बीमारियों से दूर रखना होगा.

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Sheep Farming: भेड़ पालन में बड़े नुकसान की ये हैं दो बड़ी वजह, एक्सपर्ट टिप्स का करें पालन भेड़-बकरियों में तेजी से फैलती है पीपीआर और शीप पॉक्स बीमारी.

देश में भेड़ पालन तेजी से बढ़ रहा है. जम्मू-कश्मीर हो या दक्षि‍ण भारत के राज्य, भेड़ की डिमांड खूब बढ़ रही है. ऐसा नहीं है कि ये डिमांड भेड़ की ऊन के लिए बढ़ रही है, बल्कि बकरे के मुकाबले अभी भेड़ के मीट को बहुत पसंद किया जा रहा है. यही वजह है कि भेड़ पालन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. दक्षि‍ण भारत में तो बड़े-बड़े शीप फार्म खुल रहे हैं. लेकिन कुछ ऐसी वजह हैं जिसके चलते भेड़ पालन में बड़ा नुकसान होता है. वहीं एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुपालन छोटे पशुओं का किया जाए या बड़े पशुओं का उस पर खुराक और बीमारियों पर सबसे ज्यादा खर्च होता है. 

भेड़ पालन राजस्थान में हो या फिर जम्मू-कश्मीर में, भेड़ों को बीमारियां जल्दी अपनी चपेट में लेती है. अगर बकरी की तरह से भेड़ पालन में भी अगर आप मेमनों की मृत्यु दर को कंट्रोल कर लेते हैं तो फिर मुनाफा बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है. और ये तभी मुमकिन है जब भेड़ पालक साइंटीफिक तरीका अपनाकर वक्त से वैक्सीनेशन कराते हुए भेड़ पालन करें.  

जानलेवा है कन्टेजियस एकथाईमा

एरिया के हिसाब से भेड़ों की कन्टेजियस एकथाईमा बीमारी को पशुपालक अलग-अलग नाम से जानते हैं. जैसे पहाड़ी इलाकों गददी भेड़ पालने वाले इस बीमारी को मौढ़े कहते हैं. यह बीमारी एक खास तरह के विषाणु से होती है. इसके चलते भेड़ के मुंह-नाक और होठों के बाहरी तरफ फोड़े हो जाते हैं. वक्त से इलाज ना मिलने पर ये काफी बढ़ जाते हैं, जिसके चलते भेड़ का मुंह फूल जाता है. भेड़ को घास खाने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है. साथ ही साथ बीमार भेड़ को हल्का बुखार भी आ जाता है.

कन्टेजियस एकथाईमा से ऐसे बचेंगी भेड़

  • बीमार भेड़ को अलग कर उनका इलाज कराना चाहिए. 
  • हर रोज फोड़ों को लाल दवाई के घोल से धोएं. 
  • भेड़ के फोड़ों पर एन्टीसेप्टिक मलहम लगाना चाहिए. 
  • डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक इन्जेक्शन लगवाएं. 

एन्थ्रेक्स से चली जाती है भेड़ों की जान 

एन्थ्रेक्स बीमारी को भेड़ पालक रक्तांजली बीमारी के नाम से जानते हैं. यह रोग जीवाणु द्वारा होता है. इस बीमारी के होने पर भेड़ को बहुत ते बुखार आता है. सही वक्त पर इलाज ना मिलने पर भेड़ की मौत तक हो जाती है. जब भेड़ की मौत होने वाली होती है तो उसके नाक-कान, मुंह और गुदा से खून आने लगता है.

एन्थ्रेक्स से ऐसे बचेंगी भेड़ 

  • एन्थ्रेक्स से मरने वाली भेड़ों की खाल नहीं निकानी चाहिए. 
  • मरी हुई भेड़ को गहरे गड्ढे में दबा देना चाहिए. 
  • जहां भेड़ मरे उस शेड को खत्म कर नया शेड बनाएं. 
  • भेड़ों की चरागाह को भी बदल देना चाहिए. 
  • डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक इन्जेक्शन लगवाएं. 
  • सरकारी केन्द्र पर चार्ट के अनुसार भेड़ का वैक्सीनेशन कराएं.

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