देश के कई इलाकों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालातदेश के कई इलाकों में बारिश और बाढ़ का खतरा देखा जा रहा है. कई राज्यों में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. भूस्खलन और बादल फटने की भी खबरें हैं. अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि बीते शनिवार-रविवार को उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, और अगले कुछ दिनों में और बारिश का अनुमान है. इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित कश्मीर है जहां अलग-अलग जिलों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंच गई है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कश्मीर के पुंछ, राजौरी और डोडा जिलों में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के लापता होने की खबर है. पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में, लगातार बारिश के कारण हुए कई भूस्खलनों में नौ लोगों की मौत हो गई, और बचाव दलों ने चार शव बरामद किए हैं, एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया.
पड़ोसी राज्य असम में, राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि रविवार को बाढ़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई. राज्य के सात जिलों में 57,000 से अधिक लोग भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं. भारत के मौसम विभाग ने सोशल मीडिया वेबसाइट X पर एक पोस्ट में कहा, "अगले 6-7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय मॉनसून की स्थिति बने रहने की संभावना है." जून के मध्य में मॉनसून की शुरुआत के बाद से पड़ोसी हिमालयी देश नेपाल में बाढ़, भूस्खलन, भारी बारिश और बिजली गिरने से 27 लोगों की मौत हो गई है, एक व्यक्ति लापता है और 69 अन्य घायल हुए हैं.
लगातार कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण ऊपरी असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. जोरहाट, शिवसागर और चराइदेव जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं. प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से अनेक गांव डूब गए हैं. कई सड़कों और नदी-बांध के तटों को नुकसान पहुंचा है, जबकि सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है.
जोरहाट जिले में भोगदोई नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया है. बोरिगांव क्षेत्र का तटबंध बाढ़ के पानी से ऊपर से बहने लगा, जिसके बाद पानी रिहायशी इलाकों और खेतों में घुस गया. कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जबकि अनेक सड़कें पानी में डूब जाने से आवागमन बाधित हो गया है. लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है.
पुलिस ने सोमवार को बताया कि भूस्खलन के बाद जमा हुए मलबे के कारण कई हाईवे बंद हो गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय राजधानी काठमांडू को दक्षिणी मैदानी इलाकों से जोड़ने वाला हाईवे भी शामिल है. नेपाल के मौसम विभाग ने सोमवार को हिमालयी देश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है, साथ ही कोसी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रांतों में कुछ जगहों पर भारी बारिश की उम्मीद है.
असम के जल संसाधन मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने कहा, "नागालैंड इलाके में भारी बारिश की वजह से यह भयानक बाढ़ आई है. मैंने इस इलाके में ऐसी बाढ़ पहले कभी नहीं देखी. दुर्भाग्य से ऐसा हुआ है, और हम सभी लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री दिल्ली में हैं, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के संपर्क में हैं. वे हालात का जायजा ले रहे हैं."
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और बादल फटने से बड़े पैमाने पर तबाही मची है, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग अभी भी लापता हैं. सीमावर्ती जिले राजौरी और पुंछ इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. पुंछ में भारी बारिश के कारण भाटा डुरियन सुरंग का उत्तरी हिस्सा ढह गया है. वहीं, लगातार बारिश के कारण राजौरी शहर में खेओरा नाला उफान पर है, जिससे आस-पास की रिहायशी कॉलोनियां डूब गई हैं और लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है.
अचानक आई बाढ़ में गाड़ियां बह गई हैं और भूस्खलन से घर ढह गए हैं. SDRF की अगुवाई में पुलिस और सेना की मदद से कई एजेंसियां मिलकर बचाव अभियान चला रही हैं और लगातार बारिश के बीच बचे हुए लोगों की तलाश कर रही हैं. अधिकारियों ने खतरे को देखते हुए अमरनाथ और वैष्णो देवी की यात्रा को फिलहाल रोक दिया है. IMD ने जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम का यह खराब दौर अगले 24 से 36 घंटों तक जारी रहने की संभावना है.
गाय और भैंस जैसे मवेशी बाढ़ के पानी में फंस गए हैं. राजौरी प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे मवेशियों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें. ऊंचे इलाकों में रहने वाले गुर्जर समुदाय के लोग बाढ़ के पानी की मार झेल रहे हैं. कई जगहों पर लोग बाढ़ के पानी में फंसे अपने मवेशियों (ज्यादातर भैंसों) को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हुए देखे जा सकते हैं.
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