मन की बातप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में खेती, किसानों की आमदनी बढ़ाने और पारंपरिक कृषि उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ने की कई पहल का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव तक पहुंच रही है. वहीं, पंजाब में प्राकृतिक रंगों वाली कपास की खेती, मेघालय में मोटे अनाज से नए उत्पाद तैयार करने और बांस व कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री बनाने जैसी पहल किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए नए अवसर खोल रही हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना से भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल रहे हैं. मेघालय के खंडुली गांव में दो महिलाओं ने मोटे अनाज से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए खाद्य उत्पाद तैयार करने शुरू किए, जिससे इन अनाजों की मांग बढ़ी.
वेस्ट गारो हिल्स के किसान चेकजिंग संगमा ने आधुनिक तरीकों से मिलेट्स की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ाई. नागालैंड के केजोमा गांव में भी एक दशक से अधिक समय बाद 2024 में मोटे अनाज की खेती दोबारा शुरू हुई और 2025 में पहला मिलेट्स महोत्सव आयोजित किया गया.
मोदी ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ की ‘नव-त्रिंजन’ परियोजना का उल्लेख किया. इसके तहत प्राकृतिक रंगों वाली जैविक कपास उगाई जाती है, जिससे कपड़े को रंगने के लिए अतिरिक्त रसायनों की जरूरत नहीं पड़ती. परियोजना के अंतर्गत बुनाई स्कूल भी शुरू किया गया है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि रामनदीप कौर, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाएं बुनाई का हुनर सीखकर अपने परिवारों की आर्थिक मदद कर रही हैं. उन्होंने बताया कि रेखा रानी की बुनी शॉल राष्ट्रपति को भेंट की गई थी.
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र की ‘शबरी नेचुरल्स’ पहल का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को जनजातीय कला दर्शाने वाली पैकेजिंग के साथ बाजार में लाया जा रहा है.
इस पैकेजिंग को जापान का ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है. उन्होंने कर्नाटक के एक स्टार्टअप का भी उल्लेख किया, जो बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री बना रहा है. मोदी ने कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग भी अहम है.
मोदी ने बताया कि इस साल गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की एक दिन की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले साल से 1.5 करोड़ रुपये ज्यादा है. उन्होंने त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के उत्पाद खरीदने की अपील की. इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान और आत्मनिर्भर भारत की पहल को मजबूती मिलेगी.
खेती से इतर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेंवल नदी और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने बताया कि वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पौधरोपण से नदी और दर्जनों जलस्रोतों को बहाल करने में मदद मिली. दीपावली और छठ से पहले चल रहे स्वच्छता अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने लोगों से अपने आसपास सफाई बनाए रखने की अपील की.
प्रधानमंत्री ने बताया कि ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-परामर्श किए जा चुके हैं. उन्होंने अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, लद्दाख और नगालैंड के उदाहरण देते हुए बताया कि इस सेवा से दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिली. उन्होंने देशभर में करीब 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका का भी उल्लेख किया.
मोदी ने चेन्नई स्थित IIT मद्रास के ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का जिक्र किया, जहां 100 मानव मस्तिष्कों की विस्तृत मैपिंग के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि इससे जुड़े डेटा को शोध के लिए ओपन सोर्स के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. प्रधानमंत्री ने सोने की गुणवत्ता जांचने, बैंक धोखाधड़ी में गंवाई रकम की जल्द वापसी, सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में एआई के इस्तेमाल और ड्रोन व इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट-चार्जिंग बैटरी विकसित करने वाले स्टार्टअप का भी उल्लेख किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ के 12 साल पूरे होना उनके लिए तीर्थयात्रा जैसा अनुभव रहा है. उन्होंने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाली ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने की अपील की.
इसी दिन वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी की 100वीं जयंती का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से उनके योगदान के बारे में पढ़ने को कहा. इसके अलावा, उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद की 150वीं जयंती और उनकी पुस्तक ‘आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी’ का जिक्र किया. कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने दीपावली और छठ की शुभकामनाएं दीं.
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