लखीमपुर खीरी हिंसा केस में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को होगी सुनवाई

लखीमपुर खीरी हिंसा केस में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को होगी सुनवाई

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर को सुनवाई कर सकता है. इस मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने जमानत की शर्तों में राहत मांगी है. वहीं, ट्रायल कोर्ट के जज पर लगे आरोपों की जांच के लिए भी अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है. मुकदमे में अब तक 86 गवाहों की गवाही हो चुकी है.

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लखीमपुर खीरी हिंसा केस में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को होगी सुनवाईलखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की नजर

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर को सुनवाई कर सकता है. इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं. उन्होंने जमानत की शर्तों में राहत देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. इससे पहले कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया था. वहीं, मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल कोर्ट के जज को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कार्रवाई करने को कहा है. इस मामले में किसानों की मौत, गवाहों की सुनवाई और अदालत में चल रही कार्रवाई को लेकर लगातार नजर बनी हुई है.

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला?

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया इलाके में 3 अक्टूबर 2021 को किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी. उस समय किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके में आने का विरोध कर रहे थे. इस घटना में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी, जिनमें चार किसान भी शामिल थे. आरोप है कि एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था. इसके बाद गुस्साए किसानों ने कथित तौर पर वाहन चालक और बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी. इस घटना के बाद देशभर में काफी विवाद हुआ था और किसानों को न्याय दिलाने की मांग उठी थी.

ट्रायल के अंतिम चरण में पहुंचा मामला

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में अभियोजन पक्ष के कुल 130 गवाहों में से 86 की गवाही दर्ज की जा चुकी है. अभियोजन पक्ष वे लोग होते हैं, जो अदालत में आरोप साबित करने के लिए सबूत और गवाह पेश करते हैं. दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप तय किए थे. इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी. अब सुप्रीम कोर्ट की नजर इस बात पर भी है कि मुकदमे की सुनवाई बिना अनावश्यक देरी के पूरी हो.

ट्रायल कोर्ट के जज पर लगे आरोपों की भी जांच

इस मामले में सुनवाई कर रहे जज के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया था कि संबंधित जज ने कई आपराधिक मामलों को दूसरी अदालतों से अपने पास स्थानांतरित किया और कुछ मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया. इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले को देखने और जरूरी कदम उठाने को कहा था. इसके बाद 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले में जल्द कार्रवाई करने को कहा. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाए.

हालांकि, इन आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह आरोपों और उनके जवाब पर इस स्तर पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है. मामले को उचित प्रक्रिया के तहत देखने की जिम्मेदारी हाई कोर्ट को दी गई है.

सरकारी वकील को बदलने का भी मामला

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पीड़ित पक्ष ने मुकदमा लड़ रहे सरकारी वकील की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की पैरवी के लिए एक वरिष्ठ सरकारी वकील नियुक्त करने को कहा. अक्टूबर की शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले में सरकारी वकील को बदलने की प्रक्रिया पर कदम उठाया गया है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और गवाहों की गवाही सहित जरूरी कानूनी प्रक्रिया ठीक से पूरी की जानी चाहिए.

दूसरी ओर, आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि मामले से जुड़े जज, सरकारी वकील और आरोपी सभी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, लेकिन आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया.

आशीष मिश्रा की जमानत पर पहले क्या हुआ?

आशीष मिश्रा ने इस मामले में जमानत और जमानत की शर्तों में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी, जिसे बाद में जारी रखा गया और जमानत को अंतिम रूप दिया गया. हालांकि, उन पर कई शर्तें लगाई गई थीं. 6 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत की शर्तों में और ढील देने की मांग खारिज कर दी थी. अदालत ने उस समय राहत देने का पर्याप्त आधार नहीं पाया. अब 26 अक्टूबर को होने वाली संभावित सुनवाई में उनकी याचिका पर आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी.

26 अक्टूबर की सुनवाई पर क्यों टिकी हैं नजरें?

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अगली सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें आशीष मिश्रा की जमानत से जुड़ी मांग के साथ-साथ मुकदमे की निष्पक्षता और सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं. एक ओर मामले में गवाहों की सुनवाई आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ट्रायल कोर्ट के जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर हाई कोर्ट की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है. इस मामले में आगे क्या फैसला होता है, यह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संबंधित अदालतों की कार्रवाई पर निर्भर करेगा. फिलहाल, 26 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई में क्या निर्देश दिए जाते हैं, इस पर पीड़ित परिवारों, किसानों और मामले से जुड़े पक्षों की नजर रहेगी. (PTI)

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