बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतरी फोगाट खाप, सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतरी फोगाट खाप, सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में सर्वजातीय फोगाट खाप बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतर आई है. चरखी दादरी में हुई बैठक में खाप ने निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की. खाप प्रधान सुरेश फोगाट ने किसानों, गरीब परिवारों और छोटे व्यापारियों पर असर पड़ने की आशंका जताते हुए सरकार को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी.

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बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतरी फोगाट खाप, सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनीबिजली कर्मचारियों की हड़ताल को फोगाट खाप का समर्थन

हरियाणा में बिजली निगम के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. अब चरखी दादरी की सर्वजातीय फोगाट खाप भी बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतर आई है. खाप ने 22 से 24 तारीख तक तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल कर रहे बिजली कर्मचारियों को खुला समर्थन देने का फैसला किया है. खाप का कहना है कि बिजली निगम के निजीकरण का असर किसानों, छोटे व्यापारियों और आम परिवारों पर पड़ सकता है. खाप ने सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी, तो हरियाणा में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

बिजली कर्मचारियों के समर्थन में फोगाट खाप की बैठक

चरखी दादरी स्थित स्वामी दयाल धाम में सर्वजातीय फोगाट खाप की कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई. इस बैठक की अध्यक्षता खाप प्रधान सुरेश फोगाट ने की. बैठक में हरियाणा में बिजली निगम के प्रस्तावित निजीकरण और इसके खिलाफ चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर चर्चा की गई. बैठक में सभी पदाधिकारियों ने मिलकर फैसला लिया कि खाप बिजली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करेगी. कर्मचारी 22 से 24 तारीख तक तीन दिनों की सांकेतिक हड़ताल कर रहे हैं. इस हड़ताल का मुख्य विरोध बिजली निगम के निजीकरण की योजना को लेकर है. फोगाट खाप ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और सरकार को इस मामले में जल्द फैसला लेना चाहिए.

निजीकरण से किसानों और आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

फोगाट खाप के प्रधान सुरेश फोगाट ने कहा कि बिजली कर्मचारियों की यह हड़ताल केवल उनकी नौकरी या निजी फायदे के लिए नहीं है, बल्कि आम जनता के अधिकारों से भी जुड़ी है. उनके मुताबिक, अगर बिजली निगम का निजीकरण होता है, तो इसका असर किसानों, छोटे दुकानदारों और कम व मध्यम आमदनी वाले परिवारों पर पड़ सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि बिजली व्यवस्था निजी हाथों में जाने से किसानों को ट्यूबवेल के लिए मिलने वाली फ्लैट रेट की सुविधा खत्म हो सकती है. फ्लैट रेट का मतलब है कि बिजली का बिल इस्तेमाल की गई हर यूनिट के हिसाब से अलग-अलग तय होने के बजाय एक तय दर के आधार पर लिया जाता है. किसानों के लिए यह सुविधा खेती की लागत कम रखने में मदद करती है.

खाप प्रधान ने यह भी कहा कि गरीब परिवारों को मिलने वाली सस्ती बिजली महंगी हो सकती है. उनके अनुसार, बिजली की दर 10 से 15 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचने की आशंका है. हालांकि, यह खाप की ओर से जताई गई आशंका है. बिजली की वास्तविक दरों में बदलाव होगा या नहीं, यह सरकार के फैसले और लागू होने वाली व्यवस्था पर निर्भर करेगा.

मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के बयानों पर उठाए सवाल

खाप प्रधान सुरेश फोगाट ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के बयानों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर सरकार कर्मचारियों के हित में काम करने की बात कर रही है, तो फिर बिजली निगम के निजीकरण की प्रक्रिया आगे क्यों बढ़ाई जा रही है? उन्होंने सरकार से मांग की कि निजीकरण से जुड़े फैसले और कानून को तत्काल वापस लिया जाए. उनका कहना है कि बिजली निगम की मौजूदा व्यवस्था को पहले की तरह ही चलने दिया जाना चाहिए, ताकि किसानों और आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर कोई बुरा असर न पड़े. खाप ने यह भी कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए करना चाहिए. इससे कर्मचारियों और आम लोगों के बीच पैदा हो रही चिंता को दूर किया जा सकता है.

मांग नहीं मानी तो पूरे हरियाणा में आंदोलन की चेतावनी

सर्वजातीय फोगाट खाप ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर बिजली निगम के निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो विरोध को और बड़ा किया जाएगा. खाप प्रधान ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पूरे हरियाणा की जनता को एकजुट करके सड़कों पर उतरा जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि खाप पंचायतें इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं हैं. अगर सरकार ने कर्मचारियों और आम जनता की मांगों को अनदेखा किया, तो बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी.

बिजली निजीकरण का मुद्दा क्यों है अहम?

बिजली लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है. खेती, छोटे कारोबार और घरों के कामकाज के लिए बिजली बेहद जरूरी है. ऐसे में बिजली निगम के निजीकरण को लेकर किसानों और कर्मचारियों के बीच चिंता देखी जा रही है. बिजली कर्मचारियों को आशंका है कि निजीकरण से उनकी सेवा और कामकाज की व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जबकि किसान और आम उपभोक्ता बिजली की दरों तथा मौजूदा सुविधाओं को लेकर चिंतित हैं. फिलहाल, सर्वजातीय फोगाट खाप ने बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को समर्थन देकर इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध और निजीकरण को लेकर उठ रही मांगों पर क्या कदम उठाती है. (प्रदीप कुमार का इनपुट)

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