Kisan Karwan: कड़ाके की ठंड में भी सजा किसान कारवां का मंच, हजारों की संख्या में पहुंचे किसान

Kisan Karwan: कड़ाके की ठंड में भी सजा किसान कारवां का मंच, हजारों की संख्या में पहुंचे किसान

हींग की खुशबू और रंगों से सजे हाथरस जिले में किसान तक का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों को खेती, पशुपालन, नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी गई. हर बार की तरह इस बार भी जादू के जरिए किसानों को नई तकनीक, खेती और नई-नई क़िस्मों के बारे में भी जानकारी दी गई.

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Kisan Karwan: कड़ाके की ठंड में भी सजा किसान कारवां का मंच, हजारों की संख्या में पहुंचे किसानहाथरस जिले की मिट्टी पर पहुंचा किसान तक का किसान कारवां

हींग की महक और गुलाल के रंगों से सराबोर हाथरस जिले की उपजाऊ धरती पर किसान तक का किसान कारवां अपने पांचवें पड़ाव पर सहपाऊ ब्लॉक के खेरिया गांव पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के व्यापक कवरेज के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. किसानों ने आलू, सरसों, गेहूं, बाजरा जैसी परंपरागत फसलों के साथ-साथ बागवानी और पशुपालन से जुड़ी समस्याओं, नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी कृषि वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों और पशुपालन विशेषज्ञों से प्राप्त की. इस दौरान किसानों ने अपने सवाल खुले मंच पर रखे, जिनका समाधान संबंधित अधिकारियों ने विस्तार से किया.

किसानों के अनुभव और उनकी कहानी

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार की पहल से शुरू हुए इस किसान कारवां के साथ अपने अनुभव साझा किए. किसानों का कहना था कि हाथरस की उर्वर मिट्टी न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का आधार भी प्रदान करती है. किसानों ने यह भी बताया कि योगी सरकार की किसान हितैषी योजनाएं उनके जीवन में सप्त रंगों की तरह खुशहाली भर रही हैं.

छह चरणों में चला जागरूकता कार्यक्रम

करीब चार से पांच घंटे तक चले इस आयोजन को कुल छह चरणों में सम्पन्न किया गया. हर चरण में खेती और पशुपालन से जुड़े अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी. कार्यक्रम के दौरान मैजिशियन द्वारा रोचक अंदाज में किसान कारवां के संदेश प्रस्तुत किए गए, वहीं इफको के अधिकारियों ने आलू, सरसों सहित अन्य फसलों में लगने वाले रोगों से बचाव के लिए रासायनिक दवाओं और उपचार की जानकारी साझा की.

पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां

कार्यक्रम के पहले चरण में पशुपालन विभाग के विकास यादव ने पशुओं के स्वास्थ्य के लिए टीकाकरण की अहमियत बताई. उन्होंने एफएमडी और लम्पी रोग से बचाव, टैगिंग के महत्व, नेपियर घास से जुड़ी सरकारी योजनाओं और पशुओं में बांझपन की समस्या के समाधान पर विस्तार से जानकारी दी.

प्रगतिशील किसानों ने साझा किए अनुभव

दूसरे चरण में प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए. नरेंद्र कुमार ने ऑर्गेनिक खेती के लाभ बताते हुए रसायनमुक्त अन्न और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के तरीकों पर प्रकाश डाला. गेंदा सिंह रावत ने कहा कि पशुपालन के बिना किसान की कल्पना अधूरी है. वहीं राकेश कुमार सिंह ने केंचुआ खाद बनाने और उसके उपयोग की पूरी प्रक्रिया समझाई, जिससे अन्य किसान भी प्रेरित हुए.

जादू के जरिए खेती का संदेश

तीसरे चरण में मैजिशियन सलमान ने अपने जादू के माध्यम से उर्वरक, मिट्टी परीक्षण और पशुपालन से जुड़ी जानकारियों को रोचक अंदाज में किसानों तक पहुंचाया, जिससे संदेश और अधिक प्रभावी बना.

कृषि वैज्ञानिकों की तकनीकी सलाह

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र हाथरस के वैज्ञानिक डॉ. ए.एच. वारसी ने गेहूं, आलू और सरसों की फसलों में लगने वाले रोगों, उनके उपचार और सही दवाओं की जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि अगले सीजन में किसानों को सरसों का बीज निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही केवीके द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी भी किसानों को दी गई.

सम्मान और मुस्कान के साथ विदाई

पांचवें चरण में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के समापन पर किसान नई जानकारियों और सरकारी योजनाओं की समझ के साथ संतोष भरी मुस्कान लिए अपने घरों की ओर लौटे, जिससे किसान तक का किसान कारवां अपने उद्देश्य में सफल नजर आया.

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