Gehu Gyan: छुपकर जड़ों को खाता है ये कीट, गेहूं की पैदावार को भी करता है कम

Gehu Gyan: छुपकर जड़ों को खाता है ये कीट, गेहूं की पैदावार को भी करता है कम

गेहूं की फसल में बुवाई के 20–25 दिन बाद लगने वाला जड़ का माहों रोग किसानों के लिए बड़ा खतरा है. इस खबर में जानिए इसकी आसान पहचान, होने वाला नुकसान और समय पर नियंत्रण करने का आसान तरीका.

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Gehu Gyan: छुपकर जड़ों को खाता है ये कीट, गेहूं की पैदावार को भी करता है कम गेहूं में माहों रोग से ऐसे करें बचाव

गेहूं रबी मौसम की एक बहुत जरूरी फसल है. किसान इससे अच्छी पैदावार की उम्मीद करते हैं. इसके लिए वे समय पर बुवाई करते हैं, पानी देते हैं और खाद भी डालते हैं. लेकिन कई बार शुरुआत में लगने वाले रोग सारी मेहनत खराब कर देते हैं. ऐसा ही एक खतरनाक रोग है जड़ का माहों रोग. यह रोग गेहूं की बुवाई के लगभग 20-25 दिन बाद दिखाई देने लगता है.

जड़ का माहों रोग एक कीट से होने वाला रोग है. इसमें बहुत छोटे-छोटे कीट पौधों की जड़ों से चिपक जाते हैं. ये कीट पौधों का रस चूसते हैं. जब रस निकल जाता है, तो पौधा कमजोर हो जाता है. शुरुआत में किसान इसे मामूली समस्या समझ लेते हैं, लेकिन बाद में यही रोग पूरी फसल को नुकसान पहुंचा देता है.

इस रोग की पहचान कैसे करें

इस रोग की पहचान करना आसान है. खेत में कुछ जगहों पर गोल-गोल घेरों में पौधे पीले या सफेद दिखने लगते हैं. धीरे-धीरे ये पौधे सूख जाते हैं. जब किसान पौधा उखाड़कर देखते हैं, तो उसकी जड़ें कमजोर होती हैं. जड़ों में हरी जूं जैसे छोटे कीट दिखाई देते हैं. यही माहों कीट होते हैं.

गेहूं को क्या नुकसान होता है

जब माहों कीट जड़ों से रस चूसते हैं, तो पौधे की बढ़त रुक जाती है. जड़ कमजोर हो जाती है और पौधा जमीन से उखड़ने लगता है. अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह कीट तेजी से फैलता है. इससे खेत का बड़ा हिस्सा खराब हो सकता है. इसका सीधा असर उत्पादन और किसान की कमाई पर पड़ता है.

गेहूं में कब लगता है माहों रोग

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गेहूं में कई रोग आते हैं. कुछ रोग शुरुआत में आते हैं और कुछ बाद में. जड़ का माहों रोग आमतौर पर बुवाई के 20 से 30 दिन बाद लगता है. इसी समय कभी-कभी दीमक भी लग जाती है. इसलिए किसान को पहचान करने में थोड़ी परेशानी होती है.

जड़ का माहों रोग और दीमक में फर्क

दोनों में फर्क करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन अच्छी बात यह है कि दोनों के इलाज की दवा एक ही है. इससे किसान को अलग-अलग दवा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और खर्च भी कम होता है.

माहों रोग का इलाज कैसे करें

अगर खेत में ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो किसान को देर नहीं करनी चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, इस रोग के लिए क्लोरोपायरीफॉस दवा का प्रयोग करना चाहिए.

  • मात्रा: 1 लीटर दवा प्रति एकड़
  • तरीका: सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर खेत में दें

इससे दवा सीधे जड़ों तक पहुंचती है और कीट मर जाते हैं.

जड़ का माहों रोग गेहूं की फसल के लिए बहुत नुकसानदायक है. लेकिन अगर किसान समय पर पहचान कर सही दवा का इस्तेमाल करें, तो फसल को बचाया जा सकता है. थोड़ी सी सावधानी से किसान अपनी मेहनत और फसल दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं.

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