
तमिलनाडु के होसुर में पिछले दिनों पेड़ों पर आधारित खेती के जरिये सस्टेनेबल इनकम के तरीकों को समझने के लिए 10,000 से ज्यादा किसान एक मंच पर जुटे थे. ईशा आउटरीच के कावेरी कॉलिंग अभियान की इस पहल का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ कावेरी नदी के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम उठाना है. अब तक यह अभियान 12.8 करोड़ से अधिक पेड़ लगा चुका है. इस बड़े आयोजन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु और कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं. इस दौरान तमिलनाडु और पड़ोसी राज्यों से आए किसानों को संबोधित करते हुए सद्गुरु ने खेती से जुड़े नीतिगत नियंत्रणों में सुधार की जरूरत पर जोर दिया.
सद्गुरु ने कहा कि खेती को अनावश्यक सरकारी कंट्रोल से आजाद किया जाना चाहिए. उन्होंने खेती की जमीन पर उगाए जाने वाले पेड़ों और जंगलों में उगने वाले उत्पादों के बीच साफ अंतर तय करने की बात कही. उनका कहना था कि किसान अपनी जमीन पर जो भी उगाता है. उस पर पहला और पूरा हक़ किसान का होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री से अपील की कि किसानों को अपनी जमीन पर उगाए गए पेड़ों को काटने या बेचने के लिए किसी तरह की अनुमति की मजबूरी खत्म की जाए और इसे एक साफ सरकारी नीति का रूप दिया जाए.
सद्गुरु ने ब्रिटिश काल के उस कानून में बदलाव की भी जरूरत बताई जिसके तहत जमीन के अंदर मिलने वाली चीजों को सरकार की संपत्ति माना जाता है. सद्गुरु ने कहा कि किसानों को नियमों के जाल से मुक्त किया जाना चाहिए और बाजार के नियमों को काम करने दिया जाना चाहिए. किसान वही फसल या पेड़ उगाएं जो उनके लिए सबसे ज्यादा लाभदायक हों और उन्हें यह आजादी मिले कि वो अपने उत्पाद दुनिया में कहीं भी बेच सकें.
सद्गुरु ने कहा, 'खेती को सरकारी कंट्रोल से आजाद किया जाना चाहिए. किसान अपनी जमीन पर जो कुछ भी उगाता है, वह किसान का होना चाहिए.'
उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री से उन रुकावटों को हटाने की अपील की जो किसानों को अपनी जमीन पर उगाए गए पेड़ बेचने से रोकती हैं. सद्गुरु कहना था कि किसान को अपनी जमीन पर उगाए गए पेड़ों को काटने या बेचने के लिए किसी से इजाज़त नहीं लेनी चाहिए. उनकी मानें तो यह एक सरकारी पॉलिसी बन जानी चाहिए. सद्गुरु ने जोर देकर कहा,'ब्रिटिश जमाने का कानून जो कहता है कि आठ फीट नीचे जमीन में मिलने वाली कोई भी चीज सरकार की है और उसमें बदलाव होना चाहिए.' उन्होंने कहा, 'किसानों को सभी नियमों से आजाद होना चाहिए. बाजार के नियम सबसे अच्छे नियम हैं. किसान को वही उगाने दें जो उनके लिए सबसे अच्छा हो और जो उनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद हो.
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