बजट 2026-27 (AI Generated Image)बजट 2026-27 को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हैं. इस बीच, उद्योग संगठन- कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने सरकार से कृषि नीतियों में बड़े बदलाव करने की मांग की है. संगठन ने कहा है कि किसानों को सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर आधारित सरकारी खरीद पर निर्भर रखने की बजाय बाजार से जुड़ी कीमतों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. इससे किसान अपनी खेती में बदलाव कर सकेंगे और ऐसी फसलें उगाने की ओर बढ़ेंगे, जिनसे आमदनी ज्यादा और खेती लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे.
CII ने कहा कि MSP व्यवस्था ने किसानों को कई सालों तक सुरक्षा जरूर दी है, लेकिन इसकी वजह से खेती कुछ गिनी-चुनी फसलों तक सीमित होती जा रही है. अगर किसानों को बाजार के हिसाब से सही दाम मिलने लगें तो वे दूसरी फसलों को अपनाने के लिए भी प्रेरित होंगे. इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और खेती पर बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकेगा.
CII ने सरकार से पुराने कृषि भूमि सीमा कानूनों पर भी दोबारा विचार करने को कहा है. संगठन का कहना है कि ये कानून पहले जमीन का दोबारा बंटवारा करने के लिए बनाए गए थे, लेकिन आज के समय में ये किसानों की तरक्की में रुकावट बन गए हैं. मौजूदा नियमों के तहत कई किसान तय सीमा से ज्यादा जमीन नहीं खरीद सकते और न ही लीज पर ले सकते हैं.
CII ने कहा है कि जो किसान खेती में अच्छा काम कर रहे हैं, वे जमीन बढ़ाकर अपनी आमदनी नहीं बढ़ा पा रहे हैं. ऐसे में इन कानूनों को हटाने या बदलने की जरूरत है, ताकि किसान आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकें.
उद्योग संगठन ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में कई नीतियां किसानों की सुरक्षा के इरादे से लाई जाती हैं, लेकिन इनके कारण बाजार में गड़बड़ी पैदा हो जाती है. स्टॉक लिमिट, कीमतों पर नियंत्रण और अचानक निर्यात पर रोक जैसे फैसलों से फसलों के भाव अस्थिर हो जाते हैं.
CII ने कहा कि जब भाव बार-बार बदलते हैं तो किसान न तो सही योजना बना पाते हैं और न ही नई फसल या तकनीक अपनाने का जोखिम उठाते हैं. संगठन ने सुझाव दिया है कि इन नीतियों में सुधार किया जाए या इन्हें धीरे-धीरे खत्म किया जाए, ताकि खेती का बाजार ज्यादा साफ और भरोसेमंद बन सके.
CII ने कहा है कि निर्यात नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जो बार-बार बदलने वाली न हों और सिर्फ घरेलू महंगाई से न जुड़ी हों. इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय बाजार में साख मजबूत होगी और किसानों को भी बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी. इसके साथ ही संगठन ने खेती में निजी निवेश को जरूरी बताया है.
जलवायु के असर को सहने वाली फसलें, आधुनिक खेती तकनीक, बेहतर बीज और कटाई के बाद भंडारण जैसी सुविधाओं के लिए निवेश जरूरी है. CII ने कहा कि इसके लिए कृषि क्षेत्र में रिसर्च और नई तकनीक की सुरक्षा भी जरूरी है, ताकि कंपनियां आगे आकर निवेश करें.
CII ने सरकार को सुझाव दिया है कि किसानों के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जिसमें उन्हें पहले से यह जानकारी मिल सके कि आगे चलकर किस फसल के दाम कैसे रह सकते हैं. इससे किसान ज्यादा पैदावार या कमी जैसी समस्याओं से बच सकेंगे.
इसके अलावा, संगठन ने “वन इंडिया फूड ग्रिड” बनाने की भी सिफारिश की है. इसका मकसद यह है कि एक राज्य में ज्यादा उपज होने पर उसे आसानी से दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जा सके और पूरे देश में खाद्य आपूर्ति (Food Supply) बेहतर हो.
आम तौर पर केंद्र सरकार का आम बजट हर साल 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है. यही वजह है कि बजट से पहले जनवरी महीने में विभिन्न उद्योग संगठनों, विशेषज्ञों और सेक्टर से जुड़े हितधारकों की सिफारिशें सामने आने लगती हैं. बजट 2026-27 को लेकर भी इसी ट्रेंड के तहत CII जैसे संगठन सरकार के सामने अपनी मांगें और सुझाव रख रहे हैं, ताकि इन्हें अंतिम बजट प्रस्तावों में शामिल किया जा सके. हालांकि, सरकार संगठन के इन सुझावों पर कितना विचार करेगी, इसकी तस्वीर तो बजट पेश होने पर ही साफ होगी.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions- FAQs)
1. CII MSP को लेकर क्या बदलाव चाहता है?
CII चाहता है कि MSP के साथ-साथ किसानों को बाजार से जुड़े दाम मिलने के ज्यादा मौके मिलें.
2. क्या CII MSP खत्म करने की बात कर रहा है?
नहीं, CII MSP खत्म करने की नहीं बल्कि उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता कम करने की बात कर रहा है.
3. भूमि सीमा कानून क्या हैं और इन्हें हटाने की मांग क्यों है?
ये कानून जमीन खरीदने और लीज पर लेने की सीमा तय करते हैं, जिन्हें CII किसानों की आय बढ़ाने में बाधा मानता है.
4. बाजार आधारित कीमतों से किसानों को क्या फायदा होगा?
इससे किसान मांग वाली फसलें उगा सकेंगे और एक ही फसल पर निर्भरता कम होगी.
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