मूली और इमरती के लिए मशहूर जौनपुर पहुंचा किसान कारवां, लकी ड्रॉ में महिलाओं ने मारी बाजी

मूली और इमरती के लिए मशहूर जौनपुर पहुंचा किसान कारवां, लकी ड्रॉ में महिलाओं ने मारी बाजी

किसान तक का किसान कारवां जौनपुर के पिलखनी गांव पहुंचा, जहां किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन योजनाओं, नैनो डीएपी और स्वीट कॉर्न जैसी नई फसलों की जानकारी दी गई. कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने मिट्टी के स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं और फार्मर रजिस्ट्री के महत्व पर भी किसानों को जागरूक किया.

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मूली और इमरती के लिए मशहूर जौनपुर पहुंचा किसान कारवां, लकी ड्रॉ में महिलाओं ने मारी बाजीजौनपुर में किसान कारवां का पड़ाव

किसान तक का किसान कारवां जौनपुर के पिलखनी गांव पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत जौनपुर इसका 36वां पड़ाव रहा. कृषि की दृष्टि से समृद्ध इस जनपद में बड़ी संख्या में किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और खेती से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त की. जौनपुर अपनी कृषि पहचान के लिए भी जाना जाता है. यहां की मूली देश-विदेश में प्रसिद्ध है, वहीं जौनपुर की इमरती भी लोगों के बीच खास पहचान रखती है. ऐसे कृषि प्रधान जिले में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ.

पशुपालकों को योजनाओं की जानकारी

किसान कारवां के पहले चरण में पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र कुमार ने पशुपालकों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दो देसी नस्ल की गाय पालने पर सरकार 80 हजार रुपये तक का अनुदान दे रही है. इसके लिए किसान को पहले गाय खरीदकर उसका बिल पोर्टल पर अपलोड करना होता है. सत्यापन के बाद अनुदान राशि सीधे किसान के खाते में भेज दी जाती है. उन्होंने नंदिनी योजना और मिनी नंदिनी योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के फायदे बताए

दूसरे चरण में इफको के जनपद प्रभारी संजय यादव ने किसानों को नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि ज्यादातर किसानों को डीएपी के सही उपयोग की जानकारी नहीं होती. उन्होंने बताया कि यदि डीएपी का उपयोग बुवाई के समय किया जाए तो पौधों को अधिक लाभ मिलता है, जबकि बाद में छिड़काव करने पर केवल 15 प्रतिशत पोषक तत्व ही पौधे को मिल पाते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि लिक्विड डीएपी की एक बोतल एक बोरी के बराबर असर देती है, जबकि इसकी कीमत आधी होती है, जिससे किसानों की लागत कम होती है.

स्वीट कॉर्न की खेती से बढ़ सकती है आमदनी

तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र जौनपुर द्वितीय के डॉ. राकेश सिंह ने किसानों को नई फसलों के विकल्प के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि जौनपुर में मक्का की खेती तो होती है, लेकिन यदि किसान स्वीट कॉर्न की खेती करें तो उन्हें ज्यादा लाभ मिल सकता है. उन्होंने बताया कि बाजार में स्वीट कॉर्न की मांग तेजी से बढ़ रही है और यह फसल किसानों के लिए अच्छा मुनाफा दे सकती है.

मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारना जरूरी

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र जौनपुर प्रथम के डॉ. सुरेश कुमार कनौजिया ने कहा कि कई बार तकनीकी जानकारी के अभाव में किसानों को अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता. उन्होंने बताया कि आज खेती में चार बड़ी चुनौतियां हैं-

  • मिट्टी का खराब स्वास्थ्य
  • पर्यावरण प्रदूषण
  • अस्वस्थ बीज
  • खेती में संस्कार की कमी

यदि इन चारों समस्याओं को ठीक कर लिया जाए तो भारत फिर से कृषि के क्षेत्र में मजबूत बन सकता है.

किसान सम्मान निधि से मिल रहा सहारा

पांचवें चरण में उपनिदेशक कृषि विपिन बिहारी द्विवेदी ने किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये मिलते हैं, जिससे वे खाद और बीज का इंतजाम कर पाते हैं. उन्होंने किसानों को फार्मर आईडी बनवाने के लिए भी प्रेरित किया.

फार्मर रजिस्ट्री बनेगी किसानों की पहचान

छठे चरण में प्रोजेक्ट डायरेक्टर आत्मा डॉ. रमेश चंद यादव ने फार्मर रजिस्ट्री के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में फार्मर रजिस्ट्री किसानों की पहचान पत्र के रूप में काम करेगी, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.

जल संरक्षण का दिया संदेश

सातवें चरण में जादूगर सलमान ने मनोरंजन के साथ-साथ जल संरक्षण का संदेश दिया. उन्होंने बताया कि गांवों में लगे कई नल खराब हैं और पानी का दुरुपयोग हो रहा है. यदि पानी का सही उपयोग किया जाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे बचाया जा सकता है.

लकी ड्रॉ में महिलाओं का दबदबा

कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए.

  • प्रथम पुरस्कार तारा को मिला
  • द्वितीय पुरस्कार शाहजहां ने जीता

इस लकी ड्रॉ में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही और कई पुरस्कार महिलाओं ने ही जीते.

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