गेहूं-धान की खेती में ITC बना नंबर-1, गेहूं-धान के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

गेहूं-धान की खेती में ITC बना नंबर-1, गेहूं-धान के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

ITC को गेहूं और धान के लिए FSA 3.0 सर्टिफिकेट मिला है, जो सस्टेनेबल खेती का वैश्विक मानक है. इससे किसानों को बेहतर तकनीक, ज्यादा उत्पादन और अच्छा दाम मिलेगा. उत्तर प्रदेश और बिहार के हजारों किसान इससे जुड़े हैं. यह पहल पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करेगी.

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गेहूं-धान की खेती में ITC बना नंबर-1, गेहूं-धान के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरीगेहूं-धान की खेती में ITC बना नंबर-1 (AI Generated Image)

भारत की बड़ी कंपनी ITC Ltd ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. ITC भारत की पहली कंपनी बन गई है जिसे गेहूं और धान के लिए FSA 3.0 सर्टिफिकेट मिला है. यह सर्टिफिकेट पूरी दुनिया में माना जाता है और बताता है कि खेती सही और सुरक्षित तरीके से की जा रही है. इससे कंपनी की विश्व बाजार में पहचान और मजबूत हो जाती है.

FSA 3.0 क्या है?

FSA का मतलब है Sustainable Agriculture Initiative द्वारा बनाया गया एक नियमों का सेट, जो यह देखता है कि खेती पर्यावरण और किसानों के लिए सही है या नहीं. FSA 3.0 इसका नया संस्करण है, जिसे साल 2021 में शुरू किया गया था. यह सर्टिफिकेट बताता है कि खेती में पानी, मिट्टी और मजदूरों का सही ध्यान रखा जा रहा है.

किसानों को क्या फायदा होगा

इस सर्टिफिकेट से किसानों को बहुत फायदा मिलेगा. उन्हें अच्छी खेती के तरीके सिखाए जाएंगे, जिससे उनकी फसल ज्यादा होगी. साथ ही उन्हें अपनी फसल का अच्छा दाम भी मिलेगा. ITC किसानों को बड़े बाजारों से जोड़ रही है, जिससे उनकी कमाई बढ़ेगी और उनका जीवन बेहतर होगा.

पर्यावरण को भी मिलेगा लाभ

नई खेती के तरीकों से पर्यावरण को भी फायदा होता है. इससे पानी की बचत होती है और मिट्टी की सेहत अच्छी रहती है. साथ ही कम रसायनों के इस्तेमाल से हवा और जमीन साफ रहती है. यह तरीके खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाते हैं.

उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़ा काम

ITC ने उत्तर प्रदेश और बिहार में 22,000 एकड़ से ज्यादा जमीन पर यह योजना लागू की है. इसमें 3,500 से ज्यादा किसान जुड़े हैं और 70 से ज्यादा किसान समूह (FPO) इसमें भाग ले रहे हैं. यह काम ITC के Crop Development Programme के तहत किया गया है.

किसानों को दी जा रही ट्रेनिंग

किसानों को नई तकनीक सिखाई जा रही है, जैसे बिना जुताई की खेती, ड्रोन से दवा छिड़काव, कम पानी में धान की खेती और माइक्रो सिंचाई. उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि मिट्टी की जांच के अनुसार खाद का इस्तेमाल कैसे करें. इससे खेती आसान और सस्ती बनती है.

डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल

ITC ने खेती में डिजिटल तकनीक का भी उपयोग किया है. ITCMAARS नाम का एक सिस्टम बनाया गया है, जिससे खेतों की पूरी जानकारी रखी जाती है. इससे यह पता चलता है कि फसल कहां से आई है और कैसे उगाई गई है. यह सिस्टम किसानों को मोबाइल पर सलाह भी देता है.

भविष्य के लिए बड़ा कदम

ITC का यह कदम किसानों को मजबूत बनाने और खेती को बेहतर बनाने की दिशा में बहुत बड़ा है. इससे किसान नई तकनीक सीखेंगे, ज्यादा कमाएंगे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा. यह दिखाता है कि अच्छी खेती और व्यापार दोनों साथ-साथ चल सकते हैं.

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