चीनी उत्पादन बढ़ने के साथ उठी ये मांग (प्रतीकात्मक तस्वीर)देश में चालू चीनी सीजन 2025-26 के दौरान उत्पादन में करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन इसके साथ ही इथेनॉल सेक्टर और मिलों की वित्तीय स्थिति को लेकर इंडस्ट्री की चिंता भी सामने आई है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार से इथेनॉल नीति में तेजी और न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन की मांग की है. ISMA ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेज करना जरूरी हो गया है.
देश में करीब 2000 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन क्षमता मौजूद है, जिसमें अनाज आधारित इथेनॉल भी शामिल है. ऐसे में इंडस्ट्री ने E20 से आगे बढ़कर E22, E25, E27 और E85 या E100 जैसे उच्च मिश्रण स्तरों पर विचार करने की जरूरत बताई है. साथ ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को तेजी से लागू करने और जीएसटी ढांचे को सरल बनाने की मांग की गई है.
ISMA का कहना है कि इथेनॉल खरीद कीमतों में संशोधन न होने और कम आवंटन के कारण डिस्टिलेशन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है और स्टॉक बढ़ रहा है. ISMA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 अप्रैल तक देश का कुल चीनी उत्पादन 8 फीसदी बढ़कर 274.8 लाख टन पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 254.96 लाख टन था. हालांकि उत्पादन बढ़ा है, लेकिन सक्रिय मिलों की संख्या घटकर 19 रह गई है, जबकि पिछले साल इसी समय 38 मिलें चल रही थीं.
राज्यों के स्तर पर उत्तर प्रदेश में उत्पादन 89.26 लाख टन रहा, जो पिछले साल के 91.10 लाख टन से थोड़ा कम है. राज्य में फिलहाल केवल 6 मिलें संचालित हैं, जबकि पिछले साल इस समय 22 मिलें चालू थीं.
दूसरी ओर, महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. महाराष्ट्र में 99.3 लाख टन और कर्नाटक में 48.10 लाख टन उत्पादन हुआ है. इन दोनों राज्यों में मुख्य सीजन के लिए सभी मिलें बंद हो चुकी हैं. हालांकि, कर्नाटक में जून-जुलाई 2026 से विशेष सीजन में कुछ मिलों के दोबारा शुरू होने की संभावना है, जबकि तमिलनाडु में भी कुछ मिलों में पेराई जारी रहेगी.
इंडस्ट्री ने चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में जल्द संशोधन की मांग की है. ISMA का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और एक्स-मिल कीमतों के कमजोर रहने से मिलों की नकदी स्थिति पर दबाव पड़ रहा है, जिससे गन्ना किसानों के बकाया भुगतान बढ़ रहे हैं. इसके अलावा एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान का असर फूड आउटलेट्स पर पड़ा है, जिससे चीनी की खपत भी प्रभावित हुई है.
ISMA ने कहा कि समय पर नीतिगत फैसले लिए जाने से उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा, मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा और चीनी बाजार में स्थिरता बनी रहेगी. साथ ही यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा. (एएनआई)
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