भारतीय चावल की बढ़ी मांगभारतीय चावल निर्यातकों के लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMO) की मौजूदगी का हवाला देकर पहले कई बार भारतीय टूटे चावल की खेपों को ठुकराने वाला चीन अब फिर से भारत से टूटे चावल खरीदने लगा है. इससे भारतीय चावल निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. हालांकि, दूसरी तरफ ईरान युद्ध के कारण जहाजों में इस्तेमाल होने वाले बंकर ईंधन की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई है. इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ा है और कंटेनर से सामान भेजने की लागत काफी बढ़ गई है.
चावल निर्यात संघ ऑफ इंडिया (TREA) के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव ने कहा है कि चीन के अलावा पश्चिम अफ्रीका के देशों को भी भारत से टूटे चावल का निर्यात लगातार जारी है. फिलहाल भारत 300 से 310 डॉलर प्रति टन की दर से टूटे चावल बेच रहा है, लेकिन ईंधन महंगा होने की वजह से निर्यात खर्च बढ़ गया है.
चेन्नई की राजथी ग्रुप ऑफ कंपनीज के निदेशक एम. मदन प्रकाश ने कहा कि चीन फिर से भारत से टूटे चावल खरीद रहा है. हालांकि, इसे भेजने का खर्च काफी बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि 20 फुट कंटेनर से चावल भेजने का शुल्क 75 से 80 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है. फिलहाल अलग से कोई युद्ध वाला अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया है. बता दें कि राजथी ग्रुप ऑफ कंपनीज कृषि उत्पादों के निर्यात का काम करती है.
TREA के अध्यक्ष बी.वी.कृष्णा राव ने कहा कि ईरान युद्ध का भारत से गैर-बासमती चावल के निर्यात पर कोई खास असर नहीं पड़ा है. हालांकि, बासमती चावल की खेपों में दिक्कतें आ रही हैं, खासकर पश्चिम एशिया भेजे जाने वाले माल पर असर देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि चीन ने 2022 के बाद फिर से भारत से टूटे चावल खरीदना शुरू किया है. इससे पहले 2021-22 में चीन ने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में टूटे चावल का आयात किया था, लेकिन बाद में मौसम खराब होने से फसल को नुकसान पहुंचने और आपूर्ति कम होने की आशंका के कारण भारत सरकार ने 2022 में टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी.
यह फैसला हैरान करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि दो महीने पहले ही चीन ने भारतीय चावल की खेपों में आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMO) की कथित मौजूदगी का मुद्दा उठाया था. उस समय चीन ने भारत से भेजी गई कई खेपों को मंजूरी देने के बाद भी कुछ खेपों को अस्वीकार कर दिया था. उन्होंने कहा कि इस समय भारतीय चावल की कीमतें वैश्विक बाजार में काफी प्रतिस्पर्धी हैं. इसकी वजह यह है कि थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान में आपूर्ति कम होने से वहां चावल के दाम बढ़ गए हैं.
फिलहाल भारत का 5 प्रतिशत टूटा सफेद चावल 335 से 339 डॉलर प्रति टन की दर से बिक रहा है, जो सबसे सस्ता और है. वहीं, थाईलैंड में इसकी कीमत 423 डॉलर प्रति टन, वियतनाम में 344 से 348 डॉलर और पाकिस्तान में 345 से 349 डॉलर प्रति टन है.
नई दिल्ली के व्यापार विश्लेषक एस. चंद्रशेखरन ने कहा कि थाईलैंड और वियतनाम में धान की कटाई इस महीने के आखिर तक शुरू होने वाली है. उनके मुताबिक, चावल की कीमतें इस महीने के अंत या अप्रैल की शुरुआत से कम हो सकती हैं. हालांकि, अगर सुपर अल नीनो का असर बढ़ता है तो कीमतों में बड़ी गिरावट रुक सकती है. अल नीनो की वजह से एशिया के कई देशों, जैसे भारत, थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम में सूखा और लंबे समय तक कम बारिश की स्थिति बन सकती है.
चावल निर्यात संघ (TREA) के अध्यक्ष राव ने कहा कि दुनिया में चावल की मांग सामान्य बनी हुई है. भारत में रबी धान की फसल अच्छी है और अच्छी पैदावार की उम्मीद है. रबी धान की अच्छी फसल का एक बड़ा कारण यह है कि दक्षिण भारत मार्च में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित नहीं हुआ, जबकि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में इससे गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है. पहले गेहूं उत्पादन 120 लाख टन रहने का अनुमान था, लेकिन अब इसमें 5 से 10 प्रतिशत कमी की आशंका जताई जा रही है.
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