चीनी से ज्‍यादा फायदेमंद है यह मीठी प‍त्तियों वाला पौधा, 1-2 बूंद रस में छिपी है 200-300 गुना मिठास

चीनी से ज्‍यादा फायदेमंद है यह मीठी प‍त्तियों वाला पौधा, 1-2 बूंद रस में छिपी है 200-300 गुना मिठास

दुनियाभर में बढ़ते डायबिटीज मरीजों के बीच चीनी का विकल्प बनकर उभर रहा स्टीविया अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कम कैलोरी और ज्यादा मिठास के कारण इसे हेल्दी स्वीटनर माना जा रहा है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सावधानी भी जरूरी बताई गई है. पढ़ें पूरी खबर...

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चीनी से ज्‍यादा फायदेमंद है यह मीठी प‍त्तियों वाला पौधा, 1-2 बूंद रस में छिपी है 200-300 गुना मिठासचीनी का विकल्‍प बना स्टीविया (सांकेतिक तस्‍वीर)

दुनियाभर में हर साल डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में लोग अब चीनी के विकल्‍प के रूप में अन्‍य उपाय तलाशने लगे हैं, जो चीनी जितना नुकसान नहीं पहुंचाते. अब एक ऐसा ही नेचुरल स्वीटनर उभरकर सामने आया है. इस पौधे का नाम है स्टीविया, जिसे मीठी तुलसी या मधु पत्ती के रूप में भी जाना जाता है. यह सामान्य चीनी से 200-300 गुना ज्यादा मीठी होती है. इसकी पत्ती में स्टेवियोसाइडनाम का तत्व पाया जाता है. स्टीविया का वैज्ञानिक नाम स्टीविया रेबाउडियाना हैं.

दक्षिण अमेरिका का पौधा है स्‍टीव‍िया

यह सूरजमुखी परिवार से संबंधित एक बारहमासी पौधा है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद है. यह दक्षिण अमेरिका का एक पौधा है, जो अब भारत में भी लोकप्रिय हो रहा है. मधुमेह और मोटापे में से पीड़‍ित लोग स्‍टीव‍िया के पाउडर और ड्रॉप (लिक्विड) इस्‍तेमाल में ले रहे हैं, जो बाजार में आसानी से उपलब्‍ध है.

यह है मि‍ठास की वजह

स्टीविया चीनी से काफी बेहतर है, क्योंकि इसमें कैलोरी लगभग न के बराबर होती है. यह चीनी का एक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है. स्टीविया के पत्तों में स्टीवियोल ग्लाइकोसाइड्स (Steviol Glycosides) नामक यौगिक होते हैं, जो इसकी मिठास का कारण हैं. डॉक्टर के अनुसार, 1 चम्मच चीनी में काफी कैलोरी मौजूद होती है, वहीं, स्टीविया में कैलोरी बेहद कम होती है और इसकी एक चुटकी या 1-2 बूंद ही काफी होती है. स्टीविया का इस्‍तेमाल चाय, कॉफी, जूस और मिठाइयों में चीनी के विकल्‍प के तौर पर किया जा सकता है.

डायबिटीक और वजन घटाने वालों के लिए फायदेमंद

1 चम्मच चीनी यानी 4 ग्राम में लगभग 16 से 20 कैलोरी होती है. वहीं, स्‍टीविया में कैलोरी नहीं होती. साथ ही स्टीविया दांतों को भी नुकसान नहीं पहुंचाती, जिससे केविटी खतरा टल जाता है. स्टीविया के ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) शून्य है, इसलिए यह इंसुलिन स्पाइक नहीं करता.

स्‍टीव‍िया के कुछ नुकसान भी हैं

एक ओर जहां स्‍टीव‍िया के इतने फायदे हैं. वहीं, कुछ मामलों में इसके नुकसान भी देखने को मिल सकते हैं. अधिक मात्रा में स्‍टीविया का सेवन करने पर पेट से जुड़ी समस्याएं, एलर्जी की शिकायत हो सकती है. अधिक मात्रा में सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं (गैस, ब्लोटिंग, दस्त), चक्कर आना, मतली और मांसपेशियों में सुन्न होने की शिकायत देखने को मिल सकती है.

इसके अलावा यह किडनी या ब्लड प्रेशर की दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकता है. ऐसे में डॉक्‍टर की सलाह पर ही इसका इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा कच्ची स्टीविया की पत्तियों (Raw Stevia Herb) का इस्‍तेमाल करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ये किडनी, प्रजनन और कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए सिर्फ शुद्ध (highly purified) स्टीविया एक्सट्रैक्ट का ही इस्‍तेमाल करें. (अनन्‍या सिंह)

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