किसान अब करेंगे मुनाफे की खेतीभारत के बारे में हमेशा से कहा जाता है कि यहा की आत्मा गांवों में बसती है और उस आत्मा का आधार खेती है. आज भी देश की लगभग आधी आबादी अपनी रोजी-रोटी के लिए खेतों पर निर्भर है, लेकिन समय के साथ खेती का तरीका और नजरिया बदलना अब वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है. कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने एक सरकरी चैनल पर कहा है कि अब हमें पारंपरिक खेती की लकीर को छोड़कर आधुनिकता की राह पकड़नी होगी. अब खेती केवल अपना पेट भरने या अनाज उगाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे एक शक्तिशाली 'बिजनेस मॉडल' के रूप में विकसित करना होगा. जब एक किसान अपनी जमीन को केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक 'फैक्ट्री' या 'एंटरप्राइज' की तरह देखेगा, तभी उसकी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आएगा. सरकार का लक्ष्य भी यही है कि किसान केवल 'अन्नदाता' बनकर न रह जाए, बल्कि वह एक सफल 'व्यवसायी' बने जो देश की जीडीपी में सबसे बड़ा योगदान दे सके. खेती को घाटे का सौदा मानने वाली पुरानी सोच को अब तकनीक, ज्ञान और साहस से बदलने का समय आ चुका है ताकि यह क्षेत्र देश की तरक्की का सबसे बड़ा इंजन बन सके.
आज के दौर में अगर कोई किसान केवल पुराने हल और बैल के भरोसे रहना चाहता है, तो वह पिछड़ जाएगा. कृषि विकास का सबसे मजबूत खंभा अब 'आधुनिक तकनीक' है. देवेश चतुर्वेदी जी ने जोर देकर कहा है कि तकनीक अपनाने से न केवल फसल की लागत कम होती है, बल्कि पैदावार में भी भारी बढ़ोतरी होती है. मिट्टी की सेहत की जांच यानी स्वायल टेस्टिग कराना उतना ही जरूरी है जितना बीमार होने पर डॉक्टर से जांच कराना. जब किसान को पता होगा कि उसकी मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है, तो वह बेवजह महंगे खादों पर पैसा बर्बाद नहीं करेगा. आज 'ड्रोन' के जरिए कीटनाशकों का छिड़काव करना एक जादुई बदलाव जैसा है, जो समय और मेहनत दोनो बचाता है. इसके अलावा, 'सेंसर आधारित सिंचाई' और 'ड्रिप इरिगेशन' (टपक सिंचाई) जैसी तकनीकें पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करती है. डेटा और सटीक खेती के माध्यम से किसान अब मौसम के मिजाज को पहले ही भांप सकते हैं और अपनी फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं. यह तकनीक ही है जो खेती के जोखिम को कम कर मुनाफे की गारंटी देती है.
कृषि सचिव ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि हमारे किसान भाई सालों-साल केवल गेहूं और धान की फसल के चक्र में फंसे रहते हैं. इससे न केवल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम होती है, बल्कि बाजार में जब आवक ज्यादा होती है, तो सही दाम भी नहीं मिल पाते. इसीलिए 'क्रॉप डायवर्सिफिकेशन' यानी फसलों के विविधीकरण को अपनाना अनिवार्य है. हमें पारंपरिक अनाज से आगे बढ़कर बागवानी औषधीय पौधों की खेती और नकदी फसलों जैसे फल और सब्जियों की ओर कदम बढ़ाना होगा. आज के समय में दुनिया स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रही है, जिससे 'जैविक खेती' की मांग आसमान छू रही है. रसायन मुक्त अनाज और सब्जियां न केवल पर्यावरण को बचाती हैं, बल्कि बाजार में इनकी कीमत भी आम फसलों से कई गुना ज्यादा मिलती है. अगर किसान बाजार की मांग को समझकर अपनी फसलें उगाएगा, तो उसे अपनी मेहनत का दोगुना फल मिलना निश्चित है. विविधता ही वह कुंजी है जो किसान को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाकर उसे आत्मनिर्भर बना सकती है.
कृषि सचिव ने बताया कि कृषि के क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि किसान अपनी फसल को कच्चा माल समझकर सस्ते में बेच देता है. देवेश चतुर्वेदी जी का सुझाव है कि अब किसानों को 'वैल्यू एडिशन' यानी मूल्य संवर्धन पर ध्यान देना चाहिए. सीधे खेत से टमाटर बेचने के बजाय अगर उसका सॉस, पेस्ट या पाउडर बनाकर बेचा जाए, तो मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है. इसे ही हम प्रोसेसिंग कहते हैं. इसके साथ ही, बिचौलियों के जाल को काटने के लिए ई-नाम (e-NAM ) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना चाहिए. अब किसान अपने मोबाइल के जरिए सीधे बड़े खरीदारों और मंडियों से जुड़ सकता है. एफपीओ यानि किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से छोटे किसान एकजुट होकर अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ा सकते हैं. जब किसान खुद समूह बनाकर अपनी उपज की ग्रेडिंग और पैकिंग करेंगे, तो उन्हें अपनी फसल का सही हक मिलेगा. यह बदलाव किसान को सीधे उपभोक्ता से जोड़ेगा, जिससे बीच का मोटा मुनाफा सीधे किसान की जेब में जाएगा और उसकी गरीबी दूर होगी.
देवेश चतुर्वेदी खेती को 'ग्लैमरस' और मुनाफे वाला पेशा बनाने के लिए देश के शिक्षित युवाओं का इस क्षेत्र में आना बहुत जरूरी है. आज के एग्री-टेक स्टार्टअप्स खेती की पुरानी समस्याओं के नए और स्मार्ट समाधान लेकर आ रहे हैं. चाहे वो कोल्ड स्टोरेज की सुविधा हो या सप्लाई चेन मैनेजमेंट, युवाओं के नए विचार खेती को एक नई दिशा दे रहे हैं. सरकार भी 'पीएम किसान निधि', 'फसल बीमा योजना' और 'सिंचाई योजनाओं' के जरिए किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन योजनाओं का लाभ हर छोटे किसान तक पहुंचे. जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए हमें कम पानी में उगने वाली और तापमान सहने वाली नई किस्मों को अपनाना होगा. उन्होंने आधुनिक उपकरणों को अपनाएं, मिट्टी की सेहत का ख्याल रखें और बाजार के हिसाब से चलें, तो भारतीय कृषि न केवल देश की खाद्य सुरक्षा पक्की करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भी भारत का झंडा गाड़ेगी. खेती अब मजबूरी नहीं, बल्कि समृद्धि का सबसे बड़ा जरिया बनेगी.
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