Trade Deal: अमेरिका भारत में क्या बेचेगा और क्या नहीं? कृषि उत्पादों की पूरी लिस्ट से समझें सच्चाई

Trade Deal: अमेरिका भारत में क्या बेचेगा और क्या नहीं? कृषि उत्पादों की पूरी लिस्ट से समझें सच्चाई

भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सियासी बहस तेज है. सरकार का दावा है कि कई अनाज, सब्जियां, डेयरी और मसाले अमेरिका से भारत में आयात नहीं होंगे और कई उत्पादों पर टैरिफ छूट भी नहीं दी गई है. वहीं विपक्ष किसानों को नुकसान की आशंका जता रहा है. जानिए पूरी लिस्ट—अमेरिका भारत में क्या बेचेगा, क्या नहीं और किन उत्पादों पर टैरिफ लागू रहेगा.

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अमेरिका भारत में क्या बेचेगा और क्या नहीं? कृषि उत्पादों की पूरी लिस्ट से समझें सच्चाईअमेरिकी बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की एंट्री (AI जनरेटेड फोटो)

अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर सरकार और विपक्ष में जुबानी जंग जारी है. विपक्ष के नेता राहुल गांधी कह रहे हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को दबाव में लेकर ऐसा सौदा कराया है जो भारत के किसानों के लिए खतरनाक है. उनका आरोप है कि भारत में अब कपास, मक्का, ज्वार, सोयाबीन के किसान बेमौत मारे जाएंगे. जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान गिना चुके हैं कि कई अमेरिकी अनाज के लिए भारत के दरवाजे बंद रखे गए हैं. केंद्र की ओर से कृषि मंत्री, वाणिज्य मंत्री, राष्ट्रीय प्रवक्ता लगातार बता रहे हैं कि अमेरिका के साथ जो डील हुई है उसमें भारत के किसानों-पशुपालकों-मसाला उत्पादकों से लेकर मछुआरों तक का खयाल रखा गया है. हालांकि डील की कई बारीकियां सामने आना बाकी हैं जिसकी वजह से भ्रम ज्यादा फैल रहा है.

खबर है कि डील का फाइनल दस्तावेज तैयार होने में अभी एक महीना और लग सकता है, लेकिन जिस तरह विपक्ष ने संसद में इस डील के विरोध में हंगामा किया और जिस तरह देश के किसानों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है, उसे लेकर भ्रम बढ़ रहा है. संयुक्त किसान मोर्चा जैसे संगठन विरोध शुरू कर चुके हैं. दूसरी ओर सरकार के मंत्री और प्रवक्ता बता रहे हैं कि डील के बाद अमेरिका किन चीजों को भारत में नहीं बेच पाएगा, यानी भारत में आयात नहीं कर पाएगा.

भारत में नहीं बेचेगा अमेरिका 

सरकार के मुताबिक, अमेरिका से जो प्रोडक्ट भारत नहीं आएंगे, उनमें छिले हुए अनाज, आटा, गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, दालें, फ्रोजन सब्जियां, संतरे, अंगूर, नींबू, स्ट्रॉबेरी और मिक्स डिब्बाबंद सब्जियां शामिल हैं. 

इतना ही नहीं, लिक्विड दूध, दूध पाउडर, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर और चीज़ – इनमें से किसी को भी भारत में एंट्री नहीं मिलेगी. 

मसालों में काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवायन, मेथी, तेज पत्ता, सरसों भी अमेरिका नहीं बेचेगा. अगर कुछ कृषि उत्पाद अमेरिका से भारत आएंगे भी तो उन्हें भारत के बाजार में बिना टैरिफ के नहीं आने दिया जाएगा.

अमेरिका को भारत में टैरिफ छूट नहीं 

सरकार ने बताया है कि अमेरिका के कई प्रोडक्ट हैं जिन्हें भारत में बेचने के लिए किसी तरह की टैरिफ छूट नहीं मिलेगी, जैसा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है.  सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, छोले, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू पर अमेरिका को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं होगी. 

सरकार का कहना है कि जिस देश के कृषि उत्पादों का निर्यात बाजार 445 करोड़ डॉलर को पार कर चुका है. वहां अमेरिका से हुई ये डील उसमें और रफ्तार भरेगी . 

राहुल गांधी ने कहा है कि अमेरिका बांग्लादेश का टेक्सटाइल जीरो टैरिफ पर बेचेगा और भारत के मुफ्त टैरिफ वाले उत्पाद भी 18 फीसदी पर बिकेंगे. जबकि सरकार का दावा है कि भारत के किसानों के मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वेजिटेबल वैक्स, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम सब जीरो टैरिफ पर अमेरिका में बिकेंगे. 

दरअसल, अमेरिका से अभी जो डील हो रही है उसमें आधे अधूरे तथ्यों के साथ ट्रंप ने सोशल मीडिया पर डील की बातें कही हैं. इसके बाद पीएम मोदी को भी बयान देना पड़ा. डील के पूरे दस्तावेज आना बाकी है लेकिन इस बीच अमेरिका ने घोषणा कर रखी है कि भारत अमेरिका से जाने वाले कई खाद्य पदार्थों, कृषि उत्पाद पर कम या जीरो टैरिफ करेगा.

इन अमेरिकी प्रोडक्ट की भारत में एंट्री

अमेरिका का दावा है कि भारत में जिन प्रोडक्ट की एंट्री होगी, उनमें सूखे डिस्टिलर अनाज जिनसे शराब बनती है, उसके अलावा पशु चारे के लिए लाल ज्वार, और सूखे मेवे, ताजे फल, प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य उत्पाद शामिल हैं. 

हालांकि अमेरिका ने 7 फरवरी को डील में जिन उत्पादों को लेकर दावे किए थे उनमें से अमेरिकी दालों, डिजिटल सर्विस पर से भारतीय टैरिफ हटाने के प्रावधान को बदल दिया है. यानी भारत इन पर टैरिफ वसूलेगा. इसके अलावा 500 अरब डॉलर के व्यापार की शर्त को भी बाध्यकारी नहीं रखा गया है.

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