खेती में उत्‍पादन केंद्रि‍त ढर्रा छोड़ने की जरूरत, ICAR के DG बोले- वैल्‍यू चेन मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आय

खेती में उत्‍पादन केंद्रि‍त ढर्रा छोड़ने की जरूरत, ICAR के DG बोले- वैल्‍यू चेन मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आय

ICAR के महानिदेशक एवं DARE सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए भारत को उत्पादन केंद्रित खेती से आगे बढ़कर एग्री-फूड वैल्यू चेन आधारित मॉडल अपनाना होगा. इससे कृषि विविधीकरण, वैल्यू एडिशन और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

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खेती में उत्‍पादन केंद्रि‍त ढर्रा छोड़ने की जरूरत, ICAR के DG बोले- वैल्‍यू चेन मॉडल से बढ़ेगी किसानों की आयICAR के DG डॉ. मांगीलाल जाट

भारतीय कृषि को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय अब एग्री-फूड वैल्यू चेन आधारित मॉडल की ओर बढ़ना होगा. इससे किसानों की आय बढ़ाने, कृषि में विविधीकरण लाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी. यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने मंगलवार को कही. नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की ओर से आयोजित 'वूमेन इन एग्री एंड फूड- लीडरशिप फोरम' कार्यक्रम के दौरान डॉ. जाट ने कहा कि देश को उत्पादन केंद्रित कृषि से आगे बढ़कर एग्री-फूड सिस्टम वैल्यू चेन पर ध्यान देना होगा. वैल्यू चेन किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ कृषि विविधीकरण को भी रफ्तार देगी.

महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

डॉ. जाट ने कहा कि एग्री-फूड सिस्टम की वैल्यू चेन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. इससे ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि कृषि अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमिता, वैल्यू एडिशन और एकीकृत वैल्यू चेन की दिशा में आगे बढ़ रही है. किसानों की आय बढ़ाने और देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए यह बदलाव जरूरी है.

महिलाओं को सशक्त बनाने पर फोकस

फोरम को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने कहा कि सरकार 'लखपति दीदी', 'ड्रोन दीदी', 'कृषि सखी' और 'पशु सखी' जैसी पहलों के जरिए कृषि क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दे रही है. उन्होंने बताया कि देश में करीब 90 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े जमीनी महिला नेटवर्क में से एक है.

महिला किसान वर्ष को बताया बड़ा मौका

डॉ. जाट ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिलाओं की भूमिका को पहचान से आगे बढ़ाकर नेतृत्व और समृद्धि में बदलने का महत्वपूर्ण अवसर है. उन्होंने कहा कि इस वैश्विक पहल के जरिए कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को नेतृत्व में बदलने की दिशा में तेजी लाई जा सकती है.

महिला नेतृत्व वाले FPO बढ़ाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि देश में 10 हजार से अधिक किसान उत्पादक संगठन (FPO) कार्यरत हैं, जिनमें करीब 1,700 का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. डॉ. जाट के अनुसार महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन नेतृत्व की भूमिका में उनकी संख्या और बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने इच्छा जताई कि कम से कम आधे FPO महिलाओं के नेतृत्व में संचालित हों.

कृषि शिक्षा और रिसर्च में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

डॉ. जाट ने बताया कि पिछले एक दशक में कृषि शिक्षा और रिसर्च में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है. आज कृषि उच्च शिक्षा में लगभग 50 प्रतिशत नामांकन महिलाओं का है, जबकि करीब दस वर्ष पहले यह 20 प्रतिशत से भी कम था.

कुछ कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं की हिस्सेदारी 65 से 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है. वहीं, कृषि अनुसंधान सेवा में महिला वैज्ञानिकों की भागीदारी वर्ष 2006-07 के 7.9 प्रतिशत से बढ़कर अब 42 प्रतिशत हो गई है.

'साझा प्रयासों से होगा कृषि क्षेत्र में बदलाव'

डॉ. जाट ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को वास्तविक नेतृत्व और आर्थिक सशक्तिकरण में बदलने के लिए मजबूत ढांचे की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार, निजी क्षेत्र, गैर-सरकारी संगठन, फाउंडेशन और अनुसंधान संस्थानों को साझा दृष्टि और सामूहिक प्रयासों के साथ काम करना होगा. साइंस, इनोवेशन और इंक्‍लूजन के बिना भारत के एग्री-फूड सिस्टम में बदलाव संभव नहीं है. उन्‍होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महिलाओं की निर्णायक भूमिका रहेगी. (एएनआई)

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