Heavy Rain: देश में डेढ़ गुना तो महाराष्ट्र में 4 गुना तक बरसा पानी, किसानों के लिए जरूरी सलाह 

Heavy Rain: देश में डेढ़ गुना तो महाराष्ट्र में 4 गुना तक बरसा पानी, किसानों के लिए जरूरी सलाह 

जून के आखिर तक पूरे देश में मॉनसून काफी कमजोर था और करीब 40 प्रतिशततक बारिश की कमी चल रही थी, लेकिन जुलाई के पहले हफ्ते में मौसम ने ऐसी करवट ली कि पूरे देश में सामान्य से लगभग डेढ़ गुना ज़्यादा मूसलाधार बारिश दर्ज की गई. इस दौरान मध्य महाराष्ट्र में सामान्य से करीब 4 गुना और गुजरात रीजन में ढाई गुना से अधिक भारी बरसात हुई, जिससे खेतों में तेजी से जलभराव और खड़ी फसलों व नर्सरियों के सड़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है.

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Heavy Rain: देश में डेढ़ गुना तो महाराष्ट्र में 4 गुना तक बरसा पानी, किसानों के लिए जरूरी सलाह जुलाई की शुरुआत में मूसलाधार बारिश:

जून में 40 प्रतिशत बारिश की भारी कमी के बाद, जुलाई की शुरुआत होते ही मॉनसून ने ज़बरदस्त करवट ली और 2 जुलाई से 8 जुलाई 2026 वाले सप्ताह में देश के कई हिस्सों में सामान्य से डेढ़ गुना यानी 150% या उससे भी कहीं ज़्यादा मूसलाधार बारिश दर्ज की गई. इस दौरान बंगाल की खाड़ी में बने इस सीज़न के पहले गहरे कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी तट पर सक्रिय ट्रफ की वजह से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया. पूरे भारत के स्तर पर इस सप्ताह की कुल बारिश सामान्य से 45% ज़्यादा रही.

अगर देश के मुख्य रीजन की बात करें, तो सेंट्रल इंडिया में इस हफ्ते वास्तविक वर्षा 157 मिली मीटर  बारिश हुई, जो कि वहां की सामान्य वर्षा 66.3 मिली मीटर के मुकाबले पूरे 137% ज़्यादा यानी लगभग ढाई गुना थी. इसी तरह कोंकण और गोवा में 706.9 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य 239.7 मिली मीटर से 195% अधिक थी, और मध्य महाराष्ट्र में 184.3 मिली मीटर पानी बरसा जो सामान्य 50.3 मिली मीटर से 266% ज़्यादा यानी तकरीबन पौने चार गुना अधिक बारिश रिकॉर्ड किया गया. 

सामान्य से ज़्यादा बारिश वाले राज्य 

इस ख़ास सप्ताह के दौरान देश के जिन प्रमुख राज्यों और रीजन में सामान्य से डेढ़ गुना या उससे अधिक बारिश  दर्ज की गई, उनमें महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान के कई इलाके शामिल हैं. आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात रीजन में सामान्य से 156% ज़्यादा और सौराष्ट्र व कच्छ में 158% ज़्यादा बारिश हुई. मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सामान्य से 99% और पूर्वी हिस्से में सामान्य से 100% अधिक बरसात हुई.

वहीं ओडिशा में सामान्य से 192% ज़्यादा, छत्तीसगढ़ में 109% ज़्यादा, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 17 % अधिक अबारिश दर्ज की गई.राजस्थान के पूर्वी भाग में 62% और पश्चिमी भाग में 58% की बढ़ोतरी देखी गई। पंजाब और हरियाणा में भी मॉनसून के आगे बढ़ने से क्रमशः 9% और 17% की सकारात्मक बढ़त के साथ सामान्य वर्षा दर्ज की गई, जिससे उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों को बड़ी राहत मिली, हालांकि बिहार -65% काफी कम और झारखंड 1%  ज्यादा इस हफ्ते बारिश  रही.

भारी बारिश वाले राज्यों के किसानों के लिए ज़रूरी सलाह 

इस मूसलाधार और अत्यधिक बारिश को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने किसानों के जान-माल और फसलों की हिफाज़त के लिए बेहद ज़रूरी एग्रो-एडवाइज़री यानी कृषि सुझाव जारी किए हैं. महाराष्ट्र के कोंकण और मध्य महाराष्ट्र के घाट वाले इलाकों के किसानों को सलाह दी गई है कि वे धान  और रागी की नर्सरियों तथा सब्जियों के खेतों से फौरन अतिरिक्त पानी की निकासी का मुकम्मल इंतज़ाम करें ताकि जलभराव से पौधे सड़ न जाएं.

उत्तर प्रदेश के किसानों को हिदायत दी गई है कि वे भारी बारिश के दौरान मूंग, उड़द, ज्वार, मूंगफली और तिल की बुआई को कुछ समय के लिए टाल दें और धान की नर्सरी तथा सब्जियों के खेतों से फालतू पानी निकालने की व्यवस्था करें. गुजरात के किसानों के लिए सुझाव है कि भारी बारिश के कारण खेतों में जमा पानी को तुरंत बाहर निकालें ताकि फसलों की जड़ें सुरक्षित रहें. मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में जहां भारी से बहुत भारी बारिश हुई है, वहां सोयाबीन और मक्के के खेतों में पानी रुकने न दें और जलभराव को रोकने के लिए नालियां दुरुस्त रखें. 

जलभराव और नुकसान से बचने के लिए खास हिदायत 

इसके अलावा, देश के बाकी राज्यों के लिए भी IMD ने स्थिति के मुताबिक अहम मशविरे दिए हैं. बिहार और झारखंड के किसानों को सलाह दी गई है कि वे मूंग की पकी हुई फलियों की तुड़ाई जल्द से जल्द कर लें और कटी हुई फसल को महफूज़ मुकाम पर रखें, साथ ही धान की नर्सरी में पानी का सही संतुलन बनाए रखें. पंजाब और हरियाणा के किसानों को कपास और मक्के के खेतों से फालतू पानी फौरन निकालने को कहा गया है ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे. छत्तीसगढ़ और ओडिशा में जहां बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं,

वहां फसलों को जलमग्न होने से बचाने के लिए खेतों के मेड़ और निकास द्वारों को साफ़ रखें.राजस्थान विशेषकर पूर्वी राजस्थान के किसानों को मूंगफली, ग्वार और कपास के खेतों में जलभराव रोकने के पुख्ता इंतजाम करने की सलाह दी गई है. सभी किसानों को सख्त हिदायत है कि तेज आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने के वक्त खुद को और अपने मवेशियों को पक्के शेड के अंदर सुरक्षित रखें, बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे पनाह न लें, तथा मछली पालन वाले तालाबों के चारों तरफ नेटिंग  लगा दें ताकि पानी ओवरफ्लो होने पर मछलियां बह न जाएं.

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