कम पानी, बेहतर कमाई: धान की जगह गेंदा फूल की खेती अपना रहे किसान

कम पानी, बेहतर कमाई: धान की जगह गेंदा फूल की खेती अपना रहे किसान

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने धान की जगह गेंदा फूल की खेती शुरू कर फसल विविधीकरण की नई मिसाल पेश की है.कम पानी, कम लागत, बेहतर बाजार और सरकार की 15 हजार रुपये की आदान सहायता के सहारे वे खेती को अधिक लाभकारी और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

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कम पानी, बेहतर कमाई: धान की जगह गेंदा फूल की खेती अपना रहे किसान

कभी धान की लहलहाती फसल के लिए पहचाने जाने वाले खेत अब रंग-बिरंगे गेंदा फूलों की खुशबू से महकने की तैयारी में हैं. यह बदलाव किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि बदलते मौसम, घटते जल संसाधनों और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की सोच का परिणाम है. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेश्वर के प्रगतिशील किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने इस खरीफ सीजन में अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में धान की जगह गेंदा फूल की खेती शुरू कर फसल विविधीकरण की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है.

करीब 20 एकड़ कृषि भूमि के मालिक वीरेंद्र 

साहू बताते हैं कि पिछले वर्ष अल्प वर्षा और बेमौसम बारिश ने उनकी धान की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया. उत्पादन में कमी आने के साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा.इसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ऐसी फसल चुनने का निर्णय लिया, जिसमें कम पानी की आवश्यकता हो, लागत अपेक्षाकृत कम आए और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बनी रहे.

कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली नई दिशा

वीरेंद्र साहू बताते हैं कि इस नई पहल में कृषि विभाग का सहयोग उनके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ. विभाग के अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने अपनी भूमि का मृदा परीक्षण कराया और उसके अनुरूप गेंदा फूल की वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाया. पौध तैयार करने से लेकर रोपाई, पोषण प्रबंधन और सिंचाई तक हर चरण में विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ा.

उन्होंने बताया कि पास के ग्राम मोहड़ में पिछले वर्ष कई किसानों ने गेंदा फूल की खेती कर अच्छी आय अर्जित की थी. उनकी सफलता ने भी उन्हें इस नई फसल को अपनाने के लिए प्रेरित किया.

कम पानी, कम लागत और सालभर बाजार की मांग

गेंदा फूल की खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लगातार बनी रहने वाली बाजार मांग है. धार्मिक आयोजनों, मंदिरों, विवाह समारोहों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पूरे वर्ष इसकी जरूरत रहती है.इसके अलावा त्योहारों के दौरान इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं.

राजनांदगांव के किसानों के लिए निकटवर्ती दुर्ग का बड़ा फूल बाजार भी उपलब्ध है, जहां आसानी से फसल की बिक्री की जा सकती है. वीरेंद्र साहू का मानना है कि कम पानी, अपेक्षाकृत कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण गेंदा फूल की खेती धान की तुलना में अधिक लाभकारी साबित हो सकती है.

जलवायु परिवर्तन के दौर में फसल विविधीकरण की अहमियत

वीरेंद्र साहू का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण खेती की पारंपरिक पद्धतियों में भी बदलाव लाना जरूरी हो गया है. यदि किसान धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के साथ-साथ कम पानी में होने वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाएं, तो वे मौसम की मार से काफी हद तक बच सकते हैं.

उनका मानना है कि फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे भूजल पर दबाव कम होगा और खेती अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बन सकेगी.

सरकारी प्रोत्साहन से बढ़ा किसानों का भरोसा

राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 15 हजार रुपये की आदान सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. वीरेंद्र साहू का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को मिल रहा यह प्रोत्साहन नई सोच के साथ खेती करने का विश्वास दे रहा है.

वे मानते हैं कि यदि किसानों को इसी तरह तकनीकी मार्गदर्शन, सरकारी सहायता और बेहतर बाजार उपलब्ध होता रहा, तो आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में किसान धान के साथ-साथ गेंदा फूल जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाएंगे.इससे उनकी आय बढ़ेगी, खेती का जोखिम कम होगा और जल संरक्षण के साथ टिकाऊ कृषि को भी मजबूती मिलेगी.

दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बने वीरेंद्र साहू

वीरेंद्र साहू की यह पहल केवल एक किसान का निर्णय नहीं, बल्कि बदलती कृषि व्यवस्था की नई तस्वीर है.जलवायु परिवर्तन, घटते जल संसाधन और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच उनकी यह पहल बताती है कि समय के साथ खेती में बदलाव ही भविष्य की सफलता का आधार बन सकता है. यदि अधिक किसान इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बन सकती है.

 

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