1.75 लाख क्विंटल रिजर्व बीज से बुवाई को सुरक्षा-शिवराज सिंह चौहानअल नीनो के संभावित प्रभाव के चलते इस साल मॉनसून को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश के कई हिस्सों में जून महीने में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हालात पर लगातार नजर रख रही हैं और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पहले से बड़ी तैयारी की गई है.
कृषि मंत्री ने बताया कि जून में देशभर में बारिश की कमी लगभग 33 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी. हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार आया है और बारिश की कमी घटकर 24 प्रतिशत रह गई है. इसके साथ ही कम बारिश वाले जिलों की संख्या भी 262 से घटकर 178 हो गई है.
अल नीनो एक समुद्री और मौसम संबंधी घटना है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है. भारत में इसके प्रभाव से मॉनसून कमजोर पड़ सकता है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. कम बारिश का सीधा असर खेती, जलाशयों, सिंचाई और खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ता है. यही कारण है कि सरकार इस बार संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए पहले से तैयारी में जुटी हुई है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों की विशेष निगरानी की जा रही है. इन राज्यों में खरीफ फसलों का बड़ा रकबा है और मॉनसून की स्थिति का सीधा प्रभाव किसानों की आय पर पड़ सकता है.
सरकार को उम्मीद है कि जुलाई में बारिश की रफ्तार बढ़ने से बुवाई का काम तेज होगा और खेती पर पड़ा शुरुआती असर काफी हद तक कम हो सकेगा.
कृषि मंत्री के मुताबिक देश में अब तक करीब 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. यह पिछले साल की तुलना में लगभग 91.95 लाख हेक्टेयर कम है. मॉनसून में देरी का सबसे ज्यादा असर सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर देखा गया है.
ऐसी स्थिति में किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की जरूरत वाली फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी गई है. मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलें इसके प्रमुख विकल्प हैं.
सरकार ने संभावित मौसमीय चुनौतियों को देखते हुए अप्रैल महीने से ही तैयारी शुरू कर दी थी. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से कम बारिश से प्रभावित होने वाले जिलों के लिए विशेष कंटिंजेंसी प्लान तैयार किए गए और राज्यों के साथ साझा किए गए.
किसानों को जागरूक करने के लिए जून महीने में “खेत बचाओ अभियान” भी चलाया गया. इस अभियान के तहत देशभर में 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 80 लाख से ज्यादा किसानों तक सीधे संपर्क बनाया गया.
सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी परिस्थिति में किसानों को बीज की कमी का सामना न करना पड़े. इसके लिए करीब 1.75 लाख क्विंटल राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है. इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) अभियान को भी तेज किया गया है. 30 जून तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिससे किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके.
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि प्राकृतिक आपदा या कम बारिश के कारण फसल नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके.
अल नीनो की संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप, राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम और विशेष अधिकारियों की टीमों को सक्रिय रखा है. ये सभी इकाइयां मॉनसून, फसल, बुवाई और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार केवल स्थिति की समीक्षा ही नहीं कर रही है, बल्कि समयबद्ध रणनीति, पर्याप्त संसाधनों और मजबूत निगरानी तंत्र के जरिए हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उनका कहना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता भी है, तो किसानों को राहत देने और कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएंगे.
अल नीनो की चुनौती के बीच केंद्र सरकार का फोकस स्पष्ट है—किसानों को सुरक्षित रखना, खरीफ फसलों को बचाना और देश की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित होने से रोकना.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today