El Nino के खतरे के बीच किसानों को राहत! कम बारिश में भी नहीं थमेगी खरीफ बुवाई, रिपोर्ट में बड़ा दावा

El Nino के खतरे के बीच किसानों को राहत! कम बारिश में भी नहीं थमेगी खरीफ बुवाई, रिपोर्ट में बड़ा दावा

रिपोर्ट का अनुमान है कि अल नीनो के कारण बारिश में आने वाला उतार-चढ़ाव भारत के 2026 के खरीफ सीजन को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जलाशयों में पानी का अच्छा भंडार होने से बुवाई और फसल के शुरुआती विकास पर पड़ने वाला असर सीमित रहने की उम्मीद है.

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El Nino के खतरे के बीच किसानों को राहत! कम बारिश में भी नहीं थमेगी खरीफ बुवाई, रिपोर्ट में बड़ा दावाEl Nino की चिंता के बीच राहत

अल नीनो को अक्सर भारतीय किसानों के लिए चिंता की घंटी माना जाता है, क्योंकि इसके आने पर मॉनसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश कम हो सकती है. लेकिन क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार किसानों के लिए राहत की बात यह है कि देश के बड़े जलाशय पानी से लबालब भरे हुए हैं. यही वजह है कि भले ही अल नीनो के कारण बारिश सामान्य से कम हो, फिर भी खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार पर इसका असर काफी हद तक सीमित रह सकता है. हालांकि, अगर बारिश लंबे समय तक कम रहती है तो खेतों में नमी की कमी हो सकती है, जिससे फसलों पर कीटों और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही उर्वरकों की सीमित उपलब्धता भी पैदावार को प्रभावित कर सकती है.

कम बारिश की आशंका के बीच उम्मीद की किरण

रिपोर्ट का अनुमान है कि अल नीनो के कारण बारिश में आने वाला उतार-चढ़ाव भारत के 2026 के खरीफ सीजन को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जलाशयों में पानी का अच्छा भंडार होने से बुवाई और फसल के शुरुआती विकास पर पड़ने वाला असर सीमित रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीफ की बुवाई वाले तीन-चौथाई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान होने के बावजूद, सीजन की शुरुआत में फसल के जमने और विकास पर अल नीनो का असर काफी हद तक सीमित रहने की उम्मीद है.

जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से काफी ऊपर

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रमुख क्षेत्रों के जलाशयों में पानी का भंडार अभी भी सामान्य स्तर से काफी अधिक बना हुआ है. पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में जल भंडारण सामान्य से 44 प्रतिशत अधिक है, जबकि उत्तरी क्षेत्र में यह 34 प्रतिशत, मध्य क्षेत्र में 20 प्रतिशत और दक्षिणी क्षेत्र में 6 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है. ऐसे में बारिश में संभावित कमी के बावजूद सिंचाई और फसलों की शुरुआती जरूरतों को पूरा करने में जलाशयों का यह पर्याप्त भंडार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

इन क्षेत्रों में सिंचाई की पहुंच क्रमशः 48 प्रतिशत, 65 प्रतिशत, 76 प्रतिशत और 52 प्रतिशत है. जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण के साथ मिलकर यह स्थिति सामान्य से कम बारिश की संभावना के बावजूद  बुवाई की गतिविधियों और फसल के जमने में सहायक होने की उम्मीद है. वहीं, पूर्वी भारत में जलाशयों का जल भंडार सामान्य स्तर से 11 प्रतिशत कम है.  हालांकि, पिछले एक महीने के दौरान हुई अनुकूल बारिश के कारण पूरे क्षेत्र में मिट्टी की नमी की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है. ऐसे में बुवाई और फसल के जमने की गतिविधियां सामान्य गति से आगे बढ़ने की संभावना है. हालांकि, देश के अन्य हिस्सों की तुलना में पूर्वी भारत अभी भी मॉनसून के समय पर आगमन और वर्षा के समान वितरण पर अधिक निर्भर बना हुआ है.

कीटों और उर्वरकों की कमी से उत्पादन पर असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीजन के दूसरे हिस्से में नमी की कमी, कीटों और बीमारियों का बढ़ता प्रकोप और उर्वरकों की सीमित उपलब्धता फसलों की उत्पादकता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है. इसके अलावा, उर्वरकों की आपूर्ति में संभावित कमी और फसल सुरक्षा उत्पादों पर बढ़ती निर्भरता के कारण किसानों की लागत भी बढ़ने की आशंका है. रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ सीजन का कुल उत्पादन काफी हद तक पूरे मौसम के दौरान वर्षा के वितरण और कृषि आदानों (इनपुट्स) की समय पर उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

‘फसल-मौसम निगरानी समूह’ का किया गया गठन

इस बीच, केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों पर मौसम संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने ‘फसल-मौसम निगरानी समूह’ और ‘संकट प्रबंधन समूह’ का गठन किया है. साथ ही राज्य सरकारों के साथ एक व्यापक आकस्मिक (कंटिजेंसी) योजना साझा की है. राज्यों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जरूरत के कम से कम एक प्रतिशत के बराबर बीज भंडार बनाए रखें. साथ ही, कम अवधि और मध्यम अवधि में तैयार होने वाली फसल किस्मों के बीजों की उपलब्धता पर विशेष जोर दें. कृषि मंत्रालय, ICAR के सहयोग से जिला-स्तरीय आकस्मिक योजनाएं भी तैयार कर रहा है. इसके अलावा, मॉनसून की तैयारियों और खरीफ सीजन की स्थिति की समीक्षा के लिए राज्यों के अधिकारियों के साथ नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकें आयोजित की जा रही हैं. (PTI)

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