अल नीनो अपडेट्स: मध्य और पश्चिम भारत में सूखे के आसार, मॉनसून पर मंडराया खतरा

अल नीनो अपडेट्स: मध्य और पश्चिम भारत में सूखे के आसार, मॉनसून पर मंडराया खतरा

अल नीनो के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत में खासकर मध्य और पश्चिमी हिस्सों में सूखे का खतरा बढ़ गया है. अगले 1–4 महीनों के अनुमान में मॉनसून कमजोर रहने और कृषि पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है, हालांकि उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश जारी रह सकती है.

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अल नीनो अपडेट्स: मध्य और पश्चिम भारत में सूखे के आसार, मॉनसून पर मंडराया खतराअल नीनो का खतरा

भारत में इस साल मॉनसून पर अल नीनो का गहरा असर देखने को मिल सकता है. ताजा मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार, देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में अगले कुछ महीनों के दौरान सूखे की स्थिति बनने और उसके और गंभीर होने की आशंका जताई गई है. यह पूर्वानुमान ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट कंपनी’ द्वारा जारी 1 से 4 महीने के बारिश के अपडेट पर आधारित है, जिसमें ENSO (एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन) के गर्म चरण को मुख्य कारण बताया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि पूरे देश में मॉनसून के पूरी तरह फेल होने की आशंका नहीं है, लेकिन मुख्य खेती वाले इलाकों—खासकर मध्य भारत—में बारिश की कमी बड़े संकट का रूप ले सकती है. मौजूदा समय में भी देश के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से, विशेषकर मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं.

बारिश सामान्य से कम

पिछले एक सप्ताह के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई है, जिससे मिट्टी में नमी घट रही है और खरीफ फसलों के लिए जोखिम बढ़ रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल मैडेन जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का प्रभाव कमजोर है, लेकिन अगले 15 दिनों के भीतर देश के अधिकांश हिस्सों में कुछ हद तक अच्छी बारिश हो सकती है. हालांकि सुदूर पश्चिमी क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बनी रहने की संभावना है.

लंबी अवधि के पूर्वानुमान, यानी 16 से 30 दिनों की बात करें, तो इसमें देश के बड़े हिस्से में मौसम के शुष्क बने रहने का संकेत है, जबकि बारिश मुख्य रूप से उत्तर-पूर्व भारत तक सीमित रह सकती है. यह स्थिति कृषि के लिए चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि मध्य भारत देश का प्रमुख अनाज उत्पादन क्षेत्र है.

और मजबूत होगा अल नीनो

विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त के महीनों में अल नीनो का असर और स्पष्ट हो सकता है. इन महीनों के दौरान मॉनसून की बारिश में बड़ी कमी आ सकती है, जिससे सूखे की स्थिति और गंभीर हो सकती है. ‘ग्लोबल एटमॉस्फेरिक एंगुलर मोमेंटम’ के तेजी से पॉजिटिव फेज में जाने की संभावना भी जताई गई है, जो अल नीनो के सक्रिय होने का संकेत माना जाता है.

इसी के साथ, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति भी अहम भूमिका निभाएगी. फिलहाल IOD हल्के नेगेटिव फेज में है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक इसके पॉजिटिव होने की संभावना जताई जा रही है. अगर IOD पॉजिटिव फेज में मजबूत होता है, तो यह कुछ हद तक अल नीनो के नकारात्मक असर को कम कर सकता है और बारिश में सुधार ला सकता है. हालांकि यदि IOD न्यूट्रल रहता है, तो अल नीनो का सूखा पैदा करने वाला प्रभाव और ज्यादा मजबूत हो जाएगा.

जुलाई में सूखे का खतरा अधिक

मासिक पूर्वानुमानों के अनुसार, जुलाई में मध्य और दक्षिण-मध्य भारत में सूखे का खतरा सबसे अधिक रहेगा, जबकि उत्तर-पूर्वी राज्यों में भारी बारिश होने की संभावना है. अगस्त में यह खतरा और बढ़ सकता है. सितंबर में उत्तर भारत के बड़े हिस्से में सूखापन रह सकता है, जबकि पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है. अक्टूबर में दक्षिण और पूर्वी भारत में भी सूखे जैसे हालात बन सकते हैं.

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इन मौसम की परिस्थितियों का असर सिर्फ मौजूदा खरीफ फसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2026 की गर्मियों में होने वाली कृषि पैदावार पर भी इसका लंबे दिनों तक प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में कृषि क्षेत्र के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है. मौसम के इस बदलते रुख को देखते हुए किसानों को कौन सी फसल लगाएं, बुवाई के समय और जल प्रबंधन को लेकर रणनीति बदलने की जरूरत होगी, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

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