E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद, ISMA बोला- माइलेज को लेकर फैल रही हैं गलत बातें, अफवाहों पर न करें भरोसा

E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद, ISMA बोला- माइलेज को लेकर फैल रही हैं गलत बातें, अफवाहों पर न करें भरोसा

E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज घटने के दावों के बीच ISMA ने कहा है कि यह ईंधन पूरी तरह वैज्ञानिक जांच और परीक्षण के बाद लागू किया गया है. संगठन के अनुसार, E20 से इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. साथ ही, यह ईंधन प्रदूषण कम करने, कच्चे तेल के आयात को घटाने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार है.

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E20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद, ISMA बोला- माइलेज को लेकर फैल रही हैं गलत बातें, अफवाहों पर न करें भरोसाE20 पेट्रोल पर ISMA का बड़ा दावा

देश में इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है. कई वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज पहले की तुलना में काफी कम हो गया है. कुछ लोगों का दावा है कि माइलेज में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. वहीं वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि अगर कोई असर पड़ता भी है तो वह केवल 3 से 3.5 प्रतिशत तक ही होता है. सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है और लोग अपने-अपने अनुभव साझा कर रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब

इस विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखा है. उन्होंने कंपनियों से पूछा है कि E20 पेट्रोल का गाड़ियों की माइलेज और प्रदर्शन पर क्या असर पड़ता है. उन्होंने सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा है. अपने पत्र में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर 2023 से पहले बनी ऐसी गाड़ियां, जो E20 के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं, उनका माइलेज 10 प्रतिशत से ज्यादा घटता है तो क्या वाहन मालिकों को किसी तरह का मुआवजा मिलेगा.

ISMA ने E20 पेट्रोल का किया समर्थन

इसी बीच भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) ने E20 पेट्रोल का बचाव किया है. संगठन का कहना है कि भारत का एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और विशेषज्ञों की सलाह के बाद लागू किया गया है. इस कार्यक्रम की निगरानी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, तेल विपणन कंपनियां, वाहन निर्माता कंपनियां, ईंधन परीक्षण एजेंसियां और अन्य संबंधित संस्थाएं मिलकर करती हैं.

सरकार ने क्या कहा?

ISMA के अनुसार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा है कि E20 पेट्रोल लागू होने के बाद अब तक इंजन खराब होने या गाड़ी बंद पड़ने जैसी कोई पुष्टि की गई घटना सामने नहीं आई है. मंत्रालय का कहना है कि E20 ईंधन पूरी तरह गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार किया जाता है. इसमें इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), टूटे हुए चावल और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है. कई चरणों की जांच के बाद ही इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है.

माइलेज को लेकर क्या है उद्योग का पक्ष?

ISMA ने बताया कि हाल ही में वाहन निर्माता कंपनियों, तेल कंपनियों, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने भी E20 पेट्रोल का समर्थन किया है. इन संस्थाओं का कहना है कि E20 को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह अधिकतर अफवाहों और गलत जानकारी पर आधारित है. उनके अनुसार, यदि माइलेज में कोई कमी आती भी है तो वह बहुत मामूली होती है और सामान्य उपयोग में ज्यादा अंतर महसूस नहीं होता.

E20 पेट्रोल से देश को क्या फायदा?

ISMA का कहना है कि E20 पेट्रोल केवल ईंधन नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की एक बड़ी योजना है. इससे भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है. विदेशों से कम तेल खरीदने की वजह से देश का विदेशी मुद्रा खर्च भी घटता है. सरकार के अनुमान के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की मदद से अब तक भारत 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचा चुका है. इसके अलावा गन्ना, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है.

ISMA ने लोगों से की अपील

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि E20 कार्यक्रम सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, तेल कंपनियों और ऑटोमोबाइल उद्योग की लंबी तैयारी और परीक्षण के बाद शुरू किया गया है. इसलिए लोगों को किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसके तथ्यों को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के फैलने वाली गलत जानकारी एक ऐसे कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे देश, पर्यावरण और किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है.

फिलहाल क्या है स्थिति?

फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच सवाल बने हुए हैं. एक तरफ कुछ वाहन मालिक माइलेज कम होने की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार, ISMA और वाहन निर्माता कंपनियां इसे सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ईंधन बता रही हैं. अब सभी की नजर ऑटो कंपनियों के जवाब और आगे आने वाले आधिकारिक आंकड़ों पर रहेगी, जिससे यह साफ हो सके कि E20 पेट्रोल का वास्तविक असर कितना है.

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