कपास के बाजार में नई शुरुआतभारत में कपास के कारोबार को बढ़ावा देने और किसानों और व्यापारियों को बेहतर दाम दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. दरअसल, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) और नेशनल कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX) ने गुरुवार को मुंबई में एक समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इसका मकसद भारत में कपास के वायदा बाजार को मजबूत और बेहतर बनाना है. समझौते पर NCDEX के प्रबंध निदेशक और CEO विकास गोयल और CAI के अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने हस्ताक्षर किए. इस मौके पर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के CMD ललित कुमार गुप्ता, NCDEX बोर्ड के सदस्य और CAI के बोर्ड और समितियों के सदस्य भी मौजूद रहे.
CAI के अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने कहा कि इस साझेदारी के जरिए भारत में ऐसा कपास वायदा बाजार तैयार करने की कोशिश की जाएगी, जो पारदर्शी, आसान और उपयोगी हो. उन्होंने कहा कि CAI के पास कपास वायदा कारोबार का पुराना अनुभव है, जबकि NCDEX के पास तकनीक, संस्थागत क्षमता और कमोडिटी डेरिवेटिव्स का अनुभव है. दोनों संस्थाएं मिलकर कपास और कपड़ा उद्योग से जुड़े लोगों के लिए बेहतर बाजार तैयार करेंगी. उन्होंने कहा कि वायदा बाजार मुख्य रूप से तीन काम करता है-इससे कीमत तय करने, कीमतों में होने वाले बदलाव से बचने और कारोबार में जोखिम कम करने में मदद मिलती है. साथ ही बाजार में खरीद-बिक्री को आसान बनाया जाता है.
विनय एन. कोटक ने कहा कि भारत कपास का बड़ा उत्पादक और खरीदार देश है. फिर भी यहां के कई कारोबारी कीमतों के जोखिम से बचने के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भर रहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत को कपास के कारोबार में भी आत्मनिर्भर बनना चाहिए और इसके लिए देश में ही मजबूत और भरोसेमंद बाजार तैयार करना जरूरी है.
CAI के अध्यक्ष ने कहा कि कपास का बाजार तभी मजबूत होगा, जब किसान, व्यापारी, कपड़ा उद्योग और निर्यातक सभी इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लें. NCDEX के MD और CEO विकास गोयल ने कहा कि कपास भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है, लेकिन कपास का वायदा बाजार अभी उतना मजबूत नहीं है, जितना होना चाहिए. CAI के साथ यह साझेदारी बाजार को मजबूत बनाने में मदद करेगी.
CAI के मुताबिक, कपास का मजबूत बाजार बनने से किसानों को फसल की सही कीमत का अंदाजा मिल सकेगा. वहीं कपड़ा उद्योग और निर्यातकों को कपास की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने में मदद मिलेगी. विनय एन. कोटक ने कहा कि इस समझौते से भारत के कपास बाजार को मजबूत करने की नई शुरुआत हुई है. सरकार, एक्सचेंज और बाजार से जुड़े लोग मिलकर भारत को कपास के कारोबार में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेंगे.
उन्होंने कहा कि इसका मकसद किसानों को बेहतर दाम और ज्यादा आय दिलाना है. साथ ही कपड़ा निर्यातकों को कपास की कीमत बढ़ने-घटने के जोखिम से बचने का बेहतर तरीका देना है. इससे 2030 तक 100 अरब डॉलर के कपड़ा निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.
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