नहर में आया पानी तो खेतों में लौटी रौनक (Photo Source: ANI)कर्नाटक के मंड्या जिले में पानी की कमी और सरकार की नई फसल नहीं लगाने की सलाह के बावजूद किसानों ने धान की रोपाई की तैयारी शुरू कर दी है. नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद किसानों ने खेत तैयार करना शुरू कर दिया है. किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी और बांधों में भी पर्याप्त पानी जमा हो जाएगा. हालांकि, पानी कब तक मिलेगा, इसे लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है.
मंड्या में नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद खेतों में कृषि गतिविधियां फिर से तेज हो गई हैं. किसान धान की पौध तैयार करने और खेतों को रोपाई के लिए तैयार करने में जुट गए हैं. किसानों का कहना है कि पानी मिलने से उन्हें खेती शुरू करने की उम्मीद तो जगी है, लेकिन अभी भी पानी की उपलब्धता को लेकर भरोसा नहीं है. सरकार की ओर से किसानों को इस सीजन में नई फसल नहीं लगाने की सलाह दी गई है. इसकी वजह क्षेत्र में पानी की कमी है. इसके बावजूद कई किसान धान की रोपाई की तैयारी कर रहे हैं. किसानों को उम्मीद है कि बारिश होने पर पानी की समस्या कुछ कम हो सकती है और उनकी फसल बच सकती है.
फिलहाल मंड्या जिले की नहरों में पानी रोटेशन के आधार पर यानी 'कट्टू पद्धति' से छोड़ा जा रहा है. इसका मतलब है कि नहरों में पानी लगातार नहीं, बल्कि तय समय के अनुसार छोड़ा जाता है. किसानों को सबसे बड़ी चिंता इसी बात की है कि नहरों में पानी कितने दिनों तक रहेगा. किसानों का कहना है कि सिर्फ कुछ समय के लिए पानी मिलने से धान की फसल शुरू करना जोखिम भरा है. धान की खेती में लगातार पानी की जरूरत होती है. अगर बीच में पानी बंद हो गया तो किसानों को फसल बचाने में परेशानी हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
मंड्या के किसानों का कहना है कि नहरों में पानी छोड़ा गया है, लेकिन वे केवल इसी पानी के भरोसे खेती शुरू नहीं कर सकते. किसानों की मांग है कि नहरों में लगातार पानी छोड़ा जाए, ताकि वे अपनी फसल की योजना बना सकें और खेती से अपना घर चला सकें. किसानों का कहना है कि उन्हें पानी मिलने की खुशी है, लेकिन साथ ही यह डर भी है कि सरकार कब पानी रोक देगी. उनका कहना है कि अगर पानी लगातार मिलता रहे तो वे धान की खेती कर सकते हैं और अपनी आजीविका चला सकते हैं. किसानों ने सरकार से अपील की है कि वह राजनीति से ऊपर उठकर किसानों की समस्या का समाधान करे.
किसानों ने पानी की समस्या के साथ-साथ सूखा राहत को लेकर भी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि एक तरफ उन्हें सूखे के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दूसरी तरफ खेती के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. ऐसे में किसानों के सामने अपनी आजीविका चलाने की बड़ी चुनौती है. किसानों का कहना है कि वे खेती करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए पानी की पक्की व्यवस्था जरूरी है. केवल नहरों में थोड़े समय के लिए पानी छोड़ने से फसल तैयार करना मुश्किल होगा.
मंड्या और कावेरी नदी के आसपास के इलाकों में पानी को लेकर किसानों की चिंता पहले भी सामने आती रही है. अगस्त में कर्नाटक के मंत्री एन. चेलुवराय स्वामी ने कहा था कि सरकार मंड्या और कावेरी क्षेत्र के किसानों की परेशानी को समझती है. उन्होंने किसानों से कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेश का इंतजार करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि सरकार किसानों के खिलाफ नहीं है और उसे मंड्या समेत कावेरी क्षेत्र के किसानों की समस्याओं की जानकारी है.
मंत्री ने कहा था कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी इस मामले से पूरी तरह अवगत हैं. उन्होंने बताया था कि मुख्यमंत्री दिल्ली जाने वाले हैं और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से चेन्नई में मुलाकात की संभावना भी है. सरकार को उम्मीद है कि कावेरी नदी के पानी को लेकर चल रहे विवाद का कोई रास्ता निकलेगा. फिलहाल मंड्या के किसान बारिश और बांधों में पानी बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. नहरों में पानी आने के बाद उन्होंने धान की रोपाई की तैयारी तो शुरू कर दी है, लेकिन पानी की कमी का डर अभी भी बना हुआ है. आने वाले दिनों में बारिश और पानी की उपलब्धता यह तय करेगी कि किसान धान की फसल कितनी आसानी से लगा पाते हैं.
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