बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (BASU) ने शनिवार को अपना 10वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. राजधानी पटना स्थित विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजित भव्य समारोह में वैज्ञानिकों, शिक्षकों, छात्रों और पूर्व छात्रों की बड़ी संख्या मौजूद रही. इस मौके पर विश्वविद्यालय ने 18 नए शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत की और भविष्य की दिशा पर जोर दिया. समारोह में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय मुख्य अतिथि रहे. विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए.
वर्तमान कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. समारोह की शुरुआत छात्र कल्याण पदाधिकारी डॉ. ए.के. शर्मा के स्वागत भाषण से हुई. वहीं कुलसचिव डॉ. उमेश सिंह ने नए शैक्षणिक कार्यक्रमों का परिचय प्रस्तुत किया. मुख्य अतिथि डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि महज एक दशक में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वह उल्लेखनीय है. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह संस्थान राज्य का पशु विज्ञान का थिंक टैंक बनेगा.
उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक कार्यक्रम न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को लाभ देंगे. पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में ये कोर्स युवाओं के लिए नए अवसर और रोजगार सृजित करेंगे. उन्होंने कहा कि बिहार में पशुपालन की अपार संभावनाएं हैं और विश्वविद्यालय को इसमें मार्गदर्शक भूमिका निभानी होगी.
विशिष्ट अतिथि और संस्थापक कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की नींव समाज और किसानों के जीवन में बदलाव लाने के मकसद से रखी गई थी. उन्होंने कहा कि अब समय खाद्यान्न या सिर्फ फूड सिक्योरिटी का नहीं, बल्कि न्यूट्रिशनल वैल्यू पर ध्यान देने का है.
उन्होंने नए शुरू किए गए पशुधन सहायक (पारा-वेट) प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की. उन्होंने कहा कि परावेट की भारी कमी है और यह कोर्स युवाओं को रोजगार देने के साथ किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत तंत्र बने, ताकि नीतियां किसानों और पशुपालकों के हित में हों.
कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने विश्वविद्यालय की एक दशक की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगारपरक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अब ईटीटी और आईवीएफ जैसी आधुनिक तकनीक सीधे किसानों तक ले जाने पर काम कर रहा है.
उन्होंने कहा कि जब अयोग्य लोग पशुओं का इलाज करते हैं तो किसानों को नुकसान होता है. इसलिए वैज्ञानिकों और योग्य चिकित्सकों को फील्ड में जाकर किसानों के बीच भरोसा कायम करना होगा. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मकसद सिर्फ पढ़ाई-लिखाई और शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों और वैज्ञानिकों की क्षमता को नई ऊंचाई तक ले जाना है.
समारोह में पूर्व छात्र और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई लोगों को सम्मानित किया गया. इनमें छात्र रूपनारायण, पूर्व छात्र जी.एम. कोम्फेड हमीद उद्दीन, सेवानिवृत संयुक्त श्रम आयुक्त अरविन्द कुमार और कई संकाय सदस्य शामिल थे. इसी अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र जमुई की प्रसार पुस्तिका “रंग-बिरंगी मछलियां खोलेगी ग्रामीण रोजगार के अवसर” का विमोचन भी किया गया.
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई निदेशक, पदाधिकारी और संकाय सदस्य भी मौजूद रहे. जिनमें डॉ. नरेश कुमार सिंह, डॉ. निर्मल सिंह दहिया, बी.के. झा, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विपिन सिंह, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. संजय भारती, डॉ. विनीता कुमारी समेत बड़ी संख्या में प्राध्यापक और शोधार्थी शामिल थे.
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