आधुनिक खेती और पशुपालन से बढ़ाएं अपनी आमदनीअंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल से सटे और राप्ती नदी के किनारे बसे बलरामपुर जनपद के सिशानिया घोपलापुर गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां अपने 44वें पड़ाव के रूप में पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टूडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में सुबह से ही किसानों के आने का सिलसिला जारी रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनसे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में आधुनिक खेती की तकनीकों पर जोर देते हुए बताया कि नई तकनीक अपनाकर किसान अपनी लागत घटाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं.
तराई क्षेत्र के इस जनपद में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को सिर्फ खेती और पशुपालन तक सीमित जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें यह भी समझाया गया कि कैसे वे विभिन्न फसलों के वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर सीधे बाजार में बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. विशेषज्ञों ने कृषि आधारित उद्योगों से जुड़ी बारीकियों पर भी विस्तार से जानकारी दी. इसके अलावा इफ्फको के प्रतिनिधियों ने अपने उत्पादों की उपयोगिता और फायदे किसानों को बताए. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला.
पहले चरण में जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, बलरामपुर डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने किसानों को बताया कि सरकार द्वारा पशुओं के टीकाकरण को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है.साथ ही उन्होंने ‘भारत पशुधन ऐप’ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.उन्होंने कहा कि पशुओं का बधियाकरण सरकार की ओर से निशुल्क किया जा रहा है, जिसका लाभ किसान अवश्य उठाएं.‘उन्होंने ‘नंदिनी कृषक समृद्धि योजना’ के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न प्रकार के लाभ मिलते हैं.इसके अलावा, पशुपालन विभाग द्वारा संचालित अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में भी किसानों को अवगत कराया गया. उन्होंने कहा कि यदि किसान अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें पशुपालन की ओर कदम बढ़ाने की आवश्यकता है.साथ ही, लेयर फार्मिंग (अंडा उत्पादन) के बारे में भी उन्होंने किसानों को विस्तार से जानकारी दी.
दूसरे चरण में कृषि विभाग के कर्मचारी आलोक कुमार सोनकर ने फार्मर रजिस्ट्रेशन के बारे में बताया और उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन करवाना किसानों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि अब आने वाले दिनों में उर्वरक भी किसान रजिस्ट्रेशन के जरिए ही मिलेगा. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के बारे में विस्तार से किसानों को बताया और कहा कि इस योजना में समय-समय पर अपडेट होता रहता है, तो अगर किसानों को किसी तरह की दिक्कत या परेशानी इस योजना से आती है तो वह संबंधित विभाग से जरूर संपर्क करें.
तीसरे चरण में कृषि विभाग के बखारी और स्प्रे मशीन पर मिलने वाले अनुदान के बारे में भी किसानों को जानकारी दी. साथ ही उन्होंने सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली से जुड़ी किसी भी समस्या के बारे में बताया कि किसान अब व्हाट्सएप नंबर 9452247111 और 9452257111 पर जानकारी भेज सकते हैं.
चौथे चरण में जिला उद्यान अधिकारी बलरामपुर दिनेश चौधरी ने किसानों को रसायन-मुक्त खेती अपनाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सब्जी की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं. इसके साथ ही बीज पर भी अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक सब्जी की खेती करें और रसायन-मुक्त खेती अपनाएं.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र, बलरामपुर के वैज्ञानिक डॉ. गिरिजेश जायसवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों को समय के साथ अपडेट होने की आवश्यकता है. उन्होंने रसायनयुक्त उर्वरकों का उपयोग कम करने की सलाह दी.साथ ही किसानों को मधुमक्खी पालन अपनाने का सुझाव दिया और कहा कि यदि संभव हो तो इसे आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपनाएं. इसके अलावा बढ़ते तापमान के प्रभाव और उससे बचाव के उपायों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.
छठवें चरण में इफको के प्रतिनिधि गौरव शर्मा ने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को लगभग 80–90 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की उपलब्धता मिलती है, जबकि पारंपरिक दानेदार उर्वरकों से यह लाभ अपेक्षाकृत कम होता है. उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि किसान नैनो उर्वरकों का उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करें.
सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बलरामपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जय प्रकाश कुमार ने किसानों को मखाना की खेती के प्रति जागरूक किया.उन्होंने बताया कि मखाना की खेती करना बहुत कठिन नहीं है, लेकिन इसका प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) अपेक्षाकृत कठिन होता है.उन्होंने किसानों को मखाना की खेती की पूरी विधि विस्तार से समझाई और बताया कि किस प्रकार तालाबों तथा खेतों में आसानी से मखाना की खेती की जा सकती है. उन्होंने कहा कि बिहार के अलावा अब उत्तर प्रदेश के बलरामपुर सहित आसपास के जिलों में भी मखाना की खेती की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं.
आठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बलरामपुर के प्रमुख डॉ. सियाराम ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के लिए खेती का अस्पताल है. यहां खेती से लेकर पशुपालन तक से जुड़े सभी विषयों के कृषि वैज्ञानिक उपलब्ध रहते हैं.यदि किसानों को खेती में किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो वे केवीके से संपर्क कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने गन्ने की खेती के साथ सहफसली (इंटरक्रॉपिंग) खेती अपनाने का भी सुझाव दिया.
नौवीं चरण में इफको एमसी के प्रतिनिधि हर्षित कुमार ने इफको एमसी से जुड़े विभिन्न उत्पादों के बारे में किसानों को जानकारी दी.उन्होंने बताया कि कंपनी के कई बायो-पेस्टिसाइड (जैविक कीटनाशक) उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं, जो फसलों के लिए सुरक्षित और प्रभावी हैं.उन्होंने कहा कि किसान इन उत्पादों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.यदि किसान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करना चाहते हैं, तो वे इफको एमसी के बायो-पेस्टिसाइड उत्पादों का इस्तेमाल कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते.
दसवें चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की.उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने भारत विस्तार प्लेटफार्म के बारे में जानकारी दिया और इसके महत्व को बताया.
अंतिम 11वें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और पांच विजेता को 1000 रुपये दिए गए. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
ये भी पढ़ें:
Meat Export to Iran: हर साल 85 से 100 करोड़ रुपये का भारतीय मीट खाते हैं ईरानी, रुक गई सप्लाई
सरसों किसानों की बढ़ी चिंता, MSP से कम दाम पर बिक्री के बीच जल्द खरीद की मांग
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today