
शिवराज सिंह चौहानकेंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी सीजन की तैयारियों को लेकर राज्यों को समय पर योजना बनाने और उसे जमीन पर लागू करने के निर्देश दिए हैं. दिल्ली में शुरू हुए दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026’ में उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, बेमौसम बारिश और पानी की कमी को देखते हुए अब खेती की योजना वैज्ञानिक जानकारी और डेटा के आधार पर बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के साथ खेत स्तर पर योजनाओं की निगरानी भी जरूरी है. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रबी सीजन के लिए ऐसी साझा रणनीति तैयार करना है, जिससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में सुधार किया जा सके.
शिवराज सिंह चौहान ने रबी की तैयारी में ‘जल बजट’ को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि हर राज्य और जिले को पहले यह देखना होगा कि सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है, जहां पानी की कमी है, वहां कम पानी में तैयार होने वाली दलहन और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जाए. वहीं, जिन इलाकों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था है, वहां दूसरी फसलों की योजना बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि कम पानी वाले इलाके में अगर ज्यादा पानी मांगने वाली फसल बोई गई और बाद में सिंचाई का पानी नहीं मिला, तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा, इसलिए बुवाई से पहले पानी और मिट्टी में नमी की स्थिति का आकलन जरूरी है.
कृषि मंत्री ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की स्थिति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन राज्यों में स्थिति का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्र की टीमें भेजी जाएंगी. उन्होंने बताया कि कर्नाटक में 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम सूखे की स्थिति का जायजा लेगी और महाराष्ट्र में भी टीम भेजी जाएगी. महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के सूखा प्रभावित इलाकों में फसल का चुनाव पानी और मिट्टी में उपलब्ध नमी को देखकर करने पर जोर दिया गया.
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से रबी फसलों की समय पर बुवाई सुनिश्चित करने को कहा. उन्होंने कहा कि बुवाई में देरी होने पर बीज का अंकुरण और आगे चलकर उत्पादन प्रभावित हो सकता है. खासकर बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में समय पर नमी का फायदा उठाना जरूरी है. इसके अलावा कृषि मंत्री ने बीज को रबी की तैयारी की सबसे अहम कड़ी बताया. उन्होंने राज्यों से कहा कि अभी से तय किया जाए कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल और कौन सी किस्म बोई जाएगी. इसके आधार पर बीज की मांग, उपलब्धता और वितरण का पूरा प्लान तैयार किया जाए. उन्होंने आईसीएआर के वैज्ञानिकों और कृषि विभागों से अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्मों की पहचान करने को कहा, ताकि किसानों को समय पर बेहतर बीज मिल सके.
धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया. इनमें चना, मसूर और सरसों जैसी फसलें शामिल हैं. सरकार का फोकस इन फसलों का उत्पादन बढ़ाकर देश को दलहन और खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने पर है. कृषि मंत्री ने राज्यों से कहा कि वे अपने यहां दलहन का रकबा और फसलवार लक्ष्य तय करें. साथ ही किसानों को यह भरोसा भी दिया जाए कि उनकी उपज की खरीद की व्यवस्था समय पर होगी.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की तैयारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल की खरीद और बाजार व्यवस्था भी पहले से तैयार होनी चाहिए. अगर राज्य समय पर खरीद नहीं करते हैं तो केंद्र की नोडल एजेंसियां जैसे NAFED और NCCF खरीद कर सकती हैं. इसके लिए राज्यों को जरूरी सुविधाएं और सहयोग समय पर उपलब्ध कराना होगा. साथ ही कृषि मंत्री ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि जरूरत एक बोरी खाद से पूरी हो रही है तो दो बोरी इस्तेमाल करने से लागत बढ़ेगी और मिट्टी पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने राज्यों से रबी सीजन में भी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने को कहा. इसके तहत किसानों को जरूरत के मुताबिक ही खाद इस्तेमाल करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए जागरूक किया जाएगा.
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ उसके उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान देने की बात कही गई. शिवराज सिंह ने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके उत्पादों को बाजार में सही पहचान और बेहतर कीमत दिलाने के लिए राज्यों को काम करना होगा. सम्मेलन में किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी को लेकर भी चर्चा हुई. राज्यों से कहा गया कि छोटे और सीमांत किसानों तक किसान क्रेडिट कार्ड और समय पर कृषि लोन पहुंचाने में जो दिक्कतें हैं, उन्हें दूर किया जाए. साथ ही फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक का काम तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में आसानी हो.
कृषि मंत्री ने राज्यों से हर सप्ताह बुवाई की स्थिति, फसल के अंकुरण, रोगों के प्रकोप और बाजार भाव की समीक्षा करने को कहा. इसका उद्देश्य खेतों में आने वाली समस्याओं की जानकारी समय रहते जुटाना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करना है. दो दिवसीय सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ रबी सीजन की तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं. 29 सितंबर को राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ रबी मौसम की रणनीति, मौसम पूर्वानुमान, खाद की उपलब्धता, डिजिटल कृषि, किसान रजिस्ट्री, दलहन और खाद्य तेल मिशन समेत कई मुद्दों पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण विभाग की ओर से यह सम्मेलन पूसा स्थित एनएएससी परिसर में आयोजित किया जा रहा है. सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इसके अलावा विभिन्न राज्यों के कृषि विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, ICAR संस्थानों के प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), आत्मा और अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हुए.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today