'रिश्वत का पेड़' लेकर कृषि कार्यालय पहुंचे किसानमहाराष्ट्र के अकोला में खराब सोयाबीन बीजों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. कार्रवाई में देरी से नाराज किसानों ने गुरुवार को कृषि अधीक्षक कार्यालय में अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया. किसान एक पेड़ की टहनी पर 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट चिपकाकर (रिश्वत का पेड़) लेकर दफ्तर में पहुंचे. उन्होंने कृषि विभाग और बीज कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाए. प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि अगर अधिकारियों को कंपनियों से मिली कथित रिश्वत कम पड़ गई है, तो ये पैसे भी रख लें, लेकिन किसानों को न्याय जरूर दिलाएं.
किसानों ने आरोप लगाया कि खराब सोयाबीन बीज बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है. कृषि विभाग के कुछ अधिकारी कंपनियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसानों ने कहा कि अब तक सिर्फ दो बीज कंपनियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि 150 से ज्यादा कंपनियों के बीज जर्मिनेशन टेस्ट में फेल पाए गए हैं. इसके बावजूद ज्यादातर कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. किसानों ने सवाल किया कि अगर जांच में खामियां सामने आ चुकी हैं तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? और खराब बीजों से हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मांग की कि सभी जिम्मेदार बीज कंपनियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए. अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
बता दें कि इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है. हाल ही में भाजपा विधायक हरीश पिंपले ने दोषी बीज कंपनियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले कृषि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग की. उन्होंने किसानों को मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की पैरवी की.
वहीं, इससे पहले पूर्व विधायक अमोल मिटकरी किसानों के साथ कृषि अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर नाराजगी जता चुके हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि खराब बीज किसानों तक कैसे पहुंच गए? इसी मुद्दे पर किसानों ने दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नुकसान की भरपाई और गुणवत्ता जांच व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज कर दी है.
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