खाद डीलर से कृषि विशेषज्ञ तक, DAESI ट्रेनिंग ने कैसे बदल दी राजकुमार हुरिया की पहचान

खाद डीलर से कृषि विशेषज्ञ तक, DAESI ट्रेनिंग ने कैसे बदल दी राजकुमार हुरिया की पहचान

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के लालपुर गांव के राजकुमार हुरिया ने DAESI (Diploma in Agricultural Extension Services for Input Dealers) कोर्स के जरिए अपने करियर को नई दिशा दी. एक कृषि इनपुट डीलर के रूप में शुरुआत करने वाले राजकुमार ने वैज्ञानिक ट्रेनिंग और आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से खुद को किसानों के भरोसेमंद कृषि सलाहकार के रूप में स्थापित किया. MANAGE हैदराबाद और पंतनगर विश्वविद्यालय से मिली शिक्षा ने न केवल उनकी तकनीकी क्षमता बढ़ाई, बल्कि आय और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाई. उनकी प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि ज्ञान, ट्रेनिंग और इनोवेशन के जरिये ग्रामीण कृषि विकास को कैसे नई मजबूती दी जा सकती है.

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खाद डीलर से कृषि विशेषज्ञ तक, DAESI ट्रेनिंग ने कैसे बदल दी राजकुमार हुरिया की पहचानDAESI Success Story

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में लालपुर गांव के रहने वाले राजकुमार हुरिया के लिए खेती हमेशा से सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका रही है. एक किसान परिवार में पले-बढ़े होने के कारण, उन्हें कम उम्र से ही खेती की गहरी समझ हो गई थी. अर्थशास्त्र में पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने 1999 में 'हुरिया खाद भंडार' शुरू किया ताकि कृषि इनपुट (जैसे बीज, खाद, कीटनाशक) की सप्लाई करके किसानों की सेवा कर सकें.

उनके छोटे भाई, जो एग्रीकल्चर ग्रेजुएट थे, उन्हें नई-नई कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी देते रहते थे, जिससे राजकुमार को इस क्षेत्र में हो रहे बदलावों और नई जानकारियों से जुड़े रहने में मदद मिलती थी. हालांकि, उनके इलाके में—जिसे चावल, गेहूं और गन्ने का कटोरा माना जाता है—खेती को कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल की वजह से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था. इससे मिट्टी की सेहत खराब हो रही थी और फसलों में कीड़ों का खतरा बढ़ रहा था.

अपनी जानकारी को बेहतर बनाने और किसानों की और अच्छी तरह सेवा करने की जरूरत को समझते हुए, राजकुमार ने लगातार प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली. 2005 में, उन्होंने ईशा एग्रो लिमिटेड, मुंबई की एडवांस्ड एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग में हिस्सा लिया. इसके बाद, 2021–22 के दौरान दयाल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के चलाए गए ऑर्गेनिक फार्मिंग (जैविक खेती) प्रोग्राम की खास ट्रेनिंग भी ली.

DAESI से आया एक अहम बदलाव

राजकुमार के प्रोफेशनल सफर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें 'इनपुट डीलर्स के लिए एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज में डिप्लोमा' (DAESI) के बारे में पता चला. यह प्रोग्राम MANAGE, हैदराबाद की ओर से चलाया जाता है. 2017–18 के दौरान उन्हें पता चला कि एग्रीकल्चर इनपुट डीलरशिप का लाइसेंस जारी रखने के लिए DAESI प्रोग्राम पूरा करना जरूरी हो गया है.

इस जरूरत को पूरा करने और अपनी प्रोफेशनल काबिलियत को बढ़ाने के पक्के इरादे के साथ, वे अपनी दुकान से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित कृषि विभाग गए और अपना आवेदन जमा किया. इसके बाद, उन्हें उत्तराखंड के पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (GBPUAT) में 2021–22 बैच के लिए चुना गया.

जून 2021 में शुरू हुए इस 48 हफ्ते के प्रोग्राम में उन्हें क्लासरूम में पढ़ाई, प्रैक्टिकल सेशन और फील्ड विजिट के ज़रिए कई जानकारी मिली. इस कोर्स में कई तरह के विषय शामिल थे, जैसे फसल, सब्जी और फल उगाने की तकनीक, मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, जैविक खेती, संरक्षित खेती, बीज अधिनियम, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM), और कृषि, बागवानी और पशुपालन विभागों की किसानों के लिए कई योजनाएं. 

इस प्रोग्राम ने न सिर्फ उनकी तकनीकी जानकारी बढ़ाई, बल्कि उन्हें व्यावहारिक ज्ञान भी दिया, जिसका इस्तेमाल वे किसानों के साथ रोजाना की बातचीत में सीधे तौर पर कर सकते थे.

इनपुट सेलर से कृषि सलाहकार तक

DAESI प्रोग्राम पूरा करने के बाद, राजकुमार ने अपने बिजनेस को चलाने का तरीका पूरी तरह बदल दिया. सिर्फ बीज, खाद और कीटनाशक बेचने के पुराने तरीके के बजाय, उन्होंने किसानों को सही कृषि इनपुट सुझाने से पहले वैज्ञानिक सलाह और तकनीक पर आधारित सलाह देनी शुरू की.

जब लोगों को पता चला कि वे पंतनगर यूनिवर्सिटी से खेती की एडवांस्ड ट्रेनिंग ले रहे हैं, तो किसान उनसे गाइडेंस और तकनीकी सलाह लेने के लिए ज्यादा आने लगे. धीरे-धीरे उनकी दुकान एक भरोसेमंद केंद्र बन गई, जहां किसानों को अच्छी क्वालिटी के इनपुट के साथ-साथ खेती से जुड़ी सही जानकारी भी मिलने लगी.

DAESI प्रोग्राम ने उन्हें तनाव प्रबंधन और कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट जैसे जरूरी जीवन कौशल भी सिखाए, जिससे वे किसानों से बेहतर तरीके से बातचीत कर पाए और भरोसे पर आधारित मजबूत रिश्ते बना पाए. जैसे-जैसे उनकी तकनीकी क्षमता और सलाह देने की सेवाएं बेहतर हुईं, उनकी दुकान पर आने वाले किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ती गई.

आर्थिक और सामाजिक बदलाव

DAESI प्रोग्राम का असर सिर्फ जानकारी बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहा. अपने बिजनेस में वैज्ञानिक सलाह सेवाओं को शामिल करके, राजकुमार ने अपनी पिछली कमाई के मुकाबले अपनी आय में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की, और आगे भी इसमें और बढ़ोतरी की अच्छी संभावनाएं थीं. इस प्रोग्राम ने समुदाय में उनकी आर्थिक स्थिति और सामाजिक रुतबे, दोनों में काफी सुधार किया. आज उन्हें सिर्फ एक इनपुट डीलर के तौर पर नहीं, बल्कि एक "कृषि ज्ञान केंद्र" के तौर पर जाना जाता है, जो इलाके के किसानों के लिए वैज्ञानिक गाइडेंस का एक भरोसेमंद सोर्स है.

अपनी यात्रा को याद करते हुए राजकुमार गर्व से कहते हैं-"DAESI कोर्स मेरी कामयाबी की कुंजी है. मैं MANAGE, हैदराबाद का हमेशा आभारी रहूंगा कि उन्होंने मुझे उत्तराखंड की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी, गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में दाखिला लेने का मौका दिया. इस यूनिवर्सिटी में पढ़ना मेरा सपना था, और आज वह सपना सच हो गया है."

वे गर्व के साथ खुद को पंतनगर यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र के तौर पर पेश करते हैं—यह पहचान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि और पेशेवर बदलाव, दोनों का प्रतीक है.

राजकुमार हुरिया की यात्रा दिखाती है कि कैसे लगातार सीखते रहने और वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाने से एक कृषि इनपुट डीलर, किसानों के लिए एक भरोसेमंद एक्सटेंशन पार्टनर बन सकता है. उनकी कहानी DAESI प्रोग्राम के दूरगामी असर को दिखाती है—जैसे तकनीकी क्षमता को मजबूत करना, आजीविका में सुधार करना, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना और जमीनी स्तर पर कृषि सलाह सेवाओं की क्वालिटी को बेहतर बनाना. आज, राजकुमार एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं कि कैसे ज्ञान-आधारित उद्यम, खेती करने वाले किसानों को सशक्त बनाते हुए टिकाऊ कृषि विकास में योगदान दे सकती है.

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