कीटों से बचाती है ये अनोखी तकनीककिसानों के लिए खेती में कीटों से फसल को बचाना हमेशा बड़ी चुनौती रही है. कीटों के हमले से फसल खराब होने का डर रहता है और इससे बचने के लिए किसान कई बार जरूरत से ज्यादा केमिकल कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं. इससे खेती की लागत बढ़ती है और मिट्टी, पानी और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है. हैदराबाद के एक कपल ने इसी समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की और आज उनकी कोशिश एक ऐसे स्टार्टअप में बदल चुकी है, जो किसानों को कम कीटनाशक इस्तेमाल करने में मदद कर रहा है.
यह कहानी है Agri Phero Solutionz विष्णु और उनकी पत्नी कविता की है. कंपनी ने फेरोमोन आधारित तकनीक के जरिए किसानों के लिए कीट नियंत्रण का एक ऐसा तरीका तैयार किया है, जिसमें फसल पर बार-बार रासायनिक स्प्रे करने की जरूरत कम हो सकती है. खास बात यह है कि इस कंपनी को खड़ा करने के लिए शुरुआत में किसी बड़े निवेशक का पैसा नहीं, बल्कि परिवार की बचत और पत्नी के गहनों का सहारा लिया गया.
विष्णु और उनकी पत्नी कविता कृषि क्षेत्र में कीट प्रबंधन से जुड़े काम में पहले से काम कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने किसानों की समस्याओं को करीब से देखा. खेतों में बार-बार कीटों का हमला, फसल बचाने के लिए ज्यादा मात्रा में कीटनाशकों का छिड़काव, बढ़ती खेती की लागत और कीटनाशकों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम उनके सामने लगातार आते रहे.
उन्हें यह भी महसूस हुआ कि किसानों के पास अक्सर यह पता लगाने का आसान तरीका नहीं होता कि खेत में कीटों की संख्या कितनी बढ़ रही है और वास्तव में कब कीटनाशक का इस्तेमाल करना जरूरी है. इसी समस्या ने दोनों को ऐसा समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित किया, जिससे किसान कीटों की मौजूदगी का पहले ही पता लगा सकें और जरूरत के हिसाब से ही स्प्रे करें.
किसी भी नए कारोबार को शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत होती है. विष्णु के सामने भी यही चुनौती थी. उनके पास बड़े निवेश की सुविधा नहीं थी, लेकिन अपने विचार पर भरोसा था. ऐसे समय में उनकी पत्नी कविता ने उनका साथ दिया.
कविता ने अपने सोने के गहने गिरवी रखकर कारोबार शुरू करने के लिए शुरुआती पूंजी जुटाई. परिवार की बचत और इस त्याग के सहारे Agri Phero Solutionz की शुरुआत हुई. विष्णु के मुताबिक, कंपनी किसी बाहरी फंडिंग के सहारे नहीं, बल्कि परिवार के भरोसे और किसानों के लिए कुछ बेहतर करने की सोच के साथ शुरू हुई.
Agri Phero Solutionz के काम का आधार फेरोमोन तकनीक है. फेरोमोन ऐसे प्राकृतिक रासायनिक संकेत होते हैं, जिनका इस्तेमाल कीड़े एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए करते हैं. कुछ कीड़े साथी को आकर्षित करने के लिए फेरोमोन छोड़ते हैं.
इसी प्रक्रिया को किसानों के लिए कीटों की निगरानी के एक आसान तरीके के रूप में इस्तेमाल करती है. खास कीटों के लिए तैयार किए गए सिंथेटिक फेरोमोन को ट्रैप में लगाया जाता है. इसकी मदद से खेत में मौजूद नर कीट ट्रैप की ओर आकर्षित होते हैं और उसमें फंस जाते हैं.
इससे किसान को यह समझने में मदद मिलती है कि खेत में किसी खास कीट की मौजूदगी है या नहीं और उसकी संख्या बढ़ रही है या घट रही है. यानी किसान अंदाजे से कीटनाशक का छिड़काव करने के बजाय खेत की वास्तविक स्थिति देखकर फैसला ले सकता है.
फेरोमोन ट्रैप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह किसी खास कीट को निशाना बनाता है. इसका मतलब यह है कि खेत में मौजूद लाभकारी कीड़ों को नुकसान पहुंचने की संभावना कम होती है. वहीं, रासायनिक कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर कई उपयोगी कीड़े भी प्रभावित हो सकते हैं.
Agri Phero Solutionz अलग-अलग फसलों में नुकसान पहुंचाने वाले कई कीटों के लिए फेरोमोन ल्यूर्स उपलब्ध कराती है. इनमें फॉल आर्मीवर्म, डायमंडबैक मॉथ, कॉटन बॉलवर्म, पिंक बॉलवर्म, टमाटर लीफ माइनर, बैंगन फ्रूट एंड शूट बोरर, फल मक्खी, राइस स्टेम बोरर, रेड पाम वीविल और राइनोसेरोस बीटल जैसे कीट शामिल हैं.
कंपनी के अनुसार, इन ल्यूर्स की कीमत आमतौर पर 15 से 40 रुपये के बीच रहती है. इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी कीटों की शुरुआती निगरानी करना आसान हो सकता है.
कंपनी सिर्फ फेरोमोन ल्यूर्स तक सीमित नहीं है. किसानों की अलग-अलग जरूरतों के लिए डेल्टा ट्रैप, बकेट ट्रैप, फनल ट्रैप, वाटर ट्रैप और स्टिकी ट्रैप जैसे कई विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं.
इसके अलावा रात में सक्रिय होने वाले कीटों को पकड़ने के लिए सोलर पावर से चलने वाला ट्रैप भी तैयार किया गया है. खेत के आकार, फसल और कीट के प्रकार के आधार पर किसान या कृषि दुकानदार अलग-अलग ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं.
विष्णु के लिए Agri Phero Solutionz सिर्फ एक बिजनेस नहीं है. इसका मकसद किसानों को ऐसी तकनीक उपलब्ध कराना है, जिससे वे फसल को कीटों से बचाते हुए रासायनिक कीटनाशकों पर अपनी निर्भरता कम कर सकें.
फेरोमोन ट्रैप किसानों को कीटों की शुरुआती जानकारी देने में मदद करते हैं. अगर समय रहते कीट की पहचान हो जाए तो किसान जरूरत के मुताबिक ही कार्रवाई कर सकता है. इससे अनावश्यक कीटनाशक स्प्रे को कम करने में मदद मिल सकती है और खेती की लागत भी घट सकती है.
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