खाद की कालाबाजारी से किसान परेशानदेश के कुछ राज्यों में खाद का संकट पैदा हो गया है और खाद के लिए किसान बेहाल दिखाई दे रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश से राहत भरी खबर है. यहां पर हाल फिलहाल खाद का किसी तरह का संकट दिखाई नहीं दे रहा है. हालांकि धान का सीजन है और इस सीजन में खाद की एक बड़ी मात्रा किसानों को चाहिए होती है. लेकिन फिलहाल यह संकट नहीं दिखाई दे रहा है. लेकिन कुछ जिलों में खाद की ब्लैक मार्केटिंग की खबरें आ रही हैं. 'आजतक' की टीम ने यूपी के कुछ जिलों में खाद संकट पर रियलिटी चेक किया. आईए जानते हैं उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खाद की उपलब्धता को लेकर क्या हाल है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली को धान का कटोरा कहा जाता है क्योंकि यहां धान की बेहतरीन उपज होती है. यहां के किसान सामान्य चावल तो पैदा करते ही हैं. साथ ही यहां ब्लैक राइस की भी खेती पिछले कई सालों से की जा रही है. चंदौली के किसानों को खाद की बड़ी मात्रा में जरूरत पड़ती है. यहां के किसान धान की नर्सरी डाल रहे हैं. ऐसे में हाल फिलहाल उन्हें बड़ी मात्रा में खाद की जरूरत नहीं दिखाई दे रही है. चंदौली के उन्नतशील किसान रतन कुमार सिंह बताते हैं कि अभी धान की नर्सरी डाली जा रही है और कुछ दिनों बाद धान की रोपाई शुरू होगी. ऐसे में रोपाई के वक्त खाद की जरूरत पड़ेगी. हाल फिलहाल जनपद में खाद का बहुत बड़ा संकट दिखाई नहीं दे रहा है.
वही चंदौली के जिला कृषि अधिकारी विनोद यादव का कहना है कि जनपद में प्रचुर मात्रा में यूरिया सहित तमाम उर्वरक उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 485 उर्वरक वितरण केंद्र हैं और लगभग 86 सोसाइटियों के माध्यम से भी उर्वरक का वितरण कराया जाता है. ऐसे में सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक वितरण केंद्र और समिति पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए ताकि किसानों को खाद का संकट न झेलना पड़े.
यूपी के बांदा में इन दिनों किसान धान की फसल की बुआई के लिए तैयारी कर रहे हैं. आने वाले समय में धान की नर्सरी की बुआई हो जाएगी, इसके बाद जुलाई माह में खेतों में रोपी जाएगी. स्थानीय किसान संजय ने बताया कि अभी खाद की जरूरत उतनी नहीं होती है, नर्सरी की बुआई के बाद जब धान खेतों में रोपा जाता है तब जरूरत पड़ती है. उस वक्त किसान सरकारी केंद्रों के चक्कर लगाते हैं और उन्हें खाद नहीं मिल पाती. हालांकि अबकी बार डीएम अमित असेरी ने विभाग का ऑडिट कराया है. यानी जिस सोसायटी में जितने किसान रजिस्टर्ड हैं, उनका डेटा निकालकर इतनी ही खाद उस सोसायटी को उपलब्ध कराई जाएगी. प्रशासन का दावा है कि इससे कालाबाजारी भी रुकेगी और सभी किसानों को खाद भी मिल पाएगी. यदि किसी सोसायटी में खाद कम पड़ी, तो उसकी जांच की जाएगी और गड़बड़ मिलने पर कार्रवाई होगी.
पीलीभीत में खाद की किल्लत सरकारी आकड़ों में नहीं है. लेकिन किसानों का कहना है कि उनको जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिल रही है. एक एकड़ में खाद के दो कट्टे किसानों को दिए जाने हैं, लेकिन जिन किसानों को यूरिया की जरूरत ज्यादा है, उनको खाद उनकी जरूरत के हिसाब से नहीं मिल पा रही है. अगर चार एकड़ खेती है तो भी सिर्फ 3 ही कट्टे साल भर में खाद के मिल रहे हैं. किसानों का कहना है खाद मिल रही है, लेकिन इतने में उनकी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है.
वही विभाग की मानें तो उनके पास पर्याप्त खाद मौजूद है. पीलीभीत के उप कृषि निदेशक ने बताया कि अभी 33 हजार मीट्रिक टन यूरिया है. कुछ किसान पूरे सीजन की खाद एक साथ लेना चाहते हैं जबकि जितनी जरूरत है उतना ही लेना चाहिए. नियम है कि एक हेक्टयर में 7 बोरी यूरिया, 5 बैग डीएपी दी जाएगी. प्राइवेट दुकानों में टैगिंग हो रही है, इस पर अधिकारी ने कहा कि अगर कोई प्राइवेट संस्था ऐसा करती है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा.
सहारनपुर में किसानों के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है. कृषि विभाग के डिप्टी कृषि अधिकारी धर्मेंद्र पुंडीर के अनुसार 10 जून तक जिले में 17,964 मीट्रिक टन यूरिया, 6,803 मीट्रिक टन डीएपी और 2,439 मीट्रिक टन एनपीके खाद का स्टॉक उपलब्ध है. खरीफ सीजन को देखते हुए प्रशासन लगातार खाद भंडारों की निगरानी कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनी हुई है. जिले में फिलहाल यूरिया, डीएपी और एनपीके की कोई कमी नहीं है.
फिरोजाबाद जिले में किसान अब धान की फसल बोने के लिए तैयार हैं जिसमें तीन हफ्ते बाद खाद की बहुत जरूरत पड़ेगी. अधिकारियों का कहना है कि जिले में खाद की किल्लत नहीं है. फिरोजाबाद के डांडियामई निवासी किसान प्रवीन शर्मा का कहना है कि सरकारी नियम अनुसार औपचारिकताएं बहुत ज्यादा हैं जिन्हें पूरा करने में बहुत कठिनाई हो रही है. वहीं नगला बुद्धसेन के किसान नितेश कहते हैं कि खाद की कालाबाजारी जोरों पर है. कालाबाजारी करने वाले 1350 रुपये की डीएपी की बोरी को 1700 रुपये तक में बेच रहे हैं. वहीं इस बारे में जिला कृषि अधिकारी सुमित चौहान कहते हैं कि खाद का पर्याप्त भंडार है. किसी भी किसान को जरूरत है तो वह संपर्क करे, डीएपी की कोई किल्लत नहीं है.
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में एक तरफ जहां खाद की कालाबाजारी की घटनाएं सामने आ रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ये दावा कर रहे हैं कि जनपद में कहीं भी कोई खाद की किल्लत नहीं है. समय पर किसानों को खाद उपलब्ध हो रहा है. लेकिन हाल की कुछ घटनाएं खाद कालाबाजारी की तस्वीर बयां करती हैं जिसमें कृषि विभाग द्वारा दो मुकदमे दर्ज कर चार लाइसेंस को रद्द किया गया है. किसान सुमित मलिक बताते हैं कि कहीं भी किसान को कोई खाद नहीं मिल रही है. 5 बीघा खेत के लिए किसानों को एक कट्टा खाद मिलती है. वह भी समय पर उपलब्ध नहीं होती. किसान को पहले अपना फॉर्म रजिस्टर्ड करना पड़ता है, तब कहीं जाकर खाद मिलने की उम्मीद जगती है. कई दिनों की वेटिंग और फिर लाइनों में लगने के बावजूद भी समय पर खाद नहीं मिल पाती है.
देवरिया में किसान इस समय धान की नर्सरी डालने में लगे हैं और अगले दो हफ्ते बाद धान की रोपाई में तेजी आएगी. देवरिया में किसानों ने बताया कि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. लेकिन फार्मर रजिस्ट्री की समस्या आ रही है. जो किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराएगा उसे खाद नहीं मिल पाएगी. विशुनपुरा गांव के रहने वाले विनय कुमार ने बताया कि खाद मिल रही है. वही बरारी गांव के रहने वाले धनंजय मणि त्रिपाठी ने बताया कि सेंटरों पर खाद उपलब्ध है, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने की वजह से उन्हें खाद नहीं मिल पाई है.
वही धनौती गांव के रहने वाले पप्पू यादव को भी फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराने से खाद नहीं मिल पा रही है. इस मामले में जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने बताया कि जनपद में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है, इसकी कोई दिक्कत नहीं है. 21 जून के बाद खाद लेने वाले किसानों की तादाद में वृद्धि होगी.
(इनपुट-सहारनपुर से राहुल कुमार, फिरोजाबाद से सुधीर शर्मा, पीलीभीत से सौरभ पांडे, बांदा से सिद्धार्थ गुप्ता, मुजफ्फरनगर से संदीप सैनी, देवरिया से राम प्रताप सिंह)
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