इस खरीफ जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ा (सांकेतिक फोटो)रासायनिक खाद के संकट के बीच खरीफ 2026 सीजन को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है. इस सीजन के दौरान किसानों के बीच ऑर्गेनिक खाद की मांग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. केंद्र सरकार के मुताबिक, इस सीजन में अब तक किसानों ने 11.17 लाख टन ऑर्गेनिक खाद खरीदी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 3.2 लाख टन था. सरकार का मानना है कि यह बदलाव खेती में पोषण प्रबंधन के नए तरीके अपनाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होने का संकेत है. रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, किसानों के बीच जैविक और वैकल्पिक पोषक स्रोतों को लेकर रुचि बढ़ रही है.
मंत्रालय ने कहा कि ऑर्गेनिक खाद की बढ़ती खरीद यह दिखाती है कि खेतों में पोषण के संतुलित इस्तेमाल पर जोर बढ़ रहा है. हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया कि पारंपरिक उर्वरकों की मांग अभी भी बड़ी बनी हुई है और दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चल रही हैं.
सरकार ने कहा कि खरीफ 2026 के लिए कृषि विभाग ने कुल उर्वरक जरूरत 383.9 लाख टन आंकी है. इसके मुकाबले मौजूदा उपलब्ध स्टॉक 197.56 लाख टन बताया गया है. यानी सीजन की कुल जरूरत का 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक पहले से उपलब्ध है. सामान्य परिस्थितियों में यह स्तर करीब 33 प्रतिशत के आसपास माना जाता है, इसलिए मौजूदा स्थिति बेहतर मानी जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में किसानों ने अब तक 86.65 लाख टन उर्वरक खरीदा है. यह कुल अनुमानित जरूरत का करीब 22.57 प्रतिशत हिस्सा है. सरकार का कहना है कि विभिन्न राज्यों में मांग और आपूर्ति की लगातार समीक्षा की जा रही है, जिससे किसी भी क्षेत्र में कमी की स्थिति न बने.
उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार घरेलू उत्पादन और आयात दोनों पर काम कर रही है. हाल की अवधि में कुल 147.4 लाख टन उर्वरक का उत्पादन और आयात किया गया है. जून महीने में 25 लाख टन से अधिक यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक बंदरगाहों पर पहुंचे हैं. इसके अलावा 17 लाख टन यूरिया की खरीद प्रक्रिया भी जारी है.
सरकार ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी के सभी भुगतान बजटीय प्रावधानों के अनुसार किए जा रहे हैं. उर्वरकों और कच्चे माल की उपलब्धता पर उच्च स्तर पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि खरीफ सीजन में किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो. देश में उर्वरक उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
2021 में कुल उत्पादन 433.29 लाख टन था, जो 2025 में बढ़कर 524.62 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. वहीं, यूरिया उत्पादन 2014-15 के 225 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन हो गया. इसके बावजूद घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत अब भी बड़ी मात्रा में यूरिया और डीएपी का आयात करता है.
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी मद में 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वैश्विक बाजार में कीमतों में तेजी के कारण आयात खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल नीम-कोटेड यूरिया 45 किलो बैग 242 रुपये और डीएपी 50 किलो बैग 1,350 रुपये की दर पर उपलब्ध है. (पीटीआई)
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