
खरीफ सीजन 2026 में धान उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) के तहत विशेष धान बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम के माध्यम से पचेड़ा, बेलटुकरी और बिठिया गांवों के 170 से अधिक किसानों को उन्नत एवं उच्च गुणवत्ता वाली धान किस्मों के बीज वितरित किए गए.
इस पहल का उद्देश्य किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों और उन्नत धान किस्मों को पहुंचाकर फसल उत्पादकता बढ़ाना तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है.कार्यक्रम में किसानों को केवल बीज ही नहीं दिए गए, बल्कि आधुनिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने कहा कि बेहतर उत्पादन के लिए केवल उन्नत बीज पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सके.
उन्होंने आगामी खरीफ सीजन में वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया.
कार्यक्रम के दौरान किसानों को धान की दो उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए गए.
अवधि: 120 से 130 दिन
उत्पादन क्षमता: 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
विशेषता: उच्च उपज देने वाली उन्नत किस्म
अवधि: 135 से 140 दिन
औसत उत्पादन: 35 से 37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
विशेषता: सुगंधित धान, उत्कृष्ट दाना गुणवत्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि CG देवभोग किस्म की बाजार में अच्छी मांग है. इसकी विशेष सुगंध और गुणवत्ता के कारण किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है, जिससे उनकी आमदनी में अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है.
कार्यक्रम समन्वयक एवं संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को धान की वैज्ञानिक नर्सरी तैयार करने, रोपाई की आधुनिक तकनीकों और फसल प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से कीट एवं रोगों के प्रकोप को कम किया जा सकता है तथा उत्पादन लागत को नियंत्रित करते हुए बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है. उन्होंने किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी.
बीज वितरण कार्यक्रम से पूर्व किसानों को संस्थान के प्रायोगिक खेत का भ्रमण भी कराया गया.यहां उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग फसल में किए जा रहे हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के प्रदर्शन का अवलोकन कराया गया.
इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. योगेश येले और डॉ. संदीप अडावी ने हरित खाद के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि इसके उपयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है तथा मिट्टी की संरचना और उर्वरता में सुधार होता है.
उन्होंने बताया कि हरित खाद का उपयोग संस्थान के "खेत बचाओ अभियान" का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण और पुनर्स्थापन करना है.
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और वैज्ञानिक मार्गदर्शन देने के लिए ICAR-NIBSM का आभार व्यक्त किया. किसानों का कहना है कि उन्नत धान किस्मों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी से उन्हें बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी.
कार्यक्रम का संचालन नोडल अधिकारी डॉ. के. सी. शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया.इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया.
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