गुना जिले में खाद की कमीमध्य प्रदेश के गुना जिले में इन दिनों खाद की भारी कमी के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है. खेतों में बोवनी का समय चल रहा है, लेकिन किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है. इसी वजह से किसान दूर-दूर से खाद लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं और घंटों लाइन में खड़े रह रहे हैं.
नानाखेड़ी खाद वितरण केंद्र पर शुक्रवार को एक बहुत भावुक घटना देखने को मिली. उकावद गांव के किसान शिवनंदन रघुवंशी करीब 40 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर खाद लेने पहुंचे थे. उनके पास न तो कोई वाहन था और न ही मोबाइल चलाने की सुविधा. दो दिन तक इंतजार करने के बाद भी जब उन्हें पूरी खाद नहीं मिली, तो वे बहुत दुखी हो गए.
कलेक्टर के सामने उन्होंने अपनी परेशानी बताई और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े. किसान ने बताया कि उन्हें अपनी फसल के लिए छह कट्टे खाद की जरूरत है, लेकिन उन्हें केवल दो कट्टे ही दिए गए. इतने कम खाद से उनकी खेती की समस्या पूरी तरह हल नहीं हो पाएगी.
वहीं, केंद्र पर मौजूद अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं. किसान संजय परिहार ने बताया कि उन्हें टोकन की सही तारीख के बाद भी समय पर खाद नहीं मिल रहा है. किसानों का कहना है कि उन्हें कई बार एनपीके खाद लेने के लिए कहा जाता है, जो डीएपी खाद से ज्यादा महंगी है. डीएपी खाद लगभग 1300 रुपये प्रति कट्टा मिलती है, जबकि एनपीके खाद की कीमत 1940 से 2450 रुपये तक है. पहले से ही डीजल, बीज और खेती की लागत बढ़ चुकी है, ऐसे में महंगी खाद किसानों के लिए और मुश्किलें बढ़ा रही है.
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर किशोर कन्याल ने किसानों से बात की और उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने बताया कि अब रोजाना ज्यादा किसानों को खाद देने की व्यवस्था की जा रही है. पहले जहां 300 किसानों को खाद दी जाती थी, अब इसे बढ़ाकर 500 कर दिया गया है. केंद्र पर माइक लगाने और जानकारी बेहतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसानों को अपनी बारी की सही जानकारी मिल सके. टूटे हुए टेंट को भी दोबारा ठीक करने की बात कही गई है.
इस घटना के बाद नेता जयवर्धन सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि “एक आंसू भी सरकार के लिए चेतावनी है.” उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की आंखों में आंसू खाद संकट और व्यवस्था की कमी की वजह से हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर यही स्थिति रही तो किसानों की खेती प्रभावित होगी और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है.
गुना में खाद की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेत तैयार हैं, लेकिन जरूरी खाद समय पर न मिलने से किसान परेशान हैं. किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही व्यवस्था सुधरेगी और उन्हें समय पर जरूरत के अनुसार खाद मिल सकेगी, ताकि उनकी फसल अच्छी हो और मेहनत बर्बाद न जाए.
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