
चने की खेती अक्टूबर का पहला हफ्ता बीतते ही किसान चने की खेती की तैयारी में लग गए हैं. बता दें कि चना रबी की एक प्रमुख दलहनी फसल है. लेकिन कई बार किसान चने की बेहतर किस्मों को लेकर थोड़े असमंजस में रहते हैं कि आखिर कौन से किस्मों की खेती से उन्हें बंपर पैदावार मिलेगी. ऐसे में अगर आप भी इस रबी सीजन चने की खेती करना चाहते हैं और किस्मों को लेकर चिंतित है तो आज हम आपको चने कि एक उन्नत किस्म के बारे में बताएंगे, जिसकी खेती से आपको बंपर फायदा हो सकता है. वहीं,अगर आप भी चने की खेती करने के लिए किसी किस्म की तलाश कर रहे हैं, तो आप बंगाल ग्राम जाकी-9218 किस्म का बीज NSC से ऑनलाइन अपने घर पर मंगवा सकते हैं.

चने की बंगाल ग्राम जाकी-9218 एक देसी किस्म है जो मात्र 93 से 125 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है. इस किस्म के पौधे की ऊंचाई दो फ़ीट से भी कम होती है. वहीं, इसमें पाला पड़ने की संभावना कम रहती है. ये किस्म मुरझान, जड़ सड़न और कॉलर रॉट रोग के प्रति प्रतिरोधी होता है. इस की पैदावार प्रति हेक्टेयर 18 से 20 क्विंटल तक होती है. साथ ही इस किस्म की खेती बंगाल और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर की जाती है.
वैसे तो रबी सीजन में चने की बुवाई 20 अक्टूबर से 15 नवंबर तक की जाती है. लेकिन अगेती किस्मों की खेती किसान अक्टूबर के महीने में भी कर सकते हैं. वहीं, चने के खेत मे 15 टन गोबर की खाद या 5 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट मिला लें. इसके अलावा अच्छी पैदावार के लिए 20 किलो नाइट्रोजन और 40 किलो फास्फोरस प्रति हेक्टेयर खेतों में मिलाएं. फिर खेतों की अच्छे से जुताई करके चने की बुवाई कर दें.
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