ओडिशा में उर्वरक की कमी के चलते किसानों के बीच अब आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है. इसी के चलते ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने शनिवार को केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है और चालू खरीफ सीजन के दौरान यूरिया की पर्याप्त सप्लाई करने की मांग की है. नवीन पटनायक की यह अपील दक्षिणी ओडिशा के मलकानगिरी, गंजम और नबरंगपुर जिलों में खाद की पर्याप्त आपूर्ति की मांग को लेकर किसानों द्वारा सड़कों पर उतरने की खबरों के बाद आई है.
बता दें कि मलकानगिरी में किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण शुक्रवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर यातायात बाधित हो गया था. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में बीजद अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उनसे अनुरोध किया कि वे कृषक समुदाय के व्यापक हित में इस खरीफ मौसम के दौरान ओडिशा को यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति के लिए आवश्यक कदम उठाएं. बीजद प्रमुख ने कहा कि कृषि ओडिशा की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, जो इसकी 70 प्रतिशत से अधिक आबादी को आजीविका प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में कृषि क्षेत्र में राज्य का विकास शानदार रहा है.
पटनायक ने इस पत्र में उल्लेख किया कि कभी चावल आयातक से ओडिशा अब देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एक प्रमुख योगदानकर्ता बन गया है. पटनायक ने कहा कि ओडिशा चावल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया है और यह प्रौद्योगिकी के उपयोग और पर्याप्त आपूर्ति के कारण संभव हुआ है. उन्होंने कहा कि उर्वरक कृषि उत्पादन के लिए एक प्रमुख इनपुट है और खरीफ सीजन के दौरान फसल की वृद्धि के लिए इसकी सुचारू आपूर्ति बहुत जरूरी है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा के किसानों को इस चालू खरीफ सीजन के दौरान यूरिया मिलने में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
नवीन ने दावा किया कि खरीफ सीजन की शुरुआत में यूरिया की कम आपूर्ति, उसकी कालाबाजारी और मिलावट हमारे किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है. उन्होंने पत्र में लिखा कि कई जिलों में, खासकर आदिवासी जिलों में, यूरिया की अनुपलब्धता के कारण किसान आंदोलन कर रहे हैं. अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे कृषि गतिविधियों में गंभीर व्यवधान पैदा हो सकता है, जिसका उत्पादन पर असर पड़ेगा और किसानों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा.
बीजद प्रमुख ने लिखा कि कई जिलों में, खासकर आदिवासी ज़िलों में, किसान यूरिया की अनुपलब्धता के कारण आंदोलन कर रहे हैं। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे कृषि गतिविधियों में गंभीर व्यवधान पैदा हो सकता है, जिसका उत्पादन पर असर पड़ेगा और किसानों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा. हालांकि राज्य सरकार 7.94 लाख टन यूरिया होने का दावा करती है, लेकिन किसान उर्वरक पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पटनायक ने आरोप लगाया कि पूरे ओडिशा में यूरिया अवैध रूप से सरकार द्वारा स्वीकृत दर से ज़्यादा दाम पर बेचा जा रहा है. सरकार द्वारा नामित वितरण एजेंसी, मार्कफेड, किसानों के बजाय निजी व्यापारियों को सब्सिडी वाले उर्वरक की आपूर्ति कर रही है.
पटनायक ने दावा किया कि ओडिशा में उर्वरक के कम उपयोग के बावजूद, आपूर्ति श्रृंखला के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार ने हमारे किसानों को हाशिये पर धकेल दिया है. उन्होंने आगे कहा कि तालचेर उर्वरक संयंत्र, जिसकी आधारशिला 2018 में रखी गई थी, में हो रही देरी भी चिंता का विषय है. उन्होंने बताया कि वादा किया गया था कि यह संयंत्र 36 महीनों में चालू हो जाएगा, लेकिन 7 साल बाद भी यह चालू नहीं है. किसानों की अशांति और उर्वरक की कमी को ध्यान में रखते हुए, पटनायक ने कहा कि समय की मांग है कि कालाबाजारी पर तत्काल कार्रवाई की जाए और सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरक वितरण से जुड़े दोषी डीलरों और अधिकारियों को दंडित किया जाए.
(सोर्स- PTI)
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