
अरबी की खेतीखरीफ सीजन शुरू होते ही किसान खेतों की तैयारी और अलग-अलग फसलों की खेती में जुट गए हैं. ऐसे में कई किसान पारंपरिक फसलों के अलावा ऐसी नकदी फसल की तलाश में रहते हैं, जिससे कम समय में अच्छा मुनाफा मिल सके. ऐसे किसानों के लिए अरबी (घुइयां) की खेती एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. अरबी की खेती खरीफ मौसम में की जाती है और इसकी बाजार में सालभर अच्छी मांग बनी रहती है. सही किस्म का चयन करने पर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन और अच्छी कमाई कर सकते हैं. अगर आप भी इस सीजन अरबी की खेती करने की योजना बना रहे हैं, तो इसकी उन्नत किस्म राजेंद्र अरबी-2 आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है. आइए जानते हैं इस किस्म की खासियत और इसके बीज कहां से खरीद सकते हैं.
किसान नकदी फसलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन अरबी की राजेंद्र अरबी-2 किस्म का बीज बेच रहा है. इस बीज को आप एनएससी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद कर बंपर कमाई कर सकते हैं. साथ ही इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर भी मंगवा सकते हैं.

राजेंद्र अरबी-2 अरबी की एक उन्नत और अधिक उपज देने वाली किस्म है. यह किस्म लगभग 170–180 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसत उपज 16–18 टन प्रति हेक्टेयर तक होती है. इसके कंदों में कैल्शियम ऑक्सालेट की मात्रा कम होने के कारण खाने पर गले में खुजली या जलन कम होती है. यह किस्म पत्तियों, डंठलों, मुख्य कंद और छोटे कंदों सभी के उपयोग के लिए उपयुक्त है. इसके अलावा इसमें लीफ ब्लाइट (पत्ती झुलसा) रोग के प्रति सहनशील है. वहीं, इसकी भंडारण क्षमता भी अच्छी होती है, जिससे किसान लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण कर बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त कर सकते हैं.
अगर आप भी अरबी की राजेंद्र अरबी-2 वैरायटी की खेती करना चाहते हैं तो इस किस्म के 1 किलो का पैकेट फिलहाल 162 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट पर मिल जाएगा. इसे खरीद कर आप आसानी से अरबी की खेती कर सकते हैं. ऐसे में इस बीज को खरीद कर आप अरबी की खेती कर सकते हैं.
अरबी की अच्छी खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जहां पानी का निकास अच्छा हो. खरीफ मौसम में इसकी बुवाई जुलाई के दौरान की जाती है. बुवाई के लिए स्वस्थ कंदों का चयन करें और उन्हें 45–60 सेमी की दूरी पर लगाएं. खेत की तैयारी के समय गोबर की सड़ी खाद मिलाएं और संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग करें. फसल में समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाने से कंदों का विकास बेहतर होता है. लगभग 5–6 महीने में फसल तैयार हो जाती है और अच्छी देखभाल करने पर किसानों को बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा मिलता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today