खाद के लिए 8 दिनों से परेशान थे किसानमहाराष्ट्र के अकोला जिले में यूरिया खाद को लेकर किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. कई किसान पिछले 8 दिनों से लगातार सुबह 3 बजे से लाइन में लग रहे थे, लेकिन फिर भी उन्हें खाद आसानी से नहीं मिल पा रही थी. हालात ऐसे बन गए थे कि किसान रात से ही खाद वितरण केंद्रों के बाहर पहुंच जाते थे, ताकि उन्हें अपनी बारी मिल सके. इसके बावजूद भी कई किसानों को बार-बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा था.
खाद की कमी और अव्यवस्थित वितरण के कारण किसानों में गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ते जा रहे थे. किसानों का कहना था कि वे कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सही व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है. इस पूरी स्थिति में किसानों की फसल भी प्रभावित होने का डर बना हुआ था, क्योंकि समय पर खाद न मिलने से खेती पर सीधा असर पड़ता है.
इसी बीच ‘आज तक’ के संवाददाता धनंजय साबले ने ग्राउंड जीरो से इस पूरी समस्या को देश के सामने रखा. रिपोर्ट में किसानों की लंबी कतारें, उनकी परेशानी और खराब व्यवस्था को विस्तार से दिखाया गया. जैसे ही यह खबर बाहर आई, प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए.
खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों के लिए नई व्यवस्था लागू की गई. अब किसानों को खाद वितरण के लिए कूपन दिए गए, जिससे लाइन में लगने की परेशानी कम हो सके. अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि अब खाद का वितरण व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा और किसी भी किसान को घंटों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
प्रशासन ने यह भी कहा है कि आगे से खाद वितरण व्यवस्था को और बेहतर किया जाएगा, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो. अधिकारियों का कहना है कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा.
राहत मिलने के बाद किसानों ने ‘आज तक’ की रिपोर्ट का धन्यवाद किया. किसानों का कहना था कि अगर यह खबर सामने नहीं आती तो शायद उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता. किसानों ने कहा कि मीडिया ने उनकी आवाज को सही जगह पहुंचाया, जिससे उन्हें राहत मिली.
इस पूरे मामले में खाद वितरण से जुड़े दुकानदारों ने भी मीडिया का धन्यवाद किया. उनका कहना था कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठाए गए, जिससे अब कामकाज आसान होगा और किसानों को भी राहत मिलेगी.
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि जब मीडिया जमीनी स्तर की समस्याओं को सामने लाता है, तो प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ती है. अकोला की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सही रिपोर्टिंग से आम लोगों की समस्याओं का समाधान संभव है और किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है.
ये भी पढ़ें:
अंधा कानून, बहरे अधिकारी: WHO ने जिसे 'कैंसरकारी' बताया, भारत में उसे 'वीआईपी' पास क्यों?
महाराष्ट्र सरकार की नई कर्जमाफी योजना में 5 लाख छूटे किसान शामिल, प्याज के लिए भी उठी मांग
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today