सोयाबीन बीज घोटालामहाराष्ट्र के अमरावती संभाग में सोयाबीन बीज घोटाले पर 'किसान तक' की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है. किसान लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि खरीदे गए सोयाबीन बीज अंकुरित नहीं हो रहे हैं, जिससे उनकी फसल और खेती दोनों प्रभावित हो रही हैं. इस गंभीर समस्या को 'किसान तक' ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर प्रमुखता से उठाया और प्रभावित किसानों की आवाज प्रशासन तक पहुंचाई. इसके बाद कृषि विभाग हरकत में आया और जांच शुरू करते हुए करोड़ों रुपये के संदिग्ध सोयाबीन बीजों की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है.
खरीफ सीजन में अमरावती संभाग के अकोला, अमरावती, वाशिम, बुलढाणा और यवतमाल जिलों के हजारों किसान सोयाबीन बीजों के अंकुरित नहीं होने से परेशान हैं. कई किसानों को दोबारा बुवाई की नौबत आ गई, जिससे उन पर आर्थिक संकट और गहरा गया. किसानों की शिकायतें लगातार 'किसान तक' तक पहुंचीं, जिसके बाद प्रभावित गांवों और किसानों की पीड़ा और खेतों की वास्तविक तस्वीर देश के सामने रखी गई.
ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद कृषि विभाग ने शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए बड़े स्तर पर जांच शुरू की. विभाग के अनुसार अमरावती संभाग से अब तक करीब 3,000 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं. सबसे ज्यादा शिकायतें जिन बीज कंपनियों के खिलाफ मिलीं, उनके बीजों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं. जांच पूरी होने तक कृषि विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए इन कंपनियों के करीब 2,492.57 क्विंटल, यानी लगभग 3.81 करोड़ रुपये के सोयाबीन बीज स्टॉक की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित बीज बाजार में नहीं बेचे जाएंगे, ताकि और किसानों को नुकसान न हो.
कृषि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने अंकुरण नहीं होने की शिकायत दर्ज कराई है, उनके खेतों का निरीक्षण किया जा रहा है. इसके लिए एसडीओ समिति के साथ अतिरिक्त कृषि अधिकारियों की टीमें भी बनाई गई हैं, ताकि शिकायतों का जल्द निपटारा हो सके. यदि जांच में बीज नकली पाए गए, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. सोयाबीन बीजों के अंकुरित नहीं होने का मामला अब केवल किसानों की शिकायत तक सीमित नहीं रहा. अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे तय होगा कि किसानों को हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी और दोषी कंपनियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today