अकोला में सोयाबीन बीज फेल होने पर बढ़ा विवाद, पूर्व MLA ने किसानों के साथ कृषि विभाग के दफ्तर में किया हंगामा

अकोला में सोयाबीन बीज फेल होने पर बढ़ा विवाद, पूर्व MLA ने किसानों के साथ कृषि विभाग के दफ्तर में किया हंगामा

महाराष्ट्र के अकोला में सोयाबीन बीजों की खराब अंकुरण क्षमता को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया. पूर्व विधायक अमोल मिटकरी किसानों के साथ जिला कृषि अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और कथित तौर पर दफ्तर के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर धरने पर बैठ गए.

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अकोला में सोयाबीन बीज फेल होने पर बढ़ा विवाद, पूर्व MLA ने किसानों के साथ कृषि विभाग के दफ्तर में किया हंगामापूर्व विधायक ने नकली बीज की समस्‍या को लेकर किया हंगामा

महाराष्ट्र के अकोला जिले में सोयाबीन बीजों की खराब अंकुरण क्षमता को लेकर शुक्रवार को किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया. पूर्व विधायक अमोल मिटकरी किसानों के साथ जिला कृषि अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर जिला कृषि अधीक्षक मुरलीधर इंगले को उनके कार्यालय के भीतर ही रोक दिया और कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर धरने पर बैठ गए.

खराब बीज बेचने का लगाया आरोप

अमोल मिटकरी का आरोप है कि जिन बीज कंपनियों के सोयाबीन बीज अंकुरण परीक्षण (जर्मिनेशन टेस्ट) में असफल पाए गए थे, उन्हीं कंपनियों के बीज किसानों को बेच दिए गए. उन्‍होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में किसानों की फसल प्रभावित हुई है और कई किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है.

कृषि विभाग और मंत्री पर भी जताई नाराजगी

धरने के दौरान अमोल मिटकरी ने कहा कि किसानों के साथ हुई इस स्थिति के लिए कृषि विभाग जिम्मेदार है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रभावी निगरानी नहीं है. खराब क्‍वालिटी वाले बीज किसानों तक कैसे पहुंचे, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. 

उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जानकारी देने के लिए उन्होंने महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्‍होंने फोन नहीं उठाया. इस पर उन्होंने नाराजगी भी जताई.

दो घंटे तक चला धरना, पुलिस पहुंची मौके पर

करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान जिला कृषि अधीक्षक कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण माहौल बना रहा. कार्यालय के बाहर ताला लगाए जाने और अधिकारी के भीतर मौजूद होने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया.

किसानों ने की मुआवजे और कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मांग की कि जिन बीज कंपनियों के बीज क्‍वालिटी परीक्षण में मानकों पर खरे नहीं उतरे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. साथ ही प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में गुणवत्ता जांच पूरी होने के बाद ही बीजों की बिक्री सुनिश्चित की जाए. आंदोलन के कारण जिला कृषि अधीक्षक कार्यालय का कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा.

इससे पहले, पीड़ि‍त किसान दिलीप काकड़ ने बताया, "मैंने बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लिया है. घर में बेटी की शादी का कर्ज भी है. फसल से कर्ज चुकाने की उम्मीद थी, लेकिन बीज ही नहीं उगे. अब दोबारा बुवाई कैसे करें? सरकार हमारी मदद करे और दोषी कंपनियों पर कार्रवाई करे."

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