ब्लॉक चेन तकनीक के जरिए इस राज्य के किसानों को दिया जा रहा 50 फीसदी अनुदान पर धान का बीज

ब्लॉक चेन तकनीक के जरिए इस राज्य के किसानों को दिया जा रहा 50 फीसदी अनुदान पर धान का बीज

लोहरदगा जिले में एग्री क्लीनिक सेंटर के माध्यम से किसानों को उद्यान विकास योजना की जानकारी दी गई. इस दौरान उन्हें मिर्चा, टमाटर, स्ट्रॉबेरी बीज के बारे में बताया गया और धान का बीज लेने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में बताया गया.

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ब्लॉक चेन तकनीक के जरिए इस राज्य के किसानों को दिया जा रहा 50 फीसदी अनुदान पर धान का बीजकिसानों को अनुदान पर मिल रहा बीज फोटोः ट्विटर

झारखंड में किसानों का धान की खेती करने में आसानी हो और समय धान की बुवाई कर सकें इसके लिए किसानों के बीच अनुदान पर धान के बीज का वितरण किया जा रहा है. इसके जरिए किसानों को ब्लॉक चेन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए धान का वितरण किया जा रहा है. सबसे पहले गोड्डा में इसकी शुरुआत की गई थी और जिले के किसानों के बीच एफपीओ के माध्यम से बीज का वितरण किया गया था. साथ ही किसानों को धान की रोपाई के बारे में कृषक पाठशाला का आयोजन करके उन्हें जानकारी दी जा रही है. इतना ही नहीं किसानों को खेती करने में परेशानी नहीं हो इसके लिए उन्हें केसीसी की भी जानकारी दी जा रही है. 

जिलावार धान वितरण की बात करें तो लोहरदगा जिले में एग्री क्लीनिक सेंटर के माध्यम से किसानों को उद्यान विकास योजना की जानकारी दी गई. इस दौरान उन्हें मिर्चा, टमाटर, स्ट्रॉबेरी बीज के बारे में बताया गया और धान का बीज लेने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में बताया गया. वहीं पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत एग्री क्लीनिक सेंटर में उन किसानों को धान की उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए गए जिन्होंने ब्लॉक चेन तकनीक के तहत धान लेने के लिए अपना पंजीकरण कराया था. 

क्षेत्र के हिसाब दिया जा रहा धान

वहीं पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिला अंतर्गत मेराल किसान उत्पादक संगठन और तैनार पैक्स के किसानों को बीच धान बीज वितरण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है और किसान इसका लाभ ले रहे हैं. धान वितरण में इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि किस क्षेत्र के किसानों को कौन सी प्रभेद की बीज चाहिए तो उनके क्षेत्र के लिए उपयुक्त रहेगा. इसे ध्यान में ऱखते हुए कोडरमा जिले के चंदवारा प्रखंड के चंदवारा पैक्स के किसानों को ब्लॉक चेन तकनीक के माध्यम से धान बीज की किस्म IR-64MTU-1010 और DRRH-2 का वितरण किया गया. 

बुवाई करने में हो रही देरी

झारखंड में धान की खेती के रकबे की बात करें तो यहां पर सामान्य रकबा 15.48 लाख हेक्टेय है. लेकिन पिछले दो सालों से बुवाई के रकबे में आई है. पिछले साल तो बारिश की बेरुखी के कारण कई किसान खेती भी नहीं कर पाए थे. हर साल विभाग द्वारा धान की खेती का रकबा तय किया जाता है. इसके अलावा मकई और दलहनी फसलों का भी रकबा तय किया जाता है. राज्य में मॉनसून की बात करें तो इस साल 20 जून को मॉनसून की एंट्री हुई है. इसके कारण धान की बुवाई करने में देरी हो रही है. हालांकि कई ऐसे किसान हैं जिनके पास अच्छी गुणवत्ता के बीज पहुंच चुके हैं. ॉ


 

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