सूरजमुखी की खेती में है बंपर कमाई. (सांकेतिक फोटो)सूरजमुखी एक तिलहन फसल है. कर्नाटक में इसकी सबसे ज्यादा खेती की जाती है. इस राज्य में किसान लगभग 7.94 लाख हेक्टेयर में सूरजमुखी की खेती करते हैं. इसके बाद आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार का स्थान आता है. खास बात यह है कि सूरजमुखी से खाद्य तेल बनाया जाता है. अभी मार्केट में सूरजमुखी का एमएसपी 6,760 रुपये प्रति क्विंटल है. ऐसे पूरे भारत में सूरजमुखी का रकबा करीब 15 लाख हेक्टेयर है. इसकी औसत उपज 0.6 टन प्रति एकड़ है. लेकिन आज हम कुछ ऐसी तकनीकों के बारे में चर्चा करेंगे, जिसे अपनाकर किसान सूरजमुखी की पैदावार बढ़ा सकते हैं.
किसी भी फसल की बुवाई करने से पहले मिट्टी का चुनाव करना होता है. इसलिए सूरजमुखी की खेती करने से पहले भी किसान मिट्टी की क्वालिटी के हिसाब से ही बीजों की बुवाई करें. कृषि एक्सपर्ट की माने तो सूरजमुखी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बेहतर मानी गई है. वहीं, मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 8.5 बीच होना चाहिए. खास बात यह है कि बीजों की बुवाई करने से पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई कर लें. इसके बाद पाटा चलाकर खेत को समतल कर दें. साथ ही खेत में जल निकासी की भी अच्छी तरह से व्यवस्था करें. क्योंकि सूरजमुखी का पौधा जलभराव को सहन नहीं कर पाता है.
वहीं, सूरजमुखी की फसल के लिए हमेशा प्रमाणित बीज का ही चयन करें. प्रमाणित बीज का अंकुरण अच्छी तरह से होता है. संकुल प्रजाति के लिए 12 से 15 किलो और संकर प्रजाति के लिए 5 से 6 किलो बीज प्रति हेक्टेयर इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए बुवाई के 25 से 30 दिन बाद निराई- गुड़ाई कर सकते हैं. इसके अलावा राशायनिक विधि का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए पेन्डीमेथलीन 30 ईसी की 3.3 लीटर की मात्रा 800 लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार कर लें. इसके बाद आप प्रति हेक्टेयर 72 घंटे के अंदर खेत में छिड़काव कर सकते हैं.
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वहीं, सूरजमुखी के पौधे और फूल जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उसे सहारा की जरूरत पड़ती है. इसलिए यूरिया का छिड़काव करने के बाद पौधों की जड़ों तक 10 से 15 सेंटीमीटर तक मिट्टी चढ़ा दें. अगर खड़ी फसल में दीमक दिखाई दे, तो क्लोरोपायरीफास 20 ग्राम ईसी की 2 से तीन लीटर दवा प्रति हेक्टेयर छिड़काव कर सकते हैं. अगर आप चाहें, तो खाद के रूप में गोबर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. आप प्रति हेक्टेयर 4 टन गोबर भी डाल सकते हैं. इससे फसल की ग्रोथ अच्छी होती है. इसके अलावा 60 किलो फास्फोरस, 40 किलो पोटाश और 25 किलो सल्फर भी डाल सकते हैं.
सूरजमुखी की फसल के लिए सिंचाई भी बहुत जरूरी है. बसंतकालीन फसल की सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करें. इसके बाद आप 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई कर सकते हैं. वहीं, 95 से 105 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है. इसके बाद आप कटाई कर सकते हैं. अगर आप ऊपर बताए गए विधि से खेती करते हैं, तो पैदावार में बढ़ोतरी होगी.
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