आम के बागों में बौर के साथ बढ़ी जिम्मेदारी, मार्च-अप्रैल में ऐसे करें देखभाल तो मिलेगा बेहतर उत्पादन

आम के बागों में बौर के साथ बढ़ी जिम्मेदारी, मार्च-अप्रैल में ऐसे करें देखभाल तो मिलेगा बेहतर उत्पादन

मार्च-अप्रैल में आम के बागों की सही देखभाल से बेहतर उत्पादन पाया जा सकता है. इस दौरान कीट और रोग नियंत्रण, सिंचाई और पोषण प्रबंधन बेहद जरूरी है. समय पर छिड़काव और सही तकनीक अपनाकर किसान आम की फसल को नुकसान से बचा सकते हैं और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

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आम के बागों में बौर के साथ बढ़ी जिम्मेदारी, मार्च-अप्रैल में ऐसे करें देखभाल तो मिलेगा बेहतर उत्पादनआम के बागों की सही देखभाल

देश के उत्तरी हिस्से में आम की फसल पर बौर आ चुके हैं. पूरा पेड़ मंजर से भरा हुआ है. राज्यों में अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां के बड़े हिस्से में आम की बागवानी की जाती है. लाखों किसानों की कमाई का यह सहारा है. यहां की जलवायु आम की कई किस्मों के लिए उपयुक्त है जिससे मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बागवानी की जाती है. इसमें दशहरी, लंगड़ा, बंबई ग्रीन, चौसा, मल्लिका, आम्रपाली, रामकेला, अंबिका, बनारसी प्रजातियां प्रमुख हैं. 

आम की इन सभी प्रजातियों से अच्छी क्वालिटी के फल लेने के लिए मौसम के हिसाब से कृषि कार्य किए जाने चाहिए. रोपाई से लेकर आम के पकने तक किसानों को ध्यान रखना चाहिए ताकि पेड़ पर कीटों और रोगों का प्रकोप नहीं हो. आम के पेड़ से फल अपने समय से ही मिलते हैं, लेकिन बाग में खाद, पानी, निराई, गुड़ाई, रोगों और कीटों की रोकथाम का काम पूरे साल चलता रहता है. ऐसे में किसानों को यह जानना जरूरी है कि मौजूदा महीना मार्च और अप्रैल में आम की बागवानी में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

मार्च

भुनगा और खर्रा रोग की रोकथाम के लिए प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (2 मिली/लीटर) या थायोमेथोक्जाम 25 डब्ल्यू पी (3 ग्राम/लीटर) और घुलनशील गंधक 80 डब्ल्यूपी (2 ग्रा/लीटर) या हेक्साकोनाजोल 5 एसएल (0.2 प्रतिशत) पानी में मिला कर छिड़काव करना चाहिए. खर्रा या दहिया रोग के लिए दूसरा छिड़काव डाइनोकैप (1 मिली/लीटर) पानी में मिलाकर करना चाहिए. यह छिड़काव पहले छिड़काव के 15-20 दिनों के बाद करना चाहिए. दूसरे छिड़काव के 15-20 दिन बाद तीसरा छिड़काव 0.1 प्रतिशत ट्राइडीमार्फ (1 मिली/लीटर) पानी में करना चाहिए.

इसी समय फुदका रोग का प्रकोप होता है. ऐसी दशा में कीटनाशक को फफूंदीनाशक में मिलाया जा सकता है. ध्यान रखें कि परागण के समय कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना है.

बौर को झुलसा और छोटे फलों को एन्थेक्नोज के प्रकोप से बचाने के लिए कार्बेन्डाजिम 63 डब्ल्यू पी. मैन्कोजेब 12 डब्ल्यू पी (2 ग्राम/लीटर) या थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्ल्यूपी (1 ग्राम/लीटर) पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए.

अप्रैल

  • फलों को गिरने से रोकने के लिए एनएए 20 पीपीएम (प्लेनोफिक्स 90 मिली/200 लीटर) का छिड़काव करना चाहिए.
  • पत्ती काटने वाली सूंडी के नियंत्रण के लिए कार्बोरिल (0.2 प्रतिशत) का एक छिड़काव करना चाहिए.
  • गुम्मा व्याधि ग्रस्त बौर को हटा देना चाहिए.
  • जब फल मटर के दानों के बराबर हो जाएं तो सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए. थाले बना कर 10-15 दिनों के अंतराल पर 2-3 सिंचाई करनी चाहिए.
  • आम बाग में फल मक्खी के नियंत्रण के लिए मिथाइल यूजीनाल गंध ट्रैप (10 प्रति हे0) लगाना चाहिए.
  • यदि ईंट के भट्टे बाग के पास हों या आम के बाग की भूमि बलुई हो तो कोयलिया और आंतरिक ऊतक सड़न के समाधान के लिए बोरेक्स 1 प्रतिशत (10 ग्राम/लीटर) का छिड़काव अंतिम सप्ताह में करना चाहिए.
  • प्ररोह भेदक कीट से प्रभावित नए प्ररोहों को काटकर कीट सहित नष्ट कर देना चाहिए. प्ररोह भेदक कीट और पत्ती काटने वाले घुन (वीविल) के नियंत्रण के लिए क्विनालफॉस 25 ईसी (2 मिली/लीटर) का छिड़काव करना चाहिए.
  • ब्लासम ब्लाइट या एन्थेक्नोज का प्रकोप होने पर कार्बेन्डाजिम (कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम/लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए. साथ ही रोग से प्रभावित पत्तियों और टहनियों को तोड़ कर जला देना चाहिए.
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