मई में फसलों की देखभाल (AI- तस्वीर)मई का महीना खेती-बाड़ी में काफी अहम माना जाता है. इस महीने में किसानों को अपनी खेतों में कई सारे काम होते हैं. गेहूं की कटाई से लेकर जायद फसलों की खेती तक. इसके अलावा कई राज्यों में इस महीने में अंत तक किसान खरीफ फसलों की खेती में जुट जाते हैं. वहीं, इस महीने किसानों को क्या करना चाहिए इस बात का भी ध्यान रखना काफी जरूरी होता है. ऐसे में बिहार कृषि विभाग की ओर से इस महीने किन फसलों में क्या करना है, उसकी जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं कि किसान मई में क्या करें.
1. प्याज का थ्रिप्स कीट से बचाव: प्याज की फसल में थ्रिप्स कीट से बचाव के लिए पहले बताए गए उपायों का सही तरीके से पालन करें. साथ ही बरसात में बोई जाने वाली प्याज की खेती के लिए अभी से नर्सरी या बीज तैयार करने वाली जमीन की तैयारी शुरू कर दें, ताकि समय पर अच्छी फसल मिल सके.
2. तिल की फसल में सिंचाई: गरमा मौसम में बोई गई तिल की फसल में समय-समय पर सिंचाई करते रहें, ताकि पौधों में नमी बनी रहे. साथ ही फसल में कीट दिखाई देने पर जरूरत के अनुसार दवा का छिड़काव करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.
3. मूंग और उड़द की निराई-गुड़ाई: गरमा मौसम की मूंग और उड़द की फसल में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें, ताकि खरपतवार न बढ़ें और पौधों की अच्छी बढ़वार हो सके. साथ ही फसल को कीट और बीमारियों से बचाने के लिए नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर उचित दवा का इस्तेमाल करें. अगर गरमा मूंग की फसल में तना मक्खी का प्रकोप दिखाई दे, तो उसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल दवा की 1 मिली मात्रा को 3 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करें.
4. मक्का की फसल का कीट से बचाव: मक्का की खड़ी फसल में धड़छेदक कीट से बचाव के लिए पहले बताए गए उपायों का पालन करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके. वहीं, मई महीने के आखिर तक बसंतकालीन मक्का और सूरजमुखी की फसल की कटाई और दौनी का काम पूरा कर लें. कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर ही भंडारण करें, ताकि उनमें नमी न रहे और फसल लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहे.
5. धान और मक्का के लिए खेत की तैयारी: खरीफ धान और जल्दी बोई जाने वाली वर्षाकालीन मक्का की खेती के लिए खेतों की तैयारी अभी से शुरू कर दें. खेत में जैविक खाद डालकर उसे अच्छी तरह मिट्टी में मिला लें, ताकि मिट्टी की उर्वरता बढ़े और फसल की अच्छी पैदावार मिल सके.
6. धान की खेती के लिए बीजों की व्यवस्था: खरीफ धान की खेती के लिए अभी से अच्छे बीजों की व्यवस्था कर लें. राजेंद्र मंसूरी और नाटी मंसूरी (MTU-7029) जैसी लंबी अवधि वाली किस्मों की बुवाई के लिए नर्सरी या पौधशाला तैयार करना शुरू कर दें. ध्यान रखें कि बीज बोने से पहले उनका बीजोपचार जरूर करें, ताकि फसल को शुरुआती बीमारियों और कीटों से बचाया जा सके.
7. ढैंचा या मूंग की बुवाई करें: धान की खेती वाले खेतों में हरी खाद के लिए मई महीने की शुरुआत में ही ढैंचा या मूंग की बुवाई कर दें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जमीन में जैविक तत्व मिलते हैं और धान की फसल को बेहतर पोषण मिलता है.
1. सिंचाई का सही समय चुनें
तेज गर्मी के दौरान फसलों में सुबह जल्दी या शाम के समय ही सिंचाई करें. दोपहर में पानी देने से मिट्टी तेजी से गर्म होती है, जिससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फसल कमजोर पड़ सकती है.
2. मल्चिंग का इस्तेमाल जरूर करें
खेत में पुआल, सूखी घास या फसल के अवशेष बिछाकर मल्चिंग करें. इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, पानी की बचत होती है और गर्मी का असर फसलों पर कम पड़ता है. साथ ही उत्पादन बेहतर होने की संभावना भी बढ़ती है.
3. कीटों पर लगातार नजर रखें
गर्मी और नमी के कारण लीची, सब्जियों और धान की नर्सरी में कीट तेजी से फैल सकते हैं. इसलिए फसलों की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर ही दवा का छिड़काव करें, ताकि बेकार के खर्च और फसल नुकसान से बचा जा सके.
4. मौसम के हिसाब से खेती की योजना बदलें
बारिश और तापमान में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए किसान रोज मौसम की जानकारी लेकर खेती की योजना बनाएं. मौसम को नजरअंदाज करने से फसलों को बड़ा नुकसान हो सकता है.
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