किसान कारवां: विंध्याचल के किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन और वैल्यू एडिशन का मिला ज्ञान

किसान कारवां: विंध्याचल के किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन और वैल्यू एडिशन का मिला ज्ञान

उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ 75 जिलों तक पहुंचकर किसानों के लिए जानकारी और बदलाव का बड़ा मंच बना.29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई.‘कहानी कारवां की’ सीरीज में आज पढ़िए विंध्याचल जोन की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी.

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किसान कारवां: विंध्याचल के किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन और वैल्यू एडिशन का मिला ज्ञान

उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से चल रहा “किसान तक किसान कारवां” प्रदेश के 6 एग्रो क्लाइमेटिक जोन से होते हुए अब विंध्याचल जोन तक पहुंचा . प्रदेश के सभी 75 जिलों में किसानों के बीच खुशहाली, नई तकनीक और आधुनिक खेती का संदेश लेकर निकला यह कारवां किसानों के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सीख, समाधान और प्रेरणा का बड़ा मंच बन गया है.

विंध्याचल जोन के छह जिलों— प्रयागराज, कौशांबी, वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र में किसान कारवां 20 से अधिक गांवों तक पहुंचा.इस दौरान करीब 5 हजार किसानों से संवाद हुआ और लगभग 800 किलोमीटर की यात्रा पूरी की गई.

इस जोन में जहां प्रयागराज, कौशांबी, वाराणसी और चंदौली के समतल क्षेत्रों में किसान आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे हैं, वहीं मिर्जापुर और सोनभद्र के पठारी इलाकों में एफपीओ, मशरूम और मोटे अनाज की खेती किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन रही है.

खेती के दिनों को बढ़ाने की जरूरत

प्रयागराज के सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय के डायरेक्टर एक्सटेंशन डॉ. प्रवीण चरण ने कहा कि उद्योगों में लोग साल के 300 दिनों से अधिक काम करते हैं, जबकि किसान औसतन केवल 130 दिन ही खेती में सक्रिय रहता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यदि खेती को लाभकारी बनाना है तो उन्हें 200 दिनों से अधिक मेहनत करनी होगी.

उन्होंने कहा कि अब किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि अनाज की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन पर भी काम करना होगा. आज किसान उत्पादन करता है लेकिन उसका सबसे ज्यादा लाभ बाजार और व्यापारी उठाते हैं. यदि किसान खुद इन क्षेत्रों में आगे बढ़े तो उसकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है.

जलवायु परिवर्तन बना बड़ी चुनौती

कृषि वैज्ञानिकों ने किसान कारवां के मंच से किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति भी सचेत किया. प्रयागराज कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शिशिर कुमार ने बताया कि आने वाले 10 वर्षों में तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है.

उन्होंने कहा कि यदि तापमान में केवल 1 डिग्री की वृद्धि होती है तो फसलों के उत्पादन में 5 से 10 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. ऐसे में किसानों को मौसम के अनुरूप उन्नत और कम अवधि वाली किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है.

कुक्कुट पालन बना आय बढ़ाने का साधन

विंध्याचल जोन में उत्तर प्रदेश सरकार कुक्कुट पालन को बढ़ावा दे रही है. प्रयागराज के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवनाथ यादव ने बताया कि सरकार 10 हजार मुर्गियों की यूनिट लगाने के लिए करीब एक करोड़ रुपये तक की योजना चला रही है.

इस योजना में किसानों को 70 प्रतिशत तक लोन की सुविधा, बिजली बिल में राहत और ब्याज में छूट दी जाती है. इसके अलावा छोटे स्तर की योजनाओं से अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के लोग भी जुड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं.

एक देसी गाय से 30 एकड़ जैविक खेती संभव

कौशांबी कृषि विज्ञान केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने किसानों को जैविक खेती और पशुपालन का महत्व समझाया.उन्होंने कहा कि एक देसी गाय के सहारे 30 एकड़ तक जैविक खेती की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि देसी गाय से मिलने वाला गोबर और गोमूत्र खेतों के लिए जैविक खाद का काम करता है, जिससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है.वहीं खेतों के अवशेष पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं.

वैज्ञानिक खेती से एक एकड़ में 7 लाख तक कमाई

किसान कारवां के दौरान यह भी सामने आया कि प्रदेश के 85 प्रतिशत से अधिक किसान सीमांत श्रेणी के हैं और उनके पास कम जमीन है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने छोटे खेत से अधिक कमाई का मॉडल किसानों के सामने रखा.

कौशांबी कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष एवं हेड डॉ. अजय कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान एक एकड़ जमीन से 7 लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकता है.

उन्होंने सुझाव दिया कि किसान अपनी जमीन के 60 प्रतिशत हिस्से में पारंपरिक खेती और सब्जी उत्पादन करें, जबकि 40 प्रतिशत हिस्से में मुर्गी पालन, मछली पालन और बकरी पालन को शामिल करें. इससे सालाना आय 5 से 7 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.

बदलते मौसम के अनुरूप उन्नत खेती का मंत्र

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी.पी. सिंह ने किसानों को बदलते मौसम के अनुसार सब्जियों की उन्नत किस्मों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संस्थान हर साल ऐसी किस्में विकसित कर रहा है जो कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा देती हैं.कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत बीज भी वितरित किए गए.

जनप्रतिनिधियों ने की किसान कारवां की सराहना

किसान कारवां को जनप्रतिनिधियों का भी भरपूर समर्थन मिला. वाराणसी में भाजपा विधायक डॉ. त्रिभुवन राम ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम लगातार होने चाहिए क्योंकि इससे किसानों को खेती और सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी मिल रही है.

चंदौली के भाजपा विधायक सुशील सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है और किसान कारवां उन योजनाओं को सरल भाषा में किसानों तक पहुंचाने का बेहतर माध्यम बन रहा है.

वहीं मिर्जापुर की भाजपा विधायक शुचिस्मिता मौर्य ने कहा कि इस कारवां से महिलाएं और किसान दोनों जागरूक हो रहे हैं और उन्हें मशरूम उत्पादन, एफपीओ और पशुपालन जैसे नए रोजगार के अवसरों की जानकारी मिल रही है.

अगेती खेती से बढ़ रही किसानों की आमदनी

चंदौली में किसान कारवां के मंच से किसानों को अगेती खेती के फायदे भी बताए गए. जौनपुर के प्रगतिशील किसान इंद्र सिंह ने बताया कि वह कई वर्षों से मक्का, मटर और सब्जियों की अगेती खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर दाम और अधिक मुनाफा मिल रहा है.उन्होंने किसानों से समय के अनुसार खेती के तरीके बदलने की अपील की.

मत्स्य पालन बना किसानों की नई ताकत

पूर्वांचल और विंध्याचल क्षेत्र में मत्स्य पालन तेजी से किसानों की आय का मजबूत स्रोत बन रहा है. चंदौली के प्रगतिशील किसान मदनजीत सिंह ने “मत्स्य बंधु” नाम से एक एफपीओ बनाया है, जिससे 500 से अधिक किसान जुड़े हैं.

उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन में कम लागत और ज्यादा मुनाफा है. फसल की तरह इसमें तुरंत नुकसान का डर नहीं होता क्योंकि यदि बाजार में दाम कम हों तो मछलियों को तालाब में और समय तक रखा जा सकता है. मछली जितनी बड़ी होगी, मुनाफा भी उतना अधिक मिलेगा.

किसानों के लिए बदलाव का मंच बना किसान कारवां

किसान कारवां ने विंध्याचल जोन में किसानों को केवल जानकारी ही नहीं दी बल्कि उन्हें आधुनिक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी दिखाया. 

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