शाही लीची पर स्टिंक बग कीट का कहरबिहार के मुजफ्फरपुर में विश्व प्रसिद्ध शाही लीची पर इस बार गंधी कीट यानी स्टिंक बग का बड़ा हमला देखने को मिल रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर मीनापुर मुसहरी बोचहा और काटी इलाके में पड़ा है, जहां कई एकड़ में लगी लीची की फसल बर्बाद हो चुकी है. मौसम की बेरुखी और कीटों के बढ़ते प्रकोप ने लीची किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. मीनापुर काटी बोचहा और मुशहरी क्षेत्र में फूल झड़ने, फल गिरने और मंजर सूखने की शिकायत लगातार सामने आ रही है. किसानों का कहना है कि लगातार कीटनाशक छिड़काव के बावजूद स्थिति नियंत्रण में नहीं आ रही. कई किसानों की लाखों रुपये की लागत डूबने की कगार पर है.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक टीम ने प्रभावित बागों का निरीक्षण किया. प्रधान लीची विज्ञानी डॉ. बिनोद कुमार के नेतृत्व में टीम ने आधा दर्जन से अधिक व्यावसायिक बागों का सर्वे किया. जांच में कई बागों में 40 प्रतिशत तक फसल क्षति दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर 90 प्रतिशत तक नुकसान पाया गया.
वैज्ञानिकों ने बताया कि फूल आने और शुरुआती फल विकास के दौरान स्टिंक बग के तेज प्रकोप की वजह से यह हालात बने हैं. निरीक्षण के दौरान कई पेड़ों पर सूखे और फलविहीन मंजर पाए गए. डॉ. बिनोद कुमार ने बताया कि स्टिंक बग के वयस्क कीट प्रवासी प्रकृति के होते हैं. एक बाग में दवा छिड़काव होने पर ये आसपास के बिना छिड़काव वाले बागों में चले जाते हैं और बाद में फिर लौटकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि पहले इसका असर पूर्वी चंपारण के मेहसी इलाके में था, लेकिन अब यह मीनापुर तक पहुंच चुका है. इस साल करीब 60 प्रतिशत बागों में फूल ही नहीं आए, जबकि जहां मंजर निकले वहां कीटों ने भारी नुकसान पहुंचाया. कई बाग ऐसे हैं जहां इस बार लीची लगी ही नहीं.
काटी के किसान इंद्रजीत कुमार ने बताया कि इस बार स्टिंक बग ने पूरी फसल बर्बाद कर दी. फूल आते ही कीट लग गया, जिसके कारण मंजर सूख गए और फल गिरने लगे. लगातार दवा छिड़काव के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि अगर सरकार जल्द सामूहिक छिड़काव और राहत की व्यवस्था नहीं करती है, तो लीची किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.
वहीं, रोहुआ के किसान पवन सिंह ने कहा कि ऐसा नुकसान पहले कभी नहीं देखा गया. पेड़ों में मंजर तो आए, लेकिन कीटों ने फूल और छोटे फलों को पूरी तरह खराब कर दिया. रोज दवा छिड़काव के बावजूद कीट खत्म नहीं हो रहा है और इस बार लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है. किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से शिकायत की. इसके बाद राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की टीम जांच के लिए प्रभावित इलाकों में पहुंची.
वैज्ञानिकों ने किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है. इसके तहत बागों की नियमित सफाई, तनों पर ग्रीस बैंडिंग, अनुशंसित कीटनाशियों का सामूहिक छिड़काव और क्लस्टर आधारित निगरानी अभियान चलाने की बात कही गई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि मंत्रालय को इस पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी जाएगी. नुकसान के आकलन के लिए टास्क फोर्स गठन और सरकारी स्तर पर सामूहिक छिड़काव की तैयारी भी शुरू कर दी गई है.
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