बरसात में पौधा लगाने का टिप्सबरसात का मौसम शुरू होते ही खेतों में हरियाली लौट आई है. इस समय जहां किसान धान की रोपाई में व्यस्त हैं, वहीं बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए भी यह समय सबसे सुनहरा माना जाता है. आम, अमरूद, नींबू, आंवला, सहजन, कटहल, पपीता और अन्य फलदार पौधों की रोपाई के लिए जुलाई और अगस्त का महीना बेहद उपयुक्त होता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से फैलती हैं और पौधों के सूखने की संभावना काफी कम हो जाती है.
हालांकि, केवल बरसात में पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं होता. अगर पौधरोपण के दौरान सही तरीका नहीं अपनाया जाए तो अच्छी क्वालिटी वाला पौधा भी कुछ ही दिनों में खराब हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बरसात के मौसम में पौधरोपण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
किसी भी बाग की सफलता अच्छी क्वालिटी वाले पौधों से शुरू होती है, इसलिए पौधे हमेशा प्रमाणित और रजिस्टर्ड नर्सरी से ही खरीदें. किसान उद्यान विभाग या वन विभाग की नर्सरियों से भी पौधे ले सकते हैं. यहां उचित कीमत पर स्वस्थ, रोग मुक्त और उन्नत किस्मों के पौधे उपलब्ध होते हैं. वहीं, पौधा खरीदते समय यह जरूर देखें कि उसकी जड़ें मजबूत हों, तना स्वस्थ हो और उस पर किसी प्रकार के रोग या कीट का असर न हो.
पौधा लगाने से पहले गड्ढे की तैयारी बेहद जरूरी होती है. सबसे पहले जरूरत के हिसाब से गड्ढा खोद लें. इसके बाद गड्ढे से निकली हुई लगभग एक-तिहाई मिट्टी में बराबर मात्रा में बालू और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. इस मिश्रण में कार्बेंडाजिम जैसी फफूंदनाशी दवा को जरूरत के हिसाब से मिलाकर गड्ढे को भर दें. इससे मिट्टी उपजाऊ बनती है और पौधों की जड़ों को शुरुआती अवस्था में रोगों से सुरक्षा मिलती है.
जुलाई या अगस्त में अच्छी बारिश होने के बाद पौधे लगाना सबसे बेहतर माना जाता है. पौधा लगाते समय सबसे पहले नर्सरी की पॉलिथीन को सावधानी से हटा दें, ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. इसके बाद पौधे को गड्ढे के बीच में रखें और उसकी जड़ों को मिट्टी की ऊपरी सतह से लगभग 2 से 3 इंच नीचे रखें. फिर चारों ओर मिट्टी भरकर हल्के हाथों से दबाएं. वहीं, ध्यान रखें कि मिट्टी को बहुत ज्यादा न दबाएं, क्योंकि इससे जड़ों का विकास प्रभावित हो सकता है.
बरसात का मौसम पौधों के लिए अच्छा होता है, लेकिन खेत में पानी भर जाना पौधों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. ऐसे में यदि पौधरोपण के बाद बारिश नहीं होती है तो तुरंत हल्की सिंचाई करें. वहीं, अगर लगातार बारिश हो रही हो तो खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखें. अधिक समय तक पानी जमा रहने से जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा नष्ट हो सकता है.
पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल भी जरूरी है. यदि कुछ दिनों तक बारिश नहीं होती और मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहती है, तो समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें, ताकि खरपतवार पौधों का पोषण न छीन सकें. इसके अलावा मल्चिंग तकनीक अपनाना भी काफी फायदेमंद होता है. पौधों के आसपास सूखी घास, पत्तियां या भूसे की परत बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और पौधों की जड़ों को भी सुरक्षा मिलती है.
पौधरोपण के बाद समय-समय पर पौधों की जांच करते रहें. यदि किसी पौधे में रोग या कीट के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि या उद्यान विशेषज्ञ की सलाह लेकर उचित उपचार करें. शुरुआती दिनों में पौधों की सही देखभाल करने से उनकी बढ़वार अच्छी होती है और भविष्य में बेहतर उत्पादन मिलता है.
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