Animal Care in Monsoon: बरसात में गाय-भैंस के लिए क्यों जरूरी है शेड, फीड और केयर मैनेजमेंट

Animal Care in Monsoon: बरसात में गाय-भैंस के लिए क्यों जरूरी है शेड, फीड और केयर मैनेजमेंट

Animal Care in Monsoon मॉनसून में नमी के चलते फीड के खराब होने का खतरा बना रहता है. पानी प्रदूषि‍त हो जाता है. जलभराव और छत रिसने से शेड दलदली हो जाता है. इतना ही नहीं इस मौसम में पशुओं को सबसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.

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Animal Care in Monsoon: बरसात में गाय-भैंस के लिए क्यों जरूरी है शेड, फीड और केयर मैनेजमेंटराजस्‍थान में गोवंश के नाम पर करोड़ाें का घोटाला. (Photo: Sharat Kumar/ITG)

शेड में गंदगी हो जाए तो पशु यानि गाय-भैंस बीमार पड़ने लगते हैं. नमी के चलते चारा खराब होने लगता है. मच्छर-मक्खी ज्यादा हो जाते हैं तो उससे बचाने के लिए तमाम उपाय करने पड़ते हैं. इसीलिए कहा जाता है कि बरसात पशुपालकों के लिए राहत कम और परेशानी ज्यादा लेकर आती है. दुधारू पशु छोटी सी परेशानी के चलते तनाव में आ जाते हैं. पशु अगर तनाव में आ जाए तो इसका सबसे पहले असर पशुओं के उत्पादन पर पड़ता है. जबकि बरसात में तो कई वजह ऐसी होती हैं जिसके चलते पशु जल्दी तनाव में आ सकते हैं. 

शेड, फीड और केयर (देखभाल) उन्हीं में से एक है. और अगर ऐसे में ठीक से देखभाल न हो तो भी पशु तनाव में आ जाता है. मॉनसून में बरसात से जितनी राहत मिलती है उससे कहीं ज्यादा पशु और पशुपालकों के लिए परेशानियां खड़ी हो जाती हैं. मॉनूसन के दौरान पशुओं को संक्रमण से होने वाली बीमारियां भी बहुत परेशान करती हैं. 

शेड में गंदगी से होती हैं ये परेशानियां 

  • बरसात के दौरान पशु शेड की छत से पानी रिसाना एक आम परेशानी है. पानी का रिसाव नमी की वजह बनता है, जिससे शेड का फर्श गीला रहता है. 
  • शेड में गोबर और मूत्र पहले से होता है, और फिर जैसे ही पानी मिल जाता है तो अमोनिया गैस बनने लगती है. यही गैस पशु और पशुपालक को परेशान करती है. इसके चलते आंखों में जलन होने लगती है. 
  • पानी का रिसना और गंदे शेड के चलते कोक्सीडियोसिस जैसी बीमारियां होने लगती हैं. 
  • पशुओं के खुर लगातार गीले रहने से फुट सेंट यानी खुर सड़न की परेशानी हो जाती है.
  • शेड की छत वाटर प्रूफ बनाएं. रिसने पर वक्त से मरम्मत कराएं और नालियों को साफ रखें. 

बरसात में ऐसे खराब होता है चारा

  • बरसात में होने वाली हरी घास में पानी की मात्रा ज्यादा हो जाती है. 
  • बरसात की हरी घास में पानी ज्यादा हो जाने से पोषक तत्व कम हो जाते हैं.
  • पशु जब बरसात की हरी घास खाता है तो वो पतला गोबर करने लगता है. 
  • नमी वाली हरी घास खाने और पतला गोबर करने से इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. 
  • बरसाती हरी घास का पशु के दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है.
  • बरसात में हरी घास को धूप में सुखाकर या छाया में मुरझाकर दें.
  • घास में सूखा चारा और सान्द्र आहार मिलाकर दें.
  • फीड ब्लॉक्स या साइलेज भी पशुओं को खि‍लाया जा सकता है. 
  • चारे पर डुबकी (dipping), स्प्रे और पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. 

शेड में इसलिए जरूरी है साफ-सफाई 

  • शेड में गंदगी, नमी रहने से संक्रमण का खतरा बना रहता है. 
  • खासतौर पर बैक्टीरिया और कृमि (वार्म) का अटैक ज्यादा होता है. 
  • कृमि संक्रमध होने से पशुओं में वजन घटना, भूख न लगना, दस्त और खून की कमी प्रमुख लक्षण हैं.
  • बरसात शुरू होने से पहले ही पशुओं को कृमिनाशक दवाईयां देना शुरू कर दें. 
  • मॉनसून में तापमान और नमी बढ़ने से रोगजनक सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ने लगते हैं.
  • बरसात में ज्यादा नमी के चलते शेड में टिक (किलनी) और मक्खियों की संख्या बढ़ने लगती है. 
  • टिक खून चूसने के साथ ही बेग्रेसियोसिस बीमारियां फैलाते हैं. 
  • शरीर में एनीमिया, कमजोरी होने लगती है और पशु की मौत तक हो जाती है. 
  • मक्खी संक्रमण फैलाती हैं जिससे पशु के थनों में जलन होती और दूध उत्पादन कम हो जाता है.
  • टिक और मक्खी से निपटने के लिए एकारिसाइड्‌स (tick repellents) का इस्तेमाल करें.

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