ट्रैक्टर इंडस्ट्री को रफ्तार (AI- तस्वीर)भारत के ट्रैक्टर उद्योग ने वित्त वर्ष 2026 में शानदार प्रदर्शन किया है. इस दौरान ट्रैक्टर की बिक्री पहली बार 10 लाख के आंकड़े को पार कर गई है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इसकी मुख्य वजह गांवों में बढ़ती मांग, जीएसटी में कमी और अच्छी कृषि पैदावार मानी जा रही है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में ट्रैक्टर की बिक्री बढ़कर करीब 10.50 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल के 8.22 लाख यूनिट के मुकाबले लगभग 19 फीसदी ज्यादा है. वहीं, ट्रैक्टर और मशीनीकरण से जुड़ी संस्था के आंकड़ों के अनुसार, पूरे उद्योग की कुल बिक्री करीब 11.60 लाख यूनिट रही. यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025 के 9.39 लाख यूनिट से करीब 18 फीसदी ज्यादा है.
FADA के अनुसार, ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री पहली बार 10 लाख यूनिट के पार पहुंच गई है. इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह अच्छा मॉनसून, रबी फसलों की बेहतर बुवाई और कृषि क्षेत्र में सुधार है. कंपनियों की बात करें तो महिंद्रा एंड महिंद्रा करीब 23.81 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रही. वहीं, इसकी स्वराज डिवीजन 18.76 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर रही. इसके अलावा इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड, टीएएफई और एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किए.
चेन्नई की ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी TAFE ने वित्त वर्ष 2026 में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है. कंपनी ने करीब 2,14,951 ट्रैक्टर बेचे, जो उसका रिकॉर्ड है. इतना ही नहीं भारत में भी कंपनी की बिक्री अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. इसके मैसी फर्ग्यूसन और आइशर जैसे ब्रांडों की बिक्री भी रिकॉर्ड रही.
कंपनी की उपाध्यक्ष लक्ष्मी वेणु ने कहा कि यह साल किसानों और ट्रैक्टर इंडस्ट्री दोनों के लिए काफी अच्छा रहा है. उन्होंने बताया कि गांवों में खेती के काम में मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अब छोटे किसान भी बड़ी संख्या में पहली बार मशीनों का इस्तेमाल करने लगे हैं, जो एक बड़ा बदलाव है. इससे खेती आसान होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा.
एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड के अनुसार, मार्च 2026 में ट्रैक्टर उद्योग की रफ्तार बनी रही. गांवों में लगातार मांग बनी हुई है और कई जगह रबी फसल की कटाई धीरे-धीरे शुरू हो गई है. हालांकि, हाल की बारिश से कटाई में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन जलाशयों में पानी अच्छा होने की वजह से आगे की स्थिति को सकारात्मक माना जा रहा है. कंपनी ने यह भी कहा कि आगे चलकर कुछ दिक्कतें आ सकती हैं. खासकर अंतरराष्ट्रीय हालात (जियो-पॉलिटिकल स्थिति) के कारण उर्वरकों की सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिससे खरीफ फसल की तैयारी प्रभावित हो सकती है.
वहीं, क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक पूनम उपाध्याय के मुताबिक, जीएसटी दर 12 फीसदी से घटाकर 5 प्रतिशत करने से ट्रैक्टर खरीदना आसान हो गया है. इससे नए किसानों को ट्रैक्टर खरीदने में मदद मिली है और पुराने ट्रैक्टर बदलने की मांग भी बढ़ी है. उन्होंने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ने और रबी फसल अच्छी होने से किसानों के पास पैसा आया है, जिससे उनकी खरीद क्षमता बढ़ी है. साथ ही अच्छा मॉनसून, आसान लोन और ट्रैक्टर का खेती के अलावा अन्य कामों में इस्तेमाल भी इसकी मांग बढ़ाने में मदद कर रहा है.
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